बरेली: विश्वविद्यालय परिसर के जंगल में लगी भीषण आग

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। हाईटेंशन लाइन से निकली चिंगारी की वजह से रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में बुधवार शाम भीषण आग लग गई। इससे विवि में हड़कंप मच गया। सुरक्षाकर्मियों के साथ खुद कुलपति को आग बुझाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। तेज हवा के कारण आग फैलती ही जा रही थी। कुलपति आवास, प्रोफेसर व कर्मचारियों …

अमृत विचार, बरेली। हाईटेंशन लाइन से निकली चिंगारी की वजह से रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में बुधवार शाम भीषण आग लग गई। इससे विवि में हड़कंप मच गया। सुरक्षाकर्मियों के साथ खुद कुलपति को आग बुझाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। तेज हवा के कारण आग फैलती ही जा रही थी। कुलपति आवास, प्रोफेसर व कर्मचारियों के क्वार्टर तक लपटें पहुंच गई। करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात पौने आठ बजे तक आग पर काबू पाया जा सका।

दोपहर करीब पौने 3 बजे अचानक 11 हजार की हाईटेंशन लाइन से चिंगारी निकली। इससे रुहेलखंड चौकी के पास वाले क्षेत्र के पास ही स्थित झाड़ियों में आग लग गई। पुलिसकर्मियों ने किसी तरह वहां आग पर काबू पा लिया। इसी दौरान विश्वविद्यालय में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने देखा कि प्रशासनिक भवन के पीछे भी आग लगी है। वहां ऊंची-ऊंची लपटें उठ रही थीं। उन्होंने तुरंत सुरक्षा प्रभारी को सूचना दी। कुछ देर बाद यहां भी आग बुझा ली गई।

कुछ देर बाद देखा कि कुलपति आवास के पीछे भी जंगल धधक रहा था। सुरक्षाकर्मी डंडे लेकर तुरंत वहां पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन सुरक्षाकर्मी वहां चारों तरफ से आग में घिर गए और किसी तरह से जान बचाकर भागे। आवास के पास लगी आग से कुलपति भी परेशान हो गए। वह भी आवास से बाहर निकल आए और पानी का इंतजाम करने में जुट गए। उसके बाद चीफ प्रॉक्टर ने कर्मचारियों की मदद से पानी का छिड़काव कर आग बुझाने का प्रयास किया।

कुलपति आवास की दीवार तक आग पहुंच गई थी। धीरे-धीरे आग पूरे जंगल में फैल गई। फायर ब्रिग्रेड को सूचना दी गई। इतनी देर में आग प्रोफेसर्स के आवास तक पहुंच गई। प्रोफेसर्स के आवास के पीछे बने कर्मचारियों के क्वार्टर्स में रहने वाले कर्मचारी भी परेशान हो गए। सभी जान बचाकर भागने लगे।

सुरक्षाकर्मियों ने उनके घरों से बाल्टी लीं और टंकी से पानी भरकर बुझाने लगे। फायर ब्रिगेड के कर्मचारी पानी उड़ेल रहे थे लेकिन तेज हवा से लपटों के साथ पानी वापस आ रहा था। इसी दौरान पानी खत्म हो जाने पर आग बढ़ी तो फिर सुरक्षाकर्मियों ने ही किसी तरह से आग को बुझाया। उसके बाद आग महिला छात्रावासों की तरफ बढ़ गई।

यहां पर सागौन के सूखे पत्तों को हटाकर आग को बुझाया। उसके बाद आग गुरुकुल और मैकेनिकल विभाग की तरफ पहुंच गई। रात करीब पौने 8 बजे आग पर काबू पाया गया। आग बुझाने के लिए फायर ब्रिग्रेड की गाड़ी पहुंची लेकिन वह भी नाकाफी रही। चीफ प्रॉक्टर जेएन मौर्या, सुरक्षा प्रभारी सुधांशु शर्मा व करीब एक दर्जन सुरक्षाकर्मियों ने बाल्टी से पानी डालकर और झाड़ियों को तोड़कर आग बुझाई।

आग बुझाने के नहीं थे इंतजाम
विश्वविद्यालय परिसर में लगी आग को बुझाने के कोई पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने जब विश्वविद्यालय के स्टाफ से फायर हाइड्रेंट के बारे में पूछा तो किसी को जानकारी नहीं थी। इस वजह से फायर ब्रिगेड को परिसर के बाहर बने हाइड्रेंट से पानी लेने जाना पड़ा। इसमें करीब 20 मिनट का वक्त लगा, तब तक आग और विकराल रूप ले चुकी थी जब भी कहीं आग लगती है तो फायर ब्रिग्रेड की दो गाड़ियां जाती हैं लेकिन यहां पर एक ही गाड़ी पहुंची। दो गाड़ियों को नवाबगंज भेजा गया था। एक फायरकर्मी ने कहा कि विश्वविद्यालय में तो हर साल आग लगती है।

जंगल की सफाई कराने के दिए निर्देश
जंगल में लगी भयानक आग पर कुलपति ने चीफ प्रॉक्टर को जंगल की सफाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसकी झाड़ियों को काटा जाए। इसके अलावा यहां पर फलदार पौधे लगाए जाएं। आग बुझाने के भी इंतजाम किए जाएं। विश्वविद्यालय में लगी आग प्रोफेसर्स के क्वार्टर्स तक पहुंच रही थी लेकिन अधिकांश प्रोफेसर घर से बाहर ही नहीं निकले और न ही आग बुझाने के इंतजामों में सुरक्षाकर्मियों की मदद की।

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