मुरादाबाद: मां की चिता को मुखाग्नि देते बेटे ने उठाए व्यवस्था पर सवाल

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मुरादाबाद,अमृत विचार। बात हो जाती तो शायद मेरी मां बच जाती। उसे देख भी नहीं सका, शायद वह कुछ कहती। नहीं पता उसके दम तोड़ने का कारण कोरोना है या फिर अव्यवस्था। पर इतना जरूर है कि इन सब हालातों ने मुझसे मेरी मां छीन ली। आंखों में आंसू और मां को खोने के दर्द …

मुरादाबाद,अमृत विचार। बात हो जाती तो शायद मेरी मां बच जाती। उसे देख भी नहीं सका, शायद वह कुछ कहती। नहीं पता उसके दम तोड़ने का कारण कोरोना है या फिर अव्यवस्था। पर इतना जरूर है कि इन सब हालातों ने मुझसे मेरी मां छीन ली। आंखों में आंसू और मां को खोने के दर्द के साथ अपनी मां की चिता को देख बेटा फूट-फूट कर रो रहा था।

यह वाक्या है कटघर स्थित श्मशान घाट का। यहां पर्सनल प्रोटेक्शन इक्युपमेंट (पीपीई) किट से कवर एक युवक ने जैसे ही अपनी मां की चिता को अग्नि दी, वह बिलख पड़ा। दुखी इतना था कि उसने फौरन इस किट को उतार दिया और अपनी सेहत का ख्याल भी भूल गया। रोते बिलखते यह व्यक्ति व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहा था। बरवालान के रहने वाले इस युवक का कहना था कि उसकी मां 12 अप्रैल को कोरोना की चपेट में आई थी।

उन्हें दिल्ली रोड के एक कोविड अस्पताल में भर्ती किया गया। पर वहां की अव्यवस्थाएं बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। एक बार अपनी मां से फोन पर बात हुई तो पता चला कि उन्हें खाना ही नहीं मिल रहा है। चिंता बढ़ी तो उसने घर से ही खाना तैयार कराकर अस्पताल भिजवा दिया। 12 अप्रैल को भेजे गए उस भोजन को उसकी मां के पास 14 अप्रैल को पहुंचाया गया। उसके दूसरे दिन उसने दम तोड़ दिया। इन हालातों में कोरोना से ज्यादा अव्यवस्था हावी है और आदमी भूख से ही दम तोड़ देगा।

लापरवाही:परिजनों को नहीं दी पीपीई किट की सुरक्षा
कोरोना संक्रमण जिस तरह से आक्रामक रूप दिखा रहा है, जिम्मेदार विभाग उतने ही लापरवाह भी दिखने लगे हैं। जी हां, लापरवाही की एक बानगी श्मशान घाट पर भी देखने को मिली। शव के साथ जो परिजन यहां पहुंचे थे, विभाग ने उन्हें पीपीई किट तक नहीं दी थी। बरवालान मोहल्ले के इस परिवार के दो सदस्य बगैर पीपीई किट के ही वहां मौजूद थे। यह हाल तब था जब स्वास्थ्य कर्मी भी वहां मौजूद थे। पर इस बात का ख्याल नहीं रखा गया कि यह लापरवाही वायरस को मौका दे सकती है।

सीएमओ डा. मिलिंद चंद गर्ग ने कहा कि शव को पीपीई किट में ही रखा जाता है। जो परिजन जाते हैं, उन्हें भी यही सुरक्षा दी जाती है। इस तरह का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।

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