बरेली: एक साथ उठी ननद और भाभी की अर्थी, तो रो पड़ा गांव

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अमृत विचार, शेरगढ़। शेरगढ़ के गांव मोहिउद्दीनपुर के लिए शनिवार और रविवार काला अतीत बन गया। यहां ढांग गिरने से घायल हुई युवती ने जहां रविवार तड़के जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। इससे पहले शनिवार को ढांग के नीचे दबने से भाभी की मौत हो चुकी थी। रविवार को जब एक ही घर से …

अमृत विचार, शेरगढ़। शेरगढ़ के गांव मोहिउद्दीनपुर के लिए शनिवार और रविवार काला अतीत बन गया। यहां ढांग गिरने से घायल हुई युवती ने जहां रविवार तड़के जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। इससे पहले शनिवार को ढांग के नीचे दबने से भाभी की मौत हो चुकी थी। रविवार को जब एक ही घर से ननद और भाभी की एक साथ दो अर्थियां उठी तो पूरा गांव रो पड़ा। गांव में रविवार को चूल्हे तक नहीं जले। लोगों का कहना है कि ऐसा दिन किसी को भी ईश्वर कभी न दिखाए।

मृतका कमलेश का फाइल फोटो।

थाना क्षेत्र के गांव मोहिउद्दीनपुर निवासी इंद्रपाल की पत्नी पुष्पा और बहन कमलेश (19) गांव के तालाब से पीला मिट्टी खोदने के लिए गई थीं। मिट्टी खोदने के दौरान ढांग गिर गई। हादसे के बाद चीखपुकार मच गई। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने जैसे तैसे दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक पुष्पा की मौत हो चुकी थी।

वहीं कमलेश गंभीर रूप से घायल हो गई थी। गांव के लोगों ने कमलेश को स्थानीय सीएचसी पर भेजा। जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में सुबह चार बजे कमलेश ने भी दम तोड़ दिया। कमलेश की भाभी पुष्पा का शव गांव में पहले से रखा था। वहीं जैसे ही कमलेश का मौत का समाचार उसकी मां भगवानदेई ने सुना तो वे बेसुध हो गईं। उधर इंद्रपाल कभी पत्नी तो कभी बहन के शव को देखता और दहाड़े मारकर रोने लगता। इंद्रपाल बार बार कहता कि हे भगवान उसने क्या गुनाह किया जो उसकी बहन और पत्नी को छीन लिया।

मृतका पुष्पा देवी का फाइल फोटो।

मां और बुआ के शव को उठाने का प्रयास करते रहे मासूम
इंद्रपाल के पांच बच्चे है। सबसे बड़ा बच्चा 10 वर्ष तो सबसे छोटा ढाई वर्ष का है। कमलेश और पुष्पा के शव को देखकर बच्चे बिलख पड़े। बच्चे कभी पुष्पा के शव को झकझोर कर उठाने का प्रयास करते तो कभी कमलेश को बुआ कहकर पुकारते। लेकिन दोनों चिर निंद्रा में सो चुकी थीं। बच्चे बार बार कहते उठ जाओ मां और बुआ। जब नहीं उठी तो उठाने के लिए प्रयास करते।

ढाई वर्ष का बेटा बार बार दोनों के माथे को चूमता और खेलता, तो कहीं रोने लगता। वह अपनी दादी भगवान देई से बोलता कि मां और बुआ को उठाओ, लेकिन भगवान देई बच्चे की मासूमियत देखकर रोने लगतीं। यह नजारा देखकर वहां मौजूद हर कोई रोने लगा।

मौत के कुएं में उतार देती हैं पेट की भूख
इंद्रपाल खेती किसानी करके अपने परिवार का भरण पोषण करता है। उसके हिस्से में एक कमरा है। जिसमें फर्श और पलास्टर नहीं है। शनिवार को माघ का अंतिम दिन था। यही वजह रही कि ननद कमलेश को लेकर पुष्पा तालाब में घर की लिपाई के लिए पीला मिट्टी लेने गई थी, लेकिन उसे क्या पता था कि जहां वह दोनों जा रही हैं। वहां उनका काल बैठा है। जैसे ही दोनों ने पीला मिट्टी खोदनी शुरू की। वैसे ही ढांग भरभराकर दोनों के ऊपर गिर गई।

वहां मौजूद लोगों ने शोर मचाया तो गांव के लोगों ने मशक्कत के बाद दोनों को निकाला। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पुष्पा की मौत हो चुकी थी। वहीं कमलेश गंभीर रूप से घायल हो गई थी। परिजन उसे सीएचसी पर ले गए। वहां से उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया। इलाज के दौरान रविवार को कमलेश ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

छह महिलाएं पहले भी चुकी हैं घायल
गांव मोहिउद्दीनपुर में यह पहला हादसा नहीं था। इससे पहले भी करीब छह बार ढांग गिर चुकी थी, लेकिन उन हादसों में किसी की भी मौत नहीं हुई। लोगों का कहना है कि छह महिलाएं इस तालाब की ढांग में दब चुकी थीं। लेकिन लोगों ने हर बार उन्हें सही सलामत बाहर निकाल लिया था। इस बार जो हादसा हुआ। उसमें मिट्टी का भार अधिक था। जिस कारण लोगों को मिट्टी हटाने में समय लग गया।

गांव में कोई ऐसा साधन नहीं था, जिससे मिट्टी को जल्दी से हटाया जा सके। जब तक गांव के लोग प्रयास करते तब तक पुष्पा की मौत हो चुकी थी। वहीं कमलेश की भी हालत गंभीर थी।

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