मुरादाबाद: नौकरी छूटी तो लगाया सब्जी का ठेला, अब पीतल के उत्पाद बेच कमा रहे 1.20 लाख महीना
मुरादाबाद, अमृत विचार। शीशे की कारीगरी में निपुण और आकर्षक उत्पाद बनाने का हुनर रखने वाले बब्बू का यह रोजगार छिन गया। कोरोना ने उनके हुनर पर इस कदर हथौड़ा चलाया कि अब वे अन्य काम करने को मजबूर हैं। पिछले साल लाकडाउन में उन्होंने सब्जी बेचना किया। जब हालात थोड़े सुधरे तो उन्होंने पीतल …
मुरादाबाद, अमृत विचार। शीशे की कारीगरी में निपुण और आकर्षक उत्पाद बनाने का हुनर रखने वाले बब्बू का यह रोजगार छिन गया। कोरोना ने उनके हुनर पर इस कदर हथौड़ा चलाया कि अब वे अन्य काम करने को मजबूर हैं। पिछले साल लाकडाउन में उन्होंने सब्जी बेचना किया। जब हालात थोड़े सुधरे तो उन्होंने पीतल के उत्पाद बेचने शुरू कर दिए। आज वे इन उत्पादों को बेचकर माहभर में 90,000 से 1.20 लाख की कमाई कर लेते हैं।
कहते हैं अगर हौसले बुलंद हैं तो सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। लाकडाउन में नौकरी छूटने के बाद भी बब्बू ने हार नहीं मानी। हालांकि नौकरी छूट पर उनके परिवार के सामने दो वक्त की रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। ऐसे में उन्हें दर-दर की ठोकरे खानी पड़ी।
कलाकारी के हुनर पर बब्बू शहर की कई नामचीन फैक्ट्रियों में काम कर चुके हैं। वे शीशे की कारीगरी के साथ ही अन्य कई काम करते थे। पिछले साल कोरोना के कारण लाकडाउन ने पूरे देश की अर्थव्यवस्था को ठप कर दिया था। इस वजह से कई लोगों पर रोजी-रोटी का संकट हो गया था। ऐसे में लोगों को जीविका चलाना काफी मुश्किल हो गया था। अचानक लगे लाकडाउन में बब्बू की नौकरी चली गई। बब्बू ने बताया कि तीन से चार माह सब्जी का ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण किया। समय के साथ हालात सुधरे तो कांठ रोड स्थित मंधुबनी कालोनी के पास सड़क किनारे ब्रास से बने आइटम की दुकान शुरू की।
रोज 4000 कमाई हो रही
लाकडाउन से पहले बब्बू अपने हुनर के दम पर रोज 250 से 300 रुपये कमाई कर लेते थे। लेकिन नौकरी जाने के बाद यह कमाना भी काफी मुश्किल हो गया था। कुछ समय बाद सब्जी के ठेले से 500 से 700 रुपये प्रतिदिन कमाने लगे। इस रोजगार के कारण गुजर बसर करना आसान हो गया था। बब्बू के साथ घर पर छोटा भाई और पिता हैं। अब ब्रास के सामान बेचने से रोज 3000 से 4000 रुपये कमा लेते हैं। बब्बू का कहना है कि सूरज की तपन में दिनभर खड़ा होने बाद एक या दो आइटम ही बिक पाते हैं। कई बार तो एक आइटम भी नहीं बिक पाता है। बीच-बीच कुछ लोग 2-4 पीस का आर्डर भी दे जाते हैं, जिससे जीविका चल रही है। फिलहाल ब्रास के लैप, लालटेन, टेबल और शीशे से बनी वस्तुओं की ही बेचते हैं।
कर्ज कर शुरू किया था ब्रास का काम
बब्बू ने बताया कि पिछले साल नौकरी जाने के बाद अपने परिवार और मित्रों से कर्ज लेकर ब्रास का कारोबार शुरू किया। फिलहाल कांठ रोड स्थित मधुबनी कालोनी के बाहर फुटपाथ पर ब्रास के बने हुए आइटमों को बेच रहे हैं। उनका सपना है कि आने वाले दिनों अपनी दुकान खोले।
-अविक सिंह
