नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की दास्तां झकझोर कर रख देगी आपकी संवेदनाएं, कोर्ट में दाखिल की गर्भ समाप्त करने की याचिका

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि 14 वर्षीय बलात्कार पीड़िता की याचिका पर वह आठ मार्च को सुनवाई करेगा, जिसने 26 हफ्ते के अपने गर्भ को हटाने की अनुमति मांगी है। अदालत ने कहा कि मामले में समय महत्वपूर्ण है। प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने हरियाणा की …

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि 14 वर्षीय बलात्कार पीड़िता की याचिका पर वह आठ मार्च को सुनवाई करेगा, जिसने 26 हफ्ते के अपने गर्भ को हटाने की अनुमति मांगी है। अदालत ने कहा कि मामले में समय महत्वपूर्ण है। प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने हरियाणा की तरफ से पेश वकील को लड़की की मेडिकल रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश करने की अनुमति दे दी। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 की धारा तीन, 20 हफ्ते के बाद गर्भपात की अनुमति नहीं देती है।

शीर्ष अदालत ने दो मार्च को करनाल के सिविल अस्पताल के मेडिकल बोर्ड से गर्भपात के आग्रह की व्यवहार्यता पर रिपोर्ट मांगी। पीठ ने कहा, ”मामले में समय महत्वपूर्ण है, इसलिए हम इसे आगामी सोमवार (आठ मार्च) के लिए सूचीबद्ध कर रहे हैं।” पीठ में न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यमन भी शामिल थे।

पीठ ने कहा, ”बहरहाल, प्रतिवादी राज्य की तरफ से पेश वकील को याचिकाकर्ता की मेडिकल रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश करने की अनुमति दी जाती है।” पीठ नाबालिग बच्ची की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसने कहा कि उसके एक रिश्तेदार द्वारा बलात्कार करने के बाद वह गर्भवती है।

संबंधित समाचार