बरेली: सोशल मीडिया पर दिखा रहे दम, हम नहीं किसी से कम
बरेली, अमृत विचार। आरक्षण की अंतिम सूची प्रकाशन के बाद पंचायत चुनाव अब जोर पकड़ने लगा है। इस वक्त प्रचार का सबसे बड़ा प्लेटफार्म सोशल मीडिया बना हुआ है। वाट्सएप ग्रुप पर मैसेज भेजकर चुनाव प्रचार किया जा रहा है। इसमें चुनाव की चर्चा ज्यादा होती है। कोई प्रचार के तरीके बता रहा है तो …
बरेली, अमृत विचार। आरक्षण की अंतिम सूची प्रकाशन के बाद पंचायत चुनाव अब जोर पकड़ने लगा है। इस वक्त प्रचार का सबसे बड़ा प्लेटफार्म सोशल मीडिया बना हुआ है। वाट्सएप ग्रुप पर मैसेज भेजकर चुनाव प्रचार किया जा रहा है। इसमें चुनाव की चर्चा ज्यादा होती है। कोई प्रचार के तरीके बता रहा है तो कोई जनसंपर्क की फोटो डाल रहा है। किसी तरह मतदाताओं को लुभाने के लिए जासूसों को सक्रिय कर दिया है। विपक्षी दावेदारों की हर एक गतिविधियों की खबर भी पहुंचा रहे हैं। एक-एक बिंदु पर रिपोर्ट बनाई जा रही है जिससे आगे की रणनीति बनाई जा सके।
पंचायत चुनाव की तिथि व आरक्षण फाइनल हो चुका है। पहले चरण में बरेली जनपद में चुनाव होगा। सभी राजनीतिक दलों का फोकस जिला पंचायत चुनाव पर है। जिले में जिला पंचायत सदस्य की 60 सीटें हैं। इनमें जिस पार्टी के सर्वाधिक सदस्य होंगे। अध्यक्ष भी उसी की पार्टी का होगा। हालांकि, अभी तक पार्टियों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के नाम तक की चर्चा शुरू नहीं हुई है पर सदस्य पद के दावेदारों ने मैदान में ताल ठोक दी है। सपा ने तो 20 समर्थित प्रत्याशियों की प्रथम सूची भी जारी कर दी है।
इधर, सीट हासिल करने के लिए तमाम ग्राम पंचायतों में दावतों का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी हो या बहुजन समाज पार्टी, सभी के जिला पंचायत सदस्य पद के दावेदारों ने कई वार्डों में बिना हाईकमान के आदेश खुद को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। भाजपा नेताओं ने तो प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, पार्टी अध्यक्ष और प्रदेश के मुख्यमंत्री के फोटो सहित पार्टी के झंडे के रंग में अपने बैनर लगवा दिए हैं।
लग्जरी वाहनों से दिखा रहे दम
पंचायत चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल सक्रिय हैं। गांव में सुख-दुख के कार्यक्रमों में दावेदार बखूबी शामिल हो रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य पद के दावेदार तो अपने समर्थकों के साथ लग्जरी गाड़ियों पर बैठकर गांव में अपना रुतबा दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं। एक-एक दावेदार दस से अधिक वाहनों से गांवों की तरफ निकल रहा है। तंग गलियों में भी रुतबा दिखाने को घर के आगे तक वाहन खड़ा करते हैं। वह ग्रामीणों को आश्वासन दे रहे जीत हासिल होने पर उनकी नैया पार लगाने का काम करेंगे।
घरों में फल, बच्चों को दे रहे लालीपॉप
गांवों में प्रचार के दौरान दावेदार व उनके समर्थक बच्चों में टॉफी व लालीपाप देना नहीं भूलते हैं। बच्चे भी उपहार पाने के लालच में उनके पीछे-पीछे दौड़ लगाते रहते हैं। वहीं परिवार में फल बांटे जा रहे हैं। कई ग्राम पंचायतों में तो दावतों को दौर चल रहा है। शराब भी चोरी-छिपे बंट रही है। चिकन का स्वाद भी चखने को मिल रहा है। इसके अलावा जीत का भरोसा दिलाने वाले प्रत्याशी को अलग से मैनेज किया जा रहा है। ग्रामीणों का भी यही कहना है कि आरक्षण फाइनल होते ही गांव में सियासी घमासान शुरू हो गया है।
