बरेली: तीन साल बाद मिली बेटी तो भर आईं आंखें

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

अमृत विचार, बरेली। तीन साल पहले लापता हुई मूकबधिर किशोरी को परिजनों ने मृत मान लिया था। शनिवार को जब वह वापस मिली तो सबकी आंखें नम हो गईं। किशोरी को परिजन घर ले गए। कानपुर नगर के मालवीय नगर की रहने वाली 18 वर्षीय किशोरी मोनी पुत्री ईश्वर दयाल जुलाई 2018 में डलमऊ कोतवाली …

अमृत विचार, बरेली। तीन साल पहले लापता हुई मूकबधिर किशोरी को परिजनों ने मृत मान लिया था। शनिवार को जब वह वापस मिली तो सबकी आंखें नम हो गईं। किशोरी को परिजन घर ले गए। कानपुर नगर के मालवीय नगर की रहने वाली 18 वर्षीय किशोरी मोनी पुत्री ईश्वर दयाल जुलाई 2018 में डलमऊ कोतवाली पुलिस थाना, रायबरेली को सड़क पर भटकती हुई मिली थी।

पुलिस ने बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे मानसिक मंदित आश्रय गृह एवं प्रशिक्षण केंद्र (ममता आश्रय) बरेली में 24 जुलाई 2018 को दाखिल कर दिया।

मनोसमर्पण संस्था के अध्यक्ष शैलेश कुमार शर्मा ने बताया कि मूकबधिर होने के कारण मोनी कुछ भी बोल नहीं पाती थी लेकिन घर जाने के लिए हमेशा आतुर रहती थी। मोनी लिखना जानती थी इसलिए साइन लैंग्वेज के आधार पर उससे बातचीत की जाती थी। इसी के जरिए मोनी का पता खोजने की कोशिश की गई। संस्था की मनोवैज्ञानिक भारती कश्यप मोनी से इंटरेक्शन करतीं थीं। परिजनों ने भी काफी तलाशने के बाद उसके मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी और उसे मृत मान लिया था।

शनिवार को मोनी के पिता और भाई राजकुमार ममता आश्रय गृह पंहुचे और मोनी को वापस पाकर खुश हो गए। मोनी के पिता ने बताया कि मोनी बचपन से ही कुछ नहीं बोल पाती है लेकिन उसका स्कूल में दाखिला करा दिया था जिस कारण वह कुछ लिख पढ़ लेती है। यही शिक्षा उसे अपनों से मिलाने में मददगार साबित हुई।

संबंधित समाचार