वर्षों पहले था बरेली कॉलेज का नाम, अब हो गया बदनाम

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बरेली, अमृत विचार। वर्षों पुराने बरेली कॉलेज का पूरे प्रदेश में नाम था। इसकी एक अलग पहचान थी। इस कॉलेज से पढ़कर कई छात्रों ने प्रोफेसर, डॉक्टर, राजनेता बनकर एक मुकाम हासिल किया है लेकिन वर्तमान में कॉलेज बदनाम हो गया है। भ्रष्टाचार के साथ अन्य कारणों से इसकी छवि लगातार खराब हो रही है। …

बरेली, अमृत विचार। वर्षों पुराने बरेली कॉलेज का पूरे प्रदेश में नाम था। इसकी एक अलग पहचान थी। इस कॉलेज से पढ़कर कई छात्रों ने प्रोफेसर, डॉक्टर, राजनेता बनकर एक मुकाम हासिल किया है लेकिन वर्तमान में कॉलेज बदनाम हो गया है। भ्रष्टाचार के साथ अन्य कारणों से इसकी छवि लगातार खराब हो रही है। मौजूदा समय में कॉलेज के हालात को लेकर यहां से पढ़कर मुकाम हासिल करने वाले पूर्व छात्र आहत हैं। सभी का कहना है कि यही हाल रहा तो एक दिन कॉलेज अपनी पहचान खो देगा।

1837 में स्थापित बरेली कॉलेज में बरेली के अलावा दूर दराज के जिलों के छात्र पढ़ने आते थे। इस कॉलेज से पढ़कर एसो. प्रो. आलोक खरे वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष बने। प्रो. आलोक श्रीवास्तव एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पादप विज्ञान के शिक्षक और विश्वविद्यालय के क्रीड़ा सचिव भी हैं।

शहर विधायक डा. अरुण कुमार, कैंट विधायक और पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने भी इसी कॉलेज से पढ़ाई की है। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने भी यहीं से अपनी शिक्षा हासिल की है। डा. दीपक कुदेशिया, डा. अतुल अग्रवाल समेत सैकड़ों ऐसे छात्र हैं जिन्होंने यहां से पढ़कर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। कॉलेज के पूर्व छात्रों की मानें उनके समय में शिक्षकों और छात्रों के बीच सीधा संवाद होता था।

शिक्षक प्रत्येक छात्र को अच्छे तरीके से जानते थे। कक्षा में पांच मिनट की देरी से पहुंचने पर शिक्षक अंदर नहीं जाने देते थे। सभी कक्षाएं छात्रों से भरी रहती थीं। इतनी संख्या में छात्र पढ़ते थे कि पहले प्रवेश के लिए मारामारी होती थी और फिर शाम को भी कक्षाएं संचालित होती थीं लेकिन करीब सात साल से शाम की कक्षाएं ही बंद हो गईं। दिन में कक्षाओं में छात्र नहीं मिलते हैं। शिक्षकों और छात्रों के बीच संवाद नहीं रह गया है।

बरेली कॉलेज को विश्वविद्यालय बनाने की मांग कई बार की गई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। जब से सेल्फ फाइनेंस कोर्स शुरू हुए हैं तब से कॉलेज के हालात बदले हैं। उसके बाद कॉलेज से जुड़े लोग पैसे कमाने में जुट गए और शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रशासन भी सख्त नहीं रह गया है। आए दिन कॉलेज में कभी छात्रों की पिटाई की खबर आती है तो कभी किसी कक्षा में छात्र-छात्राएं आपत्तिजनक हालत में पकड़े जाते हैं। अब भ्रष्टाचार को लेकर कॉलेज बदनाम हो रहा है।

जब हम पढ़ते थे तो शिक्षक सीधा संवाद रखते थे। प्रशासन भी काफी सख्त था। करीब 20 सालों में कॉलेज में काफी बदलाव आ गया है। -एसो. प्रो. आलोक खरे, विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान

हमारे समय में काफी अच्छी पढ़ाई होती थी। पांच मिनट की देरी पर शिक्षक कक्षा में नहीं बैठने देते थे। मौजूदा हालात से कॉलेज की छवि खराब हो रही है। -प्रो. आलोक श्रीवास्तव, पादप विज्ञान विभाग, रुविवि

हम बरेली कॉलेज से पढ़े हैं। इस मुकाम पर कॉलेज की पढ़ाई से ही पहुंचा हूं। सैकड़ों लोगों ने अच्छा मुकाम हासिल किया है। मौजूदा स्थिति को लेकर दुख होता है। -डा. अरुण कुमार, शहर विधायक

75 दिन से चल रहा आंदोलन
बरेली कॉलज को विश्वविद्यालय बनाने और 162 अस्थाई कर्मियों को विनियमित करने की मांगों को लेकर 75 दिन से आंदोलन चल रहा है लेकिन कोई भी नतीजा नहीं निकला है। बरेली कॉलेज को विश्वविद्यालय बनाने के लिए कई बार प्रयास हुए लेकिन फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गईं। अस्थायी कर्मचारियों ने 20 मार्च को आमरण अनशन का प्रस्ताव किया था लेकिन इसे टाल दिया गया। कर्मचारी शनिवार को नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार के कार्यालय पर सांकेतिक धरना देंगे।

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