मुरादाबाद : सीओ पर लटकी कार्रवाई की तलवार, पीड़िता को दी थी भीख मांगने की सलाह
मुरादाबाद, अमृत विचार। पति के निधन के बाद पैतृक मकान पर कब्जा करने के लिए जंग लड़ रही महिला को सीओ द्वारा भीख मांगने की सलाह देने पर शासन ने संज्ञान लिया है। महिला की शिकायत पर मामले की जांच जनपद अमरोहा की पुलिस को सौंपी गई है। अमरोहा के एएसपी अजय प्रताप सिंह ने …
मुरादाबाद, अमृत विचार। पति के निधन के बाद पैतृक मकान पर कब्जा करने के लिए जंग लड़ रही महिला को सीओ द्वारा भीख मांगने की सलाह देने पर शासन ने संज्ञान लिया है। महिला की शिकायत पर मामले की जांच जनपद अमरोहा की पुलिस को सौंपी गई है। अमरोहा के एएसपी अजय प्रताप सिंह ने जांच शुरू कर दी है। नोटिस मिलने के बाद पीड़िता ने लिखित रूप से अपने बयान जांच अधिकारी को भेज दिए हैं।
यह मामला है मुगलपुरा थाना क्षेत्र के गुड़िया का मोहल्ला में रहने वाली रीता शर्मा का। उनके अनुसार उनके पति सुशील शर्मा का निधन हो गया है। पति की मौत के बाद मकान के स्वामित्व को लेकर उसका जेठ सुरेंद्र शर्मा से विवाद चल रहा है। कई दफा विवाद हुआ तो मामला पुलिस तक पहुंच गया। कई माह पहले मुगलपुरा थाना पुलिस की मौजूदगी में समझौता हुआ कि रीता मकान में हिस्सा छोड़ देंगी। इसके एवज में सुरेंद्र छह लाख रुपये उन्हें देगा। रीता के अनुसार लिखित समझौता के बाद उसने हिस्सा छोड़ दिया। लेकिन, जेठ ने छह लाख रुपये नहीं दिए। रीता के अनुसार उन्होंने मुगलपुरा पुलिस से शिकायत की तो उन्होंने यह कहकर टरका दिया कि संपत्ति का मामला है, कोर्ट में केस करो।
एडीएम प्रशासन के आदेशों को भी हवा में उड़ाया
मुगलपुरा थाना पुलिस ने जब सुनवाई नहीं की तो पीड़िता ने एडीएम प्रशासन को पत्र देकर गुहार लगाई। बच्चों के भविष्य का हवाला देते हुए तय रकम का भुगतान जेठ द्वारा कराने की मांग की। एडीएम प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ कोतवाली को मामले का निस्तारण कराने के आदेश दिए। बताया जाता है कि एडीएम के इस आदेश को सीओ ने हवा में उड़ा दिया। कुछ दिनों बाद उन्होंने जब दोबारा एडीएम प्रशासन से शिकायत की तो उन्होंने गंभीर रवैया अपनाया। उन्होंने समझौता में शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए जांच के आदेश फिर सीओ सिटी को दिए। इतना ही नहीं उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच किसी अन्य थाने से कराने के भी निर्देश दिए और एक सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट तलब की।
डीएम कार्यालय के सामने भीख मांगने पहुंच गई थी पीड़िता
एडीएम प्रशासन के इस आदेश के बाद पीड़िता रीता को उम्मीद जगी कि शायद उसको न्याय मिल जाएगा। लेकिन, इसके बाद फिर खाकी ने अपना खेल शुरू कर दिया। उस वक्त पीड़िता के बड़े बेटे सौरभ शर्मा का दावा था कि उन्होंने जब इस मामले में सीओ कोतवाली इंदू सिद्धार्थ से मुलाकात की तो उन्होंने फरियाद सुनने के बजाय यह कहकर टरका दिया कि पुलिस कोई मदद नहीं कर पाएगी। भीख मांगकर अपने मकान की रकम जुटाओ। सीओ द्वारा यह कहे जाने पर पीड़िता अगले दिन बेटे सौरभ व नागेश शर्मा के साथ डीएम कार्यालय के सामने भीख मांगने बैठ गई। उनका कहना था कि थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह व दरोगा बालेंद्र यादव उसे धमका रहे हैं। उन्होंने जेठ के साथ मिलकर मकान के उसके हिस्से में कब्जा करवा दिया और अब रकम भी नहीं दिलवा रहे हैं। रीता का कहना था कि जब भीख मांगकर ही रकम जुटानी है तो क्यों न डीएम कार्यालय के सामने ही बैठे। बाद में पुलिस-प्रशासनिक अफसरों ने किसी तरह समझाकर उसे धरना से उठाया था।
अमरोहा में तैनात एएसपी करेंगे जांच
इस मामले में सीओ सिटी इंदू सिद्धार्थ द्वारा भीख मांगने की सलाह देने का आरोप लगाते हुए रीता ने इसकी शिकायत शासन से की थी। हालांकि उस वक्त सीओ सिटी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया था। रीता ने शासन को पत्र भेजकर इस मामले की जांच दूसरे जिले की पुलिस से कराने की मांग की है। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने 25 जनवरी 2021 को पुलिस मुख्यालय के अफसरों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अमरोहा जनपद के अपर पुलिस अधीक्षक अजय प्रताप सिंह को जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद एएसपी ने नोटिस भेजकर महिला को बयान दर्ज करने के संबंध में बुलाया था। पीड़ित महिला रीता शर्मा ने बताया कि इस मामले में उन्होंने अपने बयान लिखित रूप से जांच अधिकारी को भेज दिए हैं। जो आरोप पहले लगाए थे, उन पर वह आज भी कायम हैं।
