मुरादाबाद : किताबें छोड़ बच्चों को थमाया फावड़ा तो मिलेगी सजा
मुरादाबाद, अमृत विचार। सरकार बच्चों की शिक्षा के लिए विद्यालय भवनों को सुंदर बनाने के साथ किताबें, यूनिफार्म, जूता-मोजा, भोजन आदि की व्यवस्था कर रही है। इसके बाद भी अधिकांश ग्रामीण, बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय खेत में अपने साथ काम कराने ले जाते हैं। अब ऐसे अभिभावकों को चिह्नित कर पुलिस सख्त कार्रवाई …
मुरादाबाद, अमृत विचार। सरकार बच्चों की शिक्षा के लिए विद्यालय भवनों को सुंदर बनाने के साथ किताबें, यूनिफार्म, जूता-मोजा, भोजन आदि की व्यवस्था कर रही है। इसके बाद भी अधिकांश ग्रामीण, बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय खेत में अपने साथ काम कराने ले जाते हैं। अब ऐसे अभिभावकों को चिह्नित कर पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।
शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय अधिकारियों को इसके लिए हर महीने पहले और अंतिम सप्ताह में गांव में जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी ने खंड शिक्षाधिकारियों के साथ ही शिक्षकों को भी निर्देशित किया है कि वे प्रत्येक अभिभावक को बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करें और उन्हें बेहतर शिक्षा दिलाने में कोई कसर न छोड़ें। इसके लिए प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को खाना, कपड़े, बस्ता, किताबें आदि नि:शुल्क देकर उन्हें शिक्षा की ओर प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।
जिला बेसिक शिक्षाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि खंड शिक्षाधिकारी और शिक्षक विद्यालय आते और विद्यालय से घर जाते समय खेतों पर ध्यान देते हुए निकलें। यदि कोई बच्चा खेत-खलिहान में काम करता मिलता है तो उसके अभिभावक से संपर्क कर उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करें। इसके बाद भी अगर वो नहीं मानते हैं तो संबंधित थाना प्रभारी का सूचित कर उन्हें जेल भेजवाना सुनिश्चित किया जाए।
जिला बेसिक शिक्षाधिकारी योगेंद्र कुमार ने कहा कि यह पुराना आदेश है। हर बार नए सत्र की शुरुआत से सितंबर माह तक शिक्षकों व संबंधित अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी दी जाती है कि जो बच्चा स्कूल के बजाय खेतों में काम करता दिखाई दे, उसके अभिभावक के खिलाफ जेल भेजने की कार्रवाई की जाए। इस बार भी इस क्रम में शासन ने विभाग को आदेशित किया है।
