बरेली: मौत बनकर हर तरफ मंडराता कोरोना… तीन गुना बढ़ी शवों की अंत्येष्टि, चबूतरे पड़े कम

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बरेली, अमृत विचार। कोरोना से मौत के आंकड़े बढ़ने के बाद श्मशान घाटों पर आम दिनों के मुकाबले दाह संस्कार के लिए आने वाले शवों की संख्या ढाई से तीन गुना तक बढ़ गई है। संजयनगर और सिटी श्मशान स्थलों पर शवों को जलाने की जगह नहीं मिल पा रही है। कई बार चबूतरे के …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना से मौत के आंकड़े बढ़ने के बाद श्मशान घाटों पर आम दिनों के मुकाबले दाह संस्कार के लिए आने वाले शवों की संख्या ढाई से तीन गुना तक बढ़ गई है। संजयनगर और सिटी श्मशान स्थलों पर शवों को जलाने की जगह नहीं मिल पा रही है। कई बार चबूतरे के बजाय जमीन पर चिताएं जलाईं जा रही हैं। सरकार ने कोरोना के संक्रमण को देखते हुए कोविड गाइड लाइन जारी की है, लेकिन इनका पूरी तरह से अनुपालन नहीं हो पा रहा है। संक्रमित शव की अंत्येष्टि करने वालों की न तो संख्या पर सख्ती हो पा रही है और न ही उनके पीपीई किट पहनकर आने की सख्ती को लागू किया जा रहा है। ऐसे में अंत्येष्टि स्थलों पर आने वालों पर भी कोरोना संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है।

इन दिनों संजयनगर के श्मशान स्थल पर हर दिन पहले से कहीं अधिक शव आ रहे हैं। मंगलवार की शाम तक 16 शव अंत्येष्टि के लिए पहुंचे थे। इसमें सात लोगों की मृत्यु कोरोना के संक्रमण से हुई है। वैसे आम दिनों में यहां सात-आठ शव आते थे, लेकिन अब इनकी प्रतिदिन संख्या बढ़कर 22 से 25 तक पहुंच गई है। इसमें बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु कोरोना की चपेट में आने से हुई है। एक सप्ताह के दौरान करीब सवा सौ शव अंत्येष्टि के लिए आ चुके हैं।

चिंताजनक बात यह है कि सात दिन के दौरान शवों के आने की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी होने और इसमें बड़ी संख्या में कोरोना से ग्रसित लोगों की मौत होने के बावजूद यहां कोविड नियमों का अनुपालन नहीं हो पा रहा है। संक्रमित शवों के साथ आने वाले लोग ज्यादातर बगैर पीपीई किट के ही दिखाई दे रहे हैं। शासन ने अंत्येष्टि के लिए भी लोगों की संख्या निर्धारित की है, लेकिन इसका अनुपालन कराने के लिए यहां न तो प्रशासन और न ही स्वास्थ्य विभाग के लोग नजर आ रहे हैं।

संजय नगर श्मशान भूमि के प्रबंधक भगवान स्वरूप ने बताया कि श्मशान स्थलों को सैनिटाइज भी नहीं किया जा रहा है। यही हाल शहर के सिटी श्मशान भूमि का है। यहां भी आम दिनों में सात-आठ शवों के ही अंतिम संस्कार होते थे, लेकिन अब यह संख्या 22 से 25 तक पहुंच गई है। इसमें आठ लोगों की मृत्यु कोराना से हुई है।

पिछले हफ्ते के दौरान करीब 130 शवों की अंत्येष्टि हो चुकी है। यहां भी कोविड नियमों के तहत शवों का दाह संस्कार नहीं किया जा रहा है। श्मशान भूमि के देखरेख करने वालों ने बताया कि यहां सिर्फ मंगलवार को ही सैनिटाइजेशन हुआ है। गुलाबबाड़ी श्मशान भूमि ट्रस्ट समिति के महामंत्री दिनेश दद्दा ने बताया कि एक सप्ताह के दौरान यहां चार संक्रमितों के शवों का दाह संस्कार हुआ है।

