मुरादाबाद: सावधान! जिले में खतरे की घंटी बाजा रहे 267 एमडीआर मरीज
मुरादाबाद, अमृत विचार। क्षय और टीबी रोग विभाग ने जनपद में एमडीआर समेत 2500 टीबी के रोगियों की पुष्टि की है। क्षय रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए भले ही सरकार ने कमर कसी है, लेकिन इससे निजात मिलनी दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। सिर्फ मुरादाबाद में ही करीब 2500 लोग …
मुरादाबाद, अमृत विचार। क्षय और टीबी रोग विभाग ने जनपद में एमडीआर समेत 2500 टीबी के रोगियों की पुष्टि की है। क्षय रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए भले ही सरकार ने कमर कसी है, लेकिन इससे निजात मिलनी दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। सिर्फ मुरादाबाद में ही करीब 2500 लोग टीबी की जद में आ चुके हैं, जिनमें 267 मरीज एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस ट्यूबरकोलोसिस) के हैं। अगर आप भी ट्रेन, बस और सार्वजनिक स्थानों पर जा रहे हैं तो सतर्क हो जाएं, नहीं तो संक्रमित हो सकते हैं।
एमडीआर प्रभावित मरीजों को बचाना विभाग के लिये चुनौती बनता जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2020 में करीब 2500 टीबी के रोगी चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 267 एमडीआर के मरीज शामिल हैं। इनका जिले के निजी और सरकारी अस्पतालों में में इलाज चल रहा है। हालात यह है कि इनमें कई मरीज गंभीर रूप से बीमार हैं। इन्हें मल्टी ड्रग रेजिटेंस (एमडीआर) ने अपनी चपेट में ले रखा है। इतना ही नहीं हर महीने 25 प्रतिशत लोग लगातार संक्रमित हो रहे हैं, जो विभाग के लिए चिंताजनक है।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डाक्टर डीके प्रेमी ने भी 267 एमडीआर के मरीजों की पुष्टि की है। टीबी विभाग के रिकार्ड दावा कर रहे हैं कि मुरादाबाद, संभल, रामपुर और अमरोहा जैसे जिलों में टीबी के मरीजों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। जबकि सरकारी महकमा उपयुक्त इलाज से इसे कम करने का दावा कर रहा है।
बीच में दवा छोड़ने पर एमडीआर में हो जाते हैं तब्दील
डाक्टर डीके प्रेमी ने बताया कि मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) के मरीजों को बचाने की चुनौती सबसे ज्यादा है। यह मानने में कतई संकोच नहीं है कि एमडीआर मरीज विभाग के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। उनका कहना है कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज दवा खाने में लापरवाही करते हैं और वे एमडीआर से ग्रसित हो जाते हैं। इन्हें बचाने के लिए दी जाने वाली दवा बेडाकुलीन बाजार में उपलब्ध नहीं है। यह दवा सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही मिलने की वजह से भी दिक्कतें आ रही है। गंभीर स्थिति में मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है।
क्या है एमडीआर टेस्ट
जब टीबी का सामान्य रोगी दवा खाना छोड़ देता है और बरती जाने वाली सवाधानियों को नजर अंदाज करता है तो ऐसे मरीज एमडीआर में तब्दील हो जाते हैं। यह सामान्य टीबी से ज्यादा खतरनाक होता है, इसलिए टीबी संक्रमित लोगों को किसी भी कीमत पर दवा नहीं छोड़नी चाहिए, नहीं तो उनके लिए जानलेवा साबित होता है। एमडीआर टेस्ट से पता चलता है कि किस मरीज को कौन सी दवा ठीक करेगी। मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस होने के बाद रोगी को शरीर के हिसाब से दवा दी जाती है। टेस्ट के बाद डाक्टरों को पता चल जाता है कि रोगी को किस तरह की टीबी है और और इसमें कौन सी दवा देनी है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड दावा कर रहे हैं कि जिले में 267 एमडीआर मरीजों की संख्या हैं। इन रोगियों का जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. डीके प्रेमी ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2020 से लेकर अब तक जिले में करीब 2500 टीबी के रोगी चिह्नित किए गए हैं। इनमें 267 एमडीआर मरीज हैं। लोगों को संक्रमण से बचाने के लिये विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। जिन्हें भी एक हफ्ते से अधिक से खांसी आ रही है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर आशा कार्यकर्ता विभाग को सूचित कर रहे हैं। जांच के बाद रोग की पुष्टि होने पर रोगी को विभाग मुफ्त में दवा दे रहा है।
ये हैं टीबी के लक्षण
– दो सप्ताह से लगातार खांसी आना
– खांसी के साथ बलगम आना
– खांसी के साथ कभी-कभी खून का आना
– भूख कम लगना
– वजन घटना
– शाम के वक्त बुखार आना
– सीने में दर्द होना
-प्रभात तिवारी
