बरेली: भक्तों ने की मां ब्रह्मचारिणी की उपासना, रखा उपवास

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बरेली, अमृत विचार। नवरात्र के नौ दिन दुर्गाजी के नौ स्वरूपों की पूजा करने से भक्तों को मां की कृपा प्राप्त होती है। भक्तों ने बुधवार को मां दुर्गा की नव शक्तियों के दूसरे स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की। यहां ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या से है। ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी-तप का आचरण …

बरेली, अमृत विचार। नवरात्र के नौ दिन दुर्गाजी के नौ स्वरूपों की पूजा करने से भक्तों को मां की कृपा प्राप्त होती है। भक्तों ने बुधवार को मां दुर्गा की नव शक्तियों के दूसरे स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की। यहां ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या से है। ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी-तप का आचरण करने वाली। ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरुप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य माना गया हैं। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमंडल रहता है।

भक्त इस दिन अपने मन को स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित कर मां की अराधना कर कृपा प्राप्त करते हैं। इनकी आराधना से अनंत फल की प्राप्ति एवं तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम जैसे गुणों की वृद्धि होती हैं। जीवन के कठिन संघर्षों में भी व्यक्ति अपने कर्तव्य से विचलित नहीं होता। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती हैं। मंदिरों के बाहर जरूर भक्तों की लंबी-लंबी कतारें रहीं, लेकिन मंदिर प्रबंध समितियों ने सामाजिक दूरी का पालन और कोरोना गाइडलाइन का पालन कराते हुए भक्तों को मां के दर्शन करने के लिए मंदिर में प्रवेश करने दिया।

गुरुवार को मां चंद्रघंटा की होगी उपासना
नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। मां का यह रूप बेहद ही सुंदर, मोहक और अलौकिक है। चंद्र के समान सुंदर मां के इस रूप से दिव्य सुगंधियों और ध्वनियों का आभास होता है। मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है। इसलिए हमें चाहिए कि मन, वचन और कर्म के साथ ही काया को विधि-विधान के अनुसार परिशुद्ध-पवित्र करके चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना करें। इससे सारे कष्टों से मुक्त होकर सहज ही परम पद के अधिकारी बन सकते हैं।

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