बरेली: हाईकोर्ट के फैसले ने बदल दिया आरक्षित सीटों का गणित

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अमृत विचार, बरेली। हाईकोर्ट के आदेश के बाद से एक बार फिर से राजनीतिक सगर्मियां बढ़ गई हैं। वर्ष 2015 के आरक्षण के आधार पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया लागू करने के फरमान से गांवों में फिर से नए समीकरण बनने लगे हैं। नए सिरे से आरक्षण के आदेश के बाद से दावेदारों …

अमृत विचार, बरेली। हाईकोर्ट के आदेश के बाद से एक बार फिर से राजनीतिक सगर्मियां बढ़ गई हैं। वर्ष 2015 के आरक्षण के आधार पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया लागू करने के फरमान से गांवों में फिर से नए समीकरण बनने लगे हैं। नए सिरे से आरक्षण के आदेश के बाद से दावेदारों के चेहरों पर कहीं खुशी तो कहीं मायूसी दिख रही है।

इधर, लंबे समय से चुनाव की तैयारी में जुटे जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान बनने का सपना देखने वालों के घरों पर सन्नाटा है। नए आरक्षण के लिए उन्होंने अभी से जनप्रतिधिनियों से सेटिंग शुरू कर दी है। इधर, पंचायती राज विभाग ने भी कोर्ट के आदेश के बाद नए सिरे से आरक्षण निर्धारित करने के लिए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

पंचायत चुनाव के आरक्षण के संबंध में कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई जिसमें वर्ष 1995 की जगह 2015 के चुनाव को आधार मानकर आरक्षण तय करने को कहा गया है। पूर्व में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए पंचायती राज विभाग ने जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य के लिए प्रस्तावित सूची तैयार करके आपत्ति मांगी थी। इसमें 1193 ग्राम पंचायतों से विभिन्न पदों पर एक हजार से अधिक ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

नए आरक्षण से जिपं अध्यक्ष और सदस्य, ब्लॉक प्रमुख-बीडीसी और ग्राम प्रधान के दावेदारों की गेंद किस्मत के पाले में पहुंच गई है। फिलहाल पंचायती राज विभाग के अधिकारी शासन की नई गाइडलाइंस का इंतजार कर रहे हैं।

मैदान से हो गए थे बाहर, फिर लौटी उम्मीद
पूर्व में आरक्षण सूची जारी होने के बाद पूर्व प्रधान से लेकर ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य आदि को झटका लगा था। आरक्षण जारी होने के बाद उनकी तैयारियां धरी रह गई थीं। कई मैदान से ही बाहर हो गए थे। ऐसे में उनके सामने राजनीतिक संकट भी गहराने लगा था मगर हाईकोर्ट के आदेश से उनको एक बार फिर राहत की उम्मीद है। सर्वाधिक खुशी प्रधान पद के दावेदारों को है। सबसे ज्यादा आपत्तियां भी इसी पद के आरक्षण पर थी।

खूब किया खर्च, अब रुक गया चुनाव प्रचार
सोमवार दोपहर कोर्ट के आदेश से उन दावेदारों को झटका लगा है जो पिछले काफी दिनों से प्रचार-प्रसार में ताकत झोंक रहे थे। सुबह शाम जनसम्पर्क चल रहा था। गांव में पंफ्लेट बांटे जाने के साथ घर के बाहर दीवारों पर स्टीकर चिपाकर वोट की अपील भी की जा रही थी। इतना ही नहीं कुछ ग्राम पंचायतों में तो दावतों का सिलसिला भी शुरू हो चुका था। अब यह सिलसिला अचानक रुक गया। मंगलवार की शाम भी गांवों में कोई दावत नहीं हुई।

जो कभी नहीं दिखे वो सुख-दुख में पहुंच रहे
जनप्रतिनिधियों को चुनावी समय में क्षेत्रवासियों की याद आ ही जाती है। चुनाव होने के बाद वे पीछे मुड़कर नहीं देखते। इस वक्त गांव की राजनीति उलट है। हाईकोर्ट का आदेश आते ही आरक्षण बदलने की तस्वीर साफ हुई तो खर्च बचाने को दावेदारों ने पांव पीछे खींच लिए हैं। गांव में चल रहा दावतों का दौर और ग्रामीणों से जनसंपर्क रोक दिया गया है। हालांकि, इतना जरूर है कि सुख-दुख में परिवार के बीच पहुंचकर अपनी भूमिका बनाने में लगे हैं।

ओबीसी महिला हुई थी जिपं अध्यक्ष की सीट
जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट का आरक्षण ओबीसी महिला हुआ था। इससे राजनीतिक खेमे में हलचल बढ़ गई थी। राजनीतिक पार्टियों ने ताकतवर उम्मीदवार की तलाश शुरू कर दी थी। बीजेपी में सबसे अधिक दावेदार जोर आजमाइश कर रहे थे। लिहाजा अब भी इस सीट पर आरक्षण के बदलाव की आंशका कम बनी है।

इन सीटों पर होगा आरक्षण

01 जिला पंचायत अध्यक्ष
15 ब्लॉक प्रमुख
60 जिला पंचायत सदस्य
14921 ग्राम पंचायत सदस्य
1467 क्षेत्र पंचायत सदस्य
1193 ग्राम पंचायतें

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