बरेली: 450 प्रधानों की शपथ पर पड़ सकता है ‘ग्रहण’

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बरेली, अमृत विचार। जिले की 450 ग्राम पंचायतों में जीत दर्ज करने के बाद भी ग्राम प्रधान शपथ ग्रहण नहीं कर सकेंगे क्योंकि ग्राम पंचायत सदस्य पर 14,921 सदस्यों के सापेक्ष केवल 13,513 नामांकन हुए हैं। ग्राम पंचायत के गठन के लिए ग्राम प्रधान के पास दो तिहाई सदस्य होने चाहिए। इसलिए ग्राम पंचायत सदस्य …

बरेली, अमृत विचार। जिले की 450 ग्राम पंचायतों में जीत दर्ज करने के बाद भी ग्राम प्रधान शपथ ग्रहण नहीं कर सकेंगे क्योंकि ग्राम पंचायत सदस्य पर 14,921 सदस्यों के सापेक्ष केवल 13,513 नामांकन हुए हैं। ग्राम पंचायत के गठन के लिए ग्राम प्रधान के पास दो तिहाई सदस्य होने चाहिए। इसलिए ग्राम पंचायत सदस्य के लिए भी छह महीने के भीतर ही उप चुनाव कराने पड़ेंगे।

जिले में 1193 ग्राम पंचायतों में होने वाले ग्राम प्रधान के चुनाव के लिए कुल 12,620 नामांकन दाखिल हुए हैं। दूसरी ओर ग्राम पंचायत सदस्य के लिए 14,921 सीट जिले में हैं। जिसके सापेक्ष सिर्फ 13,513 नामांकन हुए हैं। इससे साफ है कि इस बार ग्राम पंचायत सदस्य के 1408 पद रिक्त रह जाएंगे।

अनुमान के मुताबिक ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत जुटाना नामुमकिन होगा। जिले की ग्राम पंचायतों में कहीं ग्राम पंचायत सदस्य के 11 तो कहीं 13 तो कहीं 15 पद हैं। ऐसे में ग्राम प्रधान को शपथ लेने के लिए दो-तिहाई बहुमत के हिसाब से क्रमश: 8, 9 और 10 ग्राम पंचायत सदस्य का समर्थन चाहिए। कोरम पूरा होने पर ही वे शपथ ले पाएंगे। लिहाजा ऐसी ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत सदस्य के उप चुनाव तक ग्राम प्रधान को इंतजार करना पड़ेगा।

ग्राम पंचायत सदस्य की भूमिका अहम
ग्राम पंचायत सदस्य चाहें तो वे ग्राम पंचायत के प्रस्ताव से असहमति जता सकते हैं। इससे प्रस्ताव पारित होने में दिक्कत आ सकती है। नियमत: प्रस्ताव पारित न होने पर कोई भी विकास कार्य नहीं हो सकता लेकिन वास्तविकता कुछ और ही होती है। सारी प्रक्रिया कागज पर ही पूरी होती है।

पंचायत सदस्य भी यह जानते हैं कि प्रस्ताव पर उनकी असहमति का कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है, इसलिए वे भी विरोध नहीं करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कोई भी ग्राम पंचायत सदस्य, प्रधान के प्रस्ताव का विरोध करने की जहमत नहीं उठाते क्योंकि वे प्रधान के करीबी होते हैं। प्रधान तो ग्राम पंचायत की फर्जी बैठकें केवल कागज में ही दिखाकर सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर भी बना देते हैं। पंचायत सदस्यों को इन प्रस्तावों की जानकारी तक नहीं हो पाती है।

सदस्य पद के दावेदारों की बल्ले-बल्ले
कुछ ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत सदस्य पद के दावेदारों की बल्ले-बल्ले है। यहां ग्राम प्रधान पद के प्रत्याशी न केवल उनके चुनाव का खर्च उठा रहे हैं बल्कि उन्हें अपने समर्थित मतदाताओं से वोट दिलाने का वादा भी कर रहे हैं ताकि ग्राम पंचायत के कामकाज में उन्हें उनकी मर्जी के हिसाब से ग्राम पंचायत सदस्य का साथ मिलता रहे।

डीपीआरओ ने किया था आगाह
नामांकन पत्रों की बिक्री के समय ही डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार ने सभी एडीओ पंचायत को गांवों के लोगों को आरक्षण की जानकारी देने के निर्देश दिए थे। उनका ग्राम पंचायत सदस्य की अहमियत बताते हुए प्रचार प्रसार कराने को कहा था। यदि जरूरी सदस्यों की संख्या पूरी नहीं होगी तो संबंधित पंचायत का गठन नहीं हो पाएगा। इससे विकास भी प्रभावित होगा।

ग्राम पंचायतों में सदस्यों की दो तिहाई संख्या होनी चाहिए। इसके बिना गठन नहीं हो पाता। यदि किसी गांव में यह स्थिति आयी तो जीत दर्ज करने के बाद भी प्रत्याशी प्रधान पद की शपथ नहीं ले सकेगा। इसके लिए उपचुनाव कराना होगा। -धर्मेंद्र कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी

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