बरेली: कोरोना पकड़ रहा रफ्तार, मंडलीय अस्पताल में लापरवाही
अमृत विचार, बरेली। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए शासन से लेकर प्रशासन तक आमजन को जागरुक करने की कवायदें कर रहा है। लेकिन जिले के मंडलीय जिला अस्पताल में कोरोना गाइडलाइन की अनदेखी संक्रमण को दावत दे सकती है। कोविड-19 से बचाव की सभी एहतियात को नजरंदाज कर जिला अस्पताल परिसर में लग रही …
अमृत विचार, बरेली। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए शासन से लेकर प्रशासन तक आमजन को जागरुक करने की कवायदें कर रहा है। लेकिन जिले के मंडलीय जिला अस्पताल में कोरोना गाइडलाइन की अनदेखी संक्रमण को दावत दे सकती है। कोविड-19 से बचाव की सभी एहतियात को नजरंदाज कर जिला अस्पताल परिसर में लग रही हजारों लोगों की भीड़ से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अंजान हो रहे है।
कोरोना संक्रमितों की बढ़ रही तादाद को देखते हुए विशेषज्ञों ने माह भर में ही हालात बिगड़ने की आशंका जताई है। पिछले माह में स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो 20 फरवरी से पहले संक्रमितों की तादाद प्रतिदिन दो से ढाई हजार सैंपल की जांच होने पर सिर्फ एक, दो रहती थी लेकिन अब इसके सापेक्ष औसतन संक्रमित की दर प्रतिदिन आठ से दस दर्ज हो रही है। करीब पांच से छह गुना तक आंकड़ों में बढ़त ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बेचैन कर दिया है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में नहीं हो रहा नियमों का पालन
शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी नौ बजे खुली। मगर, यहां पर दवा लेने वाले सैकड़ों महिला पुरुष सुबह आठ बजे से ही आकर लाइन में लग गए। ओपीडी खुलते ही पर्चा बनवाने के लिए शटर के बाहर धक्कामुक्की के बीच महिला और पुरुषों की लंबी लाइन लग गई। जहां पर सामाजिक दूरी का पूरी तरह खत्म हो गई। ओपीडी की तस्वीर को देखकर यह लगा कि मरीज और तीमारदार कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर बिल्कुल भी सचेत नहीं हैं।
चिकित्सक के कमरे के बाहर मरीज बिना सामाजिक दूरी का पालन करते हुए दोनों ही अस्पतालों में लंबी लाइन लगाए रहते हैं। यहां पर हर दिन ऐसा ही होता है। भीड़ देखकर डॉक्टर और अफसर भी सामाजिक दूरी को नजरअंदाज कर देते हैं। जिला अस्पताल में मुख्य द्वार पर स्क्रीनिंग के लिए खड़े स्वास्थ्य कर्मी न तो अंदर आने वाले मरीजों या तीमारदार की स्क्रीनिंग करते हैं, न ही सामाजिक दूरी का पालन करने को कहते हैं। अस्पताल में रोजाना सामाजिक दूरी की उड़ाने वाली धज्जियां कहीं स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ के लिए खतरा न बन जाएं।

इलाज तो दूर स्ट्रेचर ही नहीं
जिला अस्पताल में इलाज तो दूर मरीजों को स्ट्रेचर तक नहीं मिल रहा है। शनिवार को नेकपुर निवासी एक युवक अपनी पत्नी को प्लाटर के बाद अपने हाथों में उठाकर ही रिक्शे तक ले गए। इस दौरान एक अस्पताल कर्मी स्ट्रेचर पर दवाइयां रखते हुए भी जाते ही दिखाई दिया।

मरीजों संग नहीं होता सुगम व्यवहार
जिला अस्पताल में शाहजहांपुर निवासी एक युवक ने बताया कि वे जिला कारगार में तैनात है। कोरोना की वैक्सीन लगने के बाद से उसे बुखार और चक्कर आ रहे थे, जिसके बाद वह चिकित्सकीय सलाह पर जिला अस्पताल में शुक्रवार को भर्ती हो गया। उसने बताया एक बार इमरजेंसी वार्ड में न चिकित्सक उसे देखने आए न कोई स्टाफ। स्टाफ से पूछने पर उसने अभ्रदता का आरोप लगाते हुए वीडियो बनाना शुरु कर दिया। जिसके बाद गाली-गलौज की।
लोगों से सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए लगातार कहा जा रहा है, लेकिन अस्पताल आने वाले मरीज या तीमारदार इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। अस्पताल प्रशासन सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए प्रयासरत है। -डा. सुबोध शर्मा, एडीएसआईसी
