मुरादाबाद: कोरोना से जंग में ताकत बनेगी ‘हाई फ्लो नेजल कैनुला’ मशीन

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मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण महामारी के बीच स्वास्थ्य विभाग ने अच्छी खबर दी है। वायरस के कारण सांस फूलने की समस्या से परेशान मरीजों को अब राहत मिल सकेगी। कोरोना संक्रमण से लड़ाई में हाई फ्लो नेजल कैनुला मशीन ताकत बनेगी। महिला अस्पताल मेटरनिटी विंग में इन मशीनों को तैयार कर लिया गया है। …

मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण महामारी के बीच स्वास्थ्य विभाग ने अच्छी खबर दी है। वायरस के कारण सांस फूलने की समस्या से परेशान मरीजों को अब राहत मिल सकेगी। कोरोना संक्रमण से लड़ाई में हाई फ्लो नेजल कैनुला मशीन ताकत बनेगी। महिला अस्पताल मेटरनिटी विंग में इन मशीनों को तैयार कर लिया गया है। इनकी सहायता से सांस फूलने की समस्या से परेशान कोरोना संक्रमितों को बचाया जा सकेगा। इसके लिए टीम भी तैयार कर ली गई है।

महिला अस्पताल मेटरनिटी विंग को पिछले साल पहले एल-वन के रूप में खोला गया था। सामान्य आक्सीजन सिलेंडरों के जरिए कोरोना मरीजों की सांस लौटाने की कोशिश की जाती थी। लेकिन, यह विधि इतनी कारगर नहीं थी, लिहाजा गंभीर मरीजों को फौरन निजी अस्पताल में रेफर करना पड़ता था।

गंभीर मरीजों को बचा पाने में खुद को बेबस महसूस करने वाले इस अस्पताल को जन प्रतिनिधियों की आर्थिक सहायता से वेंटीलेटर की पावर दी गई है। हाई फ्लो नेजल कैनुला और वेंटीलेटर अस्पताल में पहुंचे तो एक लेवल और बढ़ाते हुए इस अस्पताल को कोविड अस्पताल एल-टू घोषित कर दिया गया। गंभीर मरीजों को भी इसमें भर्ती किया जाने लगा। अच्छी बात यह है कि जब जनपद में संक्रमितों की मौत का आंकड़ा तेजी के साथ बढ़ा, उस दौर में इस अस्पताल में गंभीर सांस के मरीजों को जीवनदान मिलने लगा। कैनुला मशीन से चिकित्सकों का भी आत्मविश्वास बढ़ा है। इस साल भी वे इस मशीन से कोरोना को मात देने के लिए तैयार हैं।

रफ्तार बेहद तेज, 24 घंटे में खर्च हो जाती है 5 लाख लीटर आक्सीजन
लेवल टू अस्पताल में अत्यंत गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है। इसमें अधिकतर सांस के रोगी होते हैं। डिप्टी सीएमओ डा. एस बेलवाल के अनुसार 24 घंटे में 5 लाख लीटर तक आक्सीजन की खपत हो जाती है।

आखिर क्यों अलग है कैनुला
50 से 60 लीटर आक्सीजन प्रति मिनट की रफ्तार से दी जा सकती है
सामान्य आक्सीजन सिस्टम में 6 से 7 या बहुत अधिक 12 लीटर आक्सीजन एक मिनट में दी जा सकती है
इसमें हीटेड ब्रीथिंग ट्यूब होता है, जो नमी के साथ आक्सीजन मरीज तक पहुंचाता है
हर मौसम में 34 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान में मरीज को आक्सीजन मिलती है
सामान्य आक्सीजन सिस्टम में ऐसा नहीं होता। उसमें सर्दी में ठंडी और गर्मी में गर्म आक्सीजन रहती है

जाने कोविड एल-टू के बारे में भी
पहले यह एल-वन कोविड अस्पताल था
वेंटीलेटर आने के बाद इसे एल-टू तैयार किया गया
वर्ष 2020 में 8 सितंबर से एल-टू के रूप में शुरू हुआ
इस साल 3 फरवरी को बंद कर दिया गया
10 वेंटीलेटर और तीन हाई फ्लो नेजल कैनुला वेंटीलेटर चालू किए गए
अप्रैल के पहले सप्ताह में इसे दोबारा चालू किया गया है

न घबराएं, वक्त पर तकलीफ बताएं
जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन डा. प्रवीण शाह बताते हैं कि मरीजों की सेहत सही से सांस न ले पाने के कारण बिगड़ती है। इन्फेक्शन बढ़ने से मरीज के फेफड़ों और श्वांस में सूजन आ जाती है। इससे उसे आक्सीजन लेने में परेशानी होती है। इन मरीजों को फ्लो बढ़ाकर आक्सीजन दी जाती है। जिन कोरोना मरीजों के ब्लड में आक्सीजन का स्तर 90 फीसदी से कम होता है, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसके साथ ही वायरस का लोड भी बढ़ने लगता है। इस वजह से ऐसे मरीजों को इस थेरेपी की आवश्यकता पड़ती है और उन्हें 15 से 60 लीटर आक्सीजन प्रति मिनट की रफ्तार से देना आवश्यक हो जाता है। समय पर मरीज यदि अस्पताल में भर्ती हो जाए तो उसे बचा पाना आसान होता है।

सीएमओ डा. मिलिंद चंद गर्ग का कहना है कि कोरोना मरीजों के लिए महिला अस्पताल मेटरनिटी विंग को एलटू के रूप में चालू किया चुका है। यहां वेंटीलेटर और हाई फ्लो नेजल कैनुला मशीन को भी चेक कर लिया गया है। सांस के गंभीर मरीज आते हैं तो उन्हें फौरन चिकित्सा मिल सकेगी।

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