बरेली: 25 साल बाद सोमा को मिला अपनों का साथ

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बरेली, अमृत विचार। 25 साल पहले भटककर शहर पहुंची महिला अपनों के होते हुए भी बेगानों की तरह मानसिक मंदित आश्रय गृह में जिंदगी काट रही थी। इलाज के बाद जब महिला की हालत में सुधार हुआ तो उसने खुद का पता दिल्ली बताया। आश्रय स्थल से जुड़ी एक संस्था ने दिल्ली जाकर उसके परिजनों …

बरेली, अमृत विचार। 25 साल पहले भटककर शहर पहुंची महिला अपनों के होते हुए भी बेगानों की तरह मानसिक मंदित आश्रय गृह में जिंदगी काट रही थी। इलाज के बाद जब महिला की हालत में सुधार हुआ तो उसने खुद का पता दिल्ली बताया। आश्रय स्थल से जुड़ी एक संस्था ने दिल्ली जाकर उसके परिजनों से मुलाकात की और उसके बरेली में होने की बात कही। बुधवार को जब परिजन पहुंचे तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा।

सुभाष विहार, नार्थ ईस्ट दिल्ली निवासी 51 साल की सोमा की शादी दिल्ली में हुई थी। शादी के दो माह बाद ही सोमा मानसिक बीमारी के चलते घर से लापता हो गई। घर वालों ने सोमा को तलाश किया लेकिन वह नहीं मिली। 24 सितंबर, 2014 को सोमा को नारी निकेतन, बरेली से मानसिक मंदित आश्रय गृह एवं सह प्रशिक्षण केंद्र (ममता आश्रय गृह) में स्थानांतरित किया गया।

ममता आश्रय गृह में रहते हुए सोमा का मानसिक चिकित्सालय से उपचार चला। मनोसमर्पण संस्था के अध्यक्ष शैलेश शर्मा ने सोमा की काउंसलिंग की और सोमा से उसके पते की जानकारी लेने की कोशिश की लेकिन वह कुछ बताने की हालत में नहीं थी। संस्था की मनोवैज्ञानिक भारती कश्यप ने भी सोमा की काउंसलिंग की और उसकी मानसिक स्थिति के सुधार के प्रयास किये।

सोमा ने अपना पता सुभाष विहार दिल्ली बताया तो शैलेश शर्मा परिवार को खोजने दिल्ली चले गए। दिल्ली पहुंकर सोमा की बहन से मिले और सोमा के बारे में जानकारी दी। सोमा के जीवित होने की जानकारी सुनकर उनकी बहन सावित्री को यकीन ही नहीं हुआ लेकिन जब शैलेश ने सोमा की फोटो दिखाकर वीडियो कॉल कराई तो उन्हें यकीन हुआ।

बुधवार को सावित्री अपने पति रामनिवास और बहन राजकुमारी के साथ ममता आश्रय गृह सोमा को लेने पहुंचे। ममता आश्रय के अधीक्षक नवीन जौहरी ने सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिजनों ने बताया कि उन्होंने तो सोमा के जिंदा होने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। 25 साल बाद उसे पाकर वे बेहद खुश हैं।

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