चबूतरे के बजाय जमीन पर बनाई जा रहीं चिताएं
सिटी श्मशान भूमि पर बड़ी संख्या में शवों के आने से यहां अंत्येष्टि के लिए जगह कम पड़ गई है। इसलिए अंतिम संस्कार के लिए चिताएं चबूतरे के बजाय नीचे जमीन पर बनाई जा रही हैं। यहां के प्रबंधक विजय बाबू का कहना है कि यहां चबूतरों पर 33 शवों की अंत्येष्टि करने की जगह है लेकिन शवों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी होने से उनकी अंत्येष्टि के लिए चबूतरे पर जगह नहीं बच रही है।

अंत्येष्टि के लिए लकड़ी के दामों में हो रही बढ़ोत्तरी
संजय नगर श्मशान भूमि के प्रबंधक भगवान स्वरूप ने बताया कि शवों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी होने से लकड़ी की खपत काफी बढ़ गई है। इसलिए लखनऊ व पीलीभीत वन निगम से जो लकड़ी मंगवाई जा रही है, उसके दामों में करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल तक इजाफा हो गया है। हालांकि अंत्येष्टि के लिए अभी लकड़ी के दामों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।

अस्थियां एकत्र करने आने वालों से जल्द आने का आग्रह
श्मशान स्थलों पर वैसे दाह संस्कार के बाद तीसरे दिन अस्थियां एकत्र की जाती हैं लेकिन इस समय दाह संस्कार के लिए शवों की संख्या काफी बढ़ गई है। इसलिए लोगों से मृतकों की अस्थियां जल्द एकत्र करने के लिए आग्रह किया जा रहा है। हालांकि लोग इसे लेकर बहुत ज्यादा गंभीर नहीं दिखाई दे रहे हैं।

नहीं मिले चबूतरे तो जहां मिली जगह वहां बना दी चिता
मौत एक अटल सत्य है। यह समय पर आए तो लोग अपनों के शवों को बैंड बाजे के साथ अंतिम संस्कार के लिए श्मशान तक ले जाते हैं और यही मौत अगर अकाल आकर सामने खड़ी हो जाए तो चीख-पुकार के बाद ईश्वर की मर्जी मानकर लोग संतोष कर लेते हैं लेकिन बीमारी, दहशत, हादसों और आत्मघात के कारण मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। कभी श्मशान में चार-छह चिताएं ही सुबह से शाम तक जला करती थीं लेकिन इस समय यह श्मशान डरावने लगने लगे हैं। लोगों के लिए चिता स्थल तक कम पड़ जा रहे हैं। जिसे जहां जगह मिल रही है वह श्मशान में लकड़ी, कंडे लगाकर अपने का अंतिम संस्कार कर दे रहा है।

मंगलवार को यहीं नजारा संजय नगर श्मशान भूमि पर देखने को मिला। लोग सुबह से लेकर शाम तक अपनों की मौत के बाद उनके शवों को अंतिम संस्कार के लिए वहां लेकर पहुंचे। उन्होंने चिता स्थल पर नजर दौड़ाई तो पाया कि किसी की चिता ठंडी नहीं हुई थी तो किसी के फूल उठना बाकी थे। ऐसे में उन्हें अपनों का अंतिम संस्कार तो करना ही था। इसके बाद लोगों ने चिता स्थल के पास में ही जमीन पर लड़की, कंडे और प्याल बिछाकर अपनों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए लेटा दिया और मुखाग्नि देकर घरों को लौट गए।

संजय नगर श्मशान भूमि का यह रंग देखकर वहां आए लोगों के दिल कांप उठे। हर तरफ उठती चिताओं की लपटों को देखकर वहां मौजूद कई लोग खामोश के खमोश रह गए। किसी आग में किसी पिता के अरमान जल रहे थे तो किसी चिता की लपटों में किसी का भाई जल रहा था। कहीं किसी के पिता की चिता जल रही थी तो कोई पत्नी के शव को मुखाग्नि दे रहा था।

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