मुरादाबाद : बदलते समय के साथ खो गया रंगमंच – डा. प्रदीप शर्मा

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मुरादाबाद, अमृत विचार। शहर में बहुत सारे लोग थिएटर करते रहे, लेकिन वर्तमान में इसका क्रेज कम हो गया है। इसका कारण अब आम आदमी का रुझान थिएटर से हटकर टेलीविजन, सिनेमा और मोबाइल की ओर ज्यादा हो गया है। रंगमंच कर्मी और रिटायर प्रवक्ता डा. प्रदीप शर्मा का कहना है कि मुरादाबाद में पहले …

मुरादाबाद, अमृत विचार। शहर में बहुत सारे लोग थिएटर करते रहे, लेकिन वर्तमान में इसका क्रेज कम हो गया है। इसका कारण अब आम आदमी का रुझान थिएटर से हटकर टेलीविजन, सिनेमा और मोबाइल की ओर ज्यादा हो गया है। रंगमंच कर्मी और रिटायर प्रवक्ता डा. प्रदीप शर्मा का कहना है कि मुरादाबाद में पहले एक ही थिएटर था, जो उत्तर रेलवे के मनोरंजन सदन में बना था। यहां पर रंगमंच कर्मी नाटक करते थे। इसके बाद शासन ने पंचायत भवन को थिएटर बनवाया। लेकिन अब इसमें रंगमंच के कार्यक्रम न होकर अन्य समारोह जैसे शादी या जरनल मिटिंग आयोजित किए जा रहे हैं।

डा. शर्मा का कहना है कि एक ओपन एयर थिएटर भी होता है, जहां खुले आकाश के नीचे मंच पर कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं और दर्शक उनके कद्रदान हुआ करते हैं। विडंबना है कि मुरादाबाद में ऐसा कोई ओपन एयर थिएटर नहीं है, जहां नाटक या अन्य प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किया जा सके। वर्तमान में एक थिएटर में वे तमाम आधुनिक सुविधाओं की भी जरूरत पड़ती है, जो सीमित संसाधनों में मुमकिन नहीं है।

कुछ दिन पहले एक संस्था शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य लोगों को परंपरा से परिचित कराया जा सके। सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि अब हम नाटक देखने के लिए लोगों को बुलाते हैं तो उनके पास समय की कमी है। साथ ही बदलते परिवेश को देखते हुए लोगों में नाटक देखने के प्रति रुचि नहीं रही।

एकाकी नाटक को दी जा रही प्राथमिकता
पहले स्कूल-कालेजों में थिएटर चलाये जाते थे। लेकिन अब विद्यालयों में इसे कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जा रहा है। कुछ पुराने विद्यालय बचे हैं, जहां थिएटर बने हुए हैं। डा. शर्मा का कहना है कि नाटक के लिए हमें ऐसे लोगों की जरूरत होती है, जो समर्पित हो। एक नाटक करने के लिए कलाकारों को काफी रिहर्सल की जरूरत होती है। बहुत पहले वे अपने संसधानों से नाटक करते थे। इसके लिए धनाढ्य लोगों से मदद मांगी जाती थी तो वे सहर्ष करते थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। अब तो सिर्फ एकाकी नाटक को प्राथमिक दी जा रही है। ये कार्यक्रम लगभग 15 मिनट या आधे घंटे का ही होता है। हमारे प्रयासों से जिला कृषि विकास एवं संस्कृति विभाग की प्रदर्शनी लगती है, जिसमें सहारनपुर और लखनऊ आदि जगहों से कलाकारों को बुलाया जाता है, जो नाटक की प्रस्तुति करते हैं।

आज भी ये रंगमंच कर्मी परंपरा को जीवित कर रहे
मुरादाबाद के बडे़ र‍ंगकर्मी स्वार्गीय बलवीर पाठक थे। उन्होंने बहुत से नाटकों में भाग लिया और करवाया भी। वर्तमान में डा. प्रदीप शर्मा, डा. राकेश जैसवाल, डा. आरएन वाजपाई, राजेश रस्तोगी, राजदीप शर्मा, पकंज दर्पण, राकेश बलोदी, ओम प्रकाश ओम, पकंज सुती थिएटर से जुड़े हैं। इन रंगमंच कर्मियों का कहना है कि हमारा उद्देश्य है कि मन की भावना को व्यक्त करना, एक-दूसरे के विचारों को अभिव्यक्त करना। क्योकि एक नाटक में कई सारी चीजे महत्वपूर्ण होती हैं, जिससे लोगों को जागरूक किया जाता है। पूर्व नाटककार स्वर्गीय पंडित वाचस्पति शर्मा, स्वर्गीय बलवीर पाठक, स्वर्गीय ज्ञान प्रकाश सोती , स्वर्गीय राम सिंह चित्रकार, स्वर्गीय कामेश्वर सिंह, स्वर्गीय राजिव सारस्वत आदि थे।

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