बरेली: होली के रंग में ना पड़े कहीं भंग, संभलकर खरीदें मावा, घर न ले जाएं बीमारी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। होली का त्योहार नजदीक आते ही बाजार में मावा (खोया) की मांग बढ़ गई है। दुकानों पर लोगों की भीड़ नजर आ रही है जिसका फायदा दुकानदार उठाने लगे हैं। मांग बढ़ने के साथ ही उसकी गुणवत्ता के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। बाजार में मावा एक, दो नहीं बल्कि …

बरेली, अमृत विचार। होली का त्योहार नजदीक आते ही बाजार में मावा (खोया) की मांग बढ़ गई है। दुकानों पर लोगों की भीड़ नजर आ रही है जिसका फायदा दुकानदार उठाने लगे हैं। मांग बढ़ने के साथ ही उसकी गुणवत्ता के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। बाजार में मावा एक, दो नहीं बल्कि तीन से चार प्रकार का बेचा जा रहा है। सभी की कीमत में 20 से 30 रुपये का अंतर है। इससे साफ है कि बाजार में मिलावटी मावा की भरमार है। हालांकि, एफएसएडीए की टीम छापेमारी कर रही है। सैंपल भी लिए जा रहे हैं लेकिन इन पर लगाम नहीं लग पा रही है।

कुतुबखाना के मावा बाजार में मावा बेचने वालों की कई दुकानें सजी हैं। खुले में पल्लों में रखकर मावा बेचा जा रहा है। कीमत पूछने पर ग्राहक को तीन से चार तरहों के मावा का सैंपल दिखाया जाता है जिनके मूल्यों में 20 से 30 रुपयों का अंतर होता है। दुकानदारों के हिसाब से सबसे अच्छा मावा 300 से 320 रुपये किलो बेचा जाता है। इसके बाद 280 और 260 रुपये किलो का मावा भी ग्राहकों को दिया जाता है। इस मावे की गुणवत्ता कितनी अच्छी है वो तो सैंपल की जांच में ही सामने आएगा।

दुकानदारों का कहना है कि गांव वाले दूधिया या अन्य लोग ही अपने घर से मावा तैयार करके लाते हैं। वह तो उनसे थोक की कीमत में खरीदकर बेचते हैं। हालांकि कई दुकानों पर तो देखने से ही मावा में मिलावट होने की पहचान साफ तौर पर हो रही थी। जानकारों की माने तो इसे तैयार करने के लिए शकरकंद से लेकर आलू, कैमिकल सब कुछ इस्तेमाल किया जाता है।

कुछ इस तरह से तैयार होता है नकली मावा

  • नकली मावे को तैयार करने के लिए उसमें घटिया किस्म का मिल्क पाउडर मिलाया जाता है। इसमें टेलकम पाउडर, चूना, चॉक और सफेद केमिकल्स जैसी चीजों की मिलावट भी होती है।
  • नकली मावा के लिए दूध में यूरिया, डिटर्जेंट पाउडर और घटिया क्वालिटी का वनस्पति घी मिलाया जाता है।
  • सिंथेटिक दूध बनाने के लिए मामूली वॉशिंग पाउडर, रिफाइंड तेल, पानी और शुद्ध दूध को आपस में मिलाया जाता है। इस तरह एक लीटर दूध से 20 लीटर सिंथेटिक दूध तैयार करते हैं। इस दूध से मावा तैयार किया जाता है।
  • कुछ लोग मावा में शकरकंद, सिंघाड़े का आटा, मैदा या आलू भी मिलाते हैं। मावे का वजन बढ़ाने के लिए आलू और स्टार्च मिलाया जाता है।

ऐसे करें नकली मावे की पहचान

  • 2 ग्राम मावा का 5 एमएल गरम पानी में घोल लें और ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद इसमें टिंचर आयोडीन डालें। मावा नकली होगा तो इसका रंग नीला हो जाएगा।
  • मावे में थोड़ी चीनी डालकर गरम करें। अगर यह पानी छोड़ने लगे तो यह नकली है।
  • मावे को अपने अंगूठे के नाखून पर रगड़ें। असली मावे से घी की महक आएगी।
  • खोया की गोली बनाएं, अगर यह गोली फटने लगे तो समझें मावा नकली या मिलावटी है।
  • असली मावा मुंह में चिपकता नहीं है जबकि नकली मावा चिपक जाएगा।
  • असली मावे खाने से मुंह में कच्चे दूध जैसा स्वाद आता है।

मावा और पेय पदार्थो के लिए गए सैंपल
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की तरफ से गुरुवार को फिर से मावा, मिठाइयां और पेय पदार्थों के सैंपल लिए गए। अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्र के निर्देशन में गठित टीमों ने क्योलड़िया के मै. सुनील किराना स्टोर से बेसन का एक नमूना, मैं. अली हसन किराना स्टोर से रिफाइंड ऑयल का एक नमूना लिया।

सोनू स्वीट्स फतेहगंज पश्चिमी और जय गुरुदेव मिष्ठान भंडार से मावा का एक-एक नमूना लिया गया। इसी के साथ आईवीआरआई रोड स्थित अमित प्रोविजन स्टोर से बेसन एवं कच्ची घानी सरसों के तेल के नमूने लिए। वहीं, अपर नगर मजिस्ट्रेट (द्वितीय) के निर्देश पर परसाखेड़ा से सांई बीरबल दास फूडर्स के यहां से प्रोपराइटरी फूडर्स (लूटमार) एवं बूम-बूम (सोया) का एक-एक नमूना लिया गया। इसी के साथ लूटमार के 24 गत्ते और बूम-बूम सोया के आठ पैकेट सीज किए गए। जिनकी कीमत करीब 11216 रुपये थी।

पोला एवं कुरकरे भी हुए सीज
परसाखेड़ा से ही एसके इंटरप्राइजेस से चटपटा पोला एवं कुरकुरा का एक-एक नमूना लिया गया। साथ ही चटपटा पोला के 940 पैकेट सीज किए गए। जिनकी कीमत करीब 20 हजार रुपये थी। इसी के साथ डेयरी क्रीम कैंडी डेनियर के 52 गत्तों को सीज किया गया जिनकी कीमत करीब 9984 रुपये थी। अभिहित अधिकारी का कहना है कि सभी सैंपलों की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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