बरेली: कोरोना काल में ऑक्सीजन पर अटकी सबकी सांस

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण से कराहते बरेली में आक्सीजन संकट खड़ा हो गया है। कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडरों की तेजी से मांग बढ़ रही है। ऐसा ही कुछ हाल पिछले वर्ष भी हुआ था। ड्रग विभाग के अनुसार जिले में 25 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग है, जबकि जिले में प्रतिदिन 27 मीट्रिक …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण से कराहते बरेली में आक्सीजन संकट खड़ा हो गया है। कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडरों की तेजी से मांग बढ़ रही है। ऐसा ही कुछ हाल पिछले वर्ष भी हुआ था। ड्रग विभाग के अनुसार जिले में 25 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग है, जबकि जिले में प्रतिदिन 27 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की उपलब्धता है। विभाग के अनुसार जिले में ऑक्सीजन की मांग बढ़ी है, लेकिन अभी कोई समस्या नहीं है।

कोरोना संक्रमण की पहली लहर में उत्तराखंड और गाजियाबाद से आने वाली तरल ऑक्सीजन की सप्लाई भी बाधित हो गई थी। अब संक्रमण की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की मांग में फिर इजाफा हुआ है, लेकिन आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। अप्रैल माह से पहले सामान्य दिनों में अस्पतालों को 14 से 15 मीट्रिक टन सप्लाई की जाती थी, बड़ी मात्रा में फैक्ट्रियों को भी ऑक्सीजन उपलब्ध कराते थे। लेकिन अब फैक्ट्रियों को ऑक्सीजन सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई है। जिले में ऑक्सीजन तैयार करने के तीन प्लांट हैं। इन प्लांटों पर मोदीनगर, गाजियाबाद, काशीपुर, रुद्रपुर आदि स्थानों से टैंकर के जरिए तरल ऑक्सीजन आती है।

प्लांट में तरल आक्सीजन का वाष्पीकरण कर तैयार होने वाली आक्सीजन को बी और डी साइज के सिलिंडर में रीफिल किया जाता है। बी साइज सिलिडर में 1.5 क्यूबिक मीटर जबकि डी साइज सिलिडर में 7 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन आती है। सिलिंडर तैयार होने के बाद इन्हें जिले के डीलरों तक पहुंचाया जाता है, जो अस्पतालों और घरों में इसकी आपूर्ति करते हैं। इसमें छोटे सिलिडर की कीमत 160 रुपये और बड़े सिलिडर की कीमत 450 रुपये तक हैं।

मेडिकल कालेजों में भी अपने हैं ऑक्सीजन प्लांट
जिले में तीन मेडिकल कालेज और करीब 200 से अधिक अस्पताल हैं। इनमें से तीनों मेडिकल कालेज और कुछ बड़े अस्पतालों ने अपने ऑक्सीजन प्लांट भी लगा रखे हैं। यहां लगे प्लांट एयर बेस्ड हैं जिन्हें एयर सेपरेशन यूनिट कहते हैं। इसमें हवा से ऑक्सीजन एकत्र कर उसे मरीज को देने लायक तैयार किया जाता है। इसके बाद अस्पताल और मेडिकल कालेज में इंटरनल पाइपलाइन के जरिए पहुंचाया जाता है।

ऑक्सीजन की आपूर्ति में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है। जिले में मांग से अधिक आक्सीजन उपलब्ध है। ऑक्सीजन की सप्लाई और आपूर्ति पर शासन से नजर रखी जा रही है। प्रतिदिन के खर्च और उपलब्धता की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। -उर्मिला वर्मा, औषधि निरीक्षक

जिले में वेंटीलेटरों और ऑक्सीजन की अभी किसी तरह की किल्लत की कोई बात सामने नहीं आई है। शासन की ओर से इस ओर सीधे ध्यान दिया जा रहा है। यह सही है कि कोरोना के बढ़ते मामलों से स्थिति दिन प्रतिदिन खराब हो रही है, लेकिन अभी तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। कहीं किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है। -डा.एसके गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

ऐसे होते हैं इलाज में प्रयोग होने वाले सिलेंडर
औसतन एक संक्रमित को दो लीटर और क्रिटिकल मरीज को करीब दस लीटर प्रति मिनट की गति से ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। जिसमें यह सिलेंडर करीब पांच घंटे तक चल पाता है।

  • छोटा सिलेंडर: 1200 लीटर ऑक्सीजन
  • बड़ा सिलेंडर : 4000 लीटर ऑक्सीजन
  • यह करीब 17 घंटे तक चल जाता है।
  • वेंटीलेटर- एक दिन में चार-पांच सिलेंडर गैस की खपत
  • इंडस्ट्री में ऑक्सीजन का प्रयोग-लोहा काटने में

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