बरेली: लॉकडाउन का खौफ दिखा कालाबाजारी, कई गुना बढ़ाए दाम
बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण के बिगड़ते हालातों का फायदा कुछ कारोबारी उठाने में पीछे नहीं है। संपूर्ण लाकडाउन की आशंका के चलते बाजारों में जमकर कालाबाजारी हो रही है। आलम यह है रोजमर्रा की जरूरत वाले सामान के दाम आसमान चूमने लगे हैं। माना जा रहा है कारोबारी स्टाक डंप कर कालाबाजारी को बढ़ावा …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण के बिगड़ते हालातों का फायदा कुछ कारोबारी उठाने में पीछे नहीं है। संपूर्ण लाकडाउन की आशंका के चलते बाजारों में जमकर कालाबाजारी हो रही है। आलम यह है रोजमर्रा की जरूरत वाले सामान के दाम आसमान चूमने लगे हैं। माना जा रहा है कारोबारी स्टाक डंप कर कालाबाजारी को बढ़ावा दे रहे हैं। वहीं, बाजार में माल की कमी दिखाकर जनता को लूटने की साजिश से प्रशासन बेफिक्र है। इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
पिछले कुछ दिनों से जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। इधर, रात्रि कर्फ्यू के बाद वीकेंड लाकडाउन लगाया जाने का मुख्यमंत्री पिछले दिनों ऐलान कर चुके हैं। इसके तहत शुक्रवार रात 8 बजे से लेकर सोमवार सुबह 8 बजे कर्फ्यू रहेगा। इसलिए कालाबाजारी करने को कुछ बड़े व्यापारियों ने योजना बना ली है। रोजमर्रा के जरूरी सामान के दाम बढ़ा दिए हैं। रिफाइंड पर बीस रुपये, सरसों के तेल पर 25, बेसन पर दस, चना और अरहर की दाल पर दस-दस रुपये, सोयाबीन के दाम में बीस रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
थोक विक्रेताओं ने खाद्य सामग्रियों का स्टाक शुरू कर दिया है। जो फुटकर दुकानदारों को दे रहे हैं, वह भी महंगा। एक थोक विक्रेता ने बताया कि राशन सामग्री की मांग बढ़ने से महंगाई बढ़ी है। जबकि एक फुटकर दुकानदार ने बताया कि थोक विक्रेताओं ने लॉकडाउन के डर से स्टाक करना शुरू कर दिया है। जो सामान दे रहे हैं। वह भी महंगा मिल रहा है।
थोक विक्रेता स्टाक ऊपर से नहीं आने की बात कह रहे है। जबकि ट्रांसपोर्टर्स की मानें तो सामान अन्य दिनों की तरह की आ रहा है। अभी तक न ही स्टाक कम हुआ है और न डिमांड बढ़ी है। खास बात तो यह है कि थोक विक्रेताओं ने लॉकडाउन के नाम पर कालाबाजारी शुरू कर दी है। ग्राहक भी लॉकडाउन के भय से बिना कुछ बोले महंगा सामान खरीद रहे है।
तंबाकू के भी दाम बढ़े
पिछले साल की तरह इस बार भी तंबाकू पदार्थों के थोक विक्रेताओं ने अभी से माल स्टाक करना शुरू कर दिया है। 120 रुपये में मिलने वाला पैकेट 190 रुपये में तो वहीं,180 रुपये में मिलने वाला पैकेट अभी से 250 में थोक विक्रेता बेचने लगे है। इस कालाबाजारी से गरीब तबके के छोटे दुकानों ने इस काम को भी बंद कर दिया है। बाजार में आलम यह है मजबूरन लोग मुंह मांगे दाम पर सामान खरीदने को मजबूर है। पान की दुकानों के अलावा आम आदमी भी गुटखों की कालाबाजारी कर रहा है।
एक नजर खाद्य सामग्रियों के दाम पर
सामग्री पहले अब
- रिफाइंड 135 155
- सरसों का तेल 140 165
- चने की दाल 65 75
- अरहर की दाल 110 120
- बेसन 75 85
- चीनी 36 38
- सफेद चना 90 115
- सोयाबीन 80 100
- आटा 22 23
- चावल मंसूरी 35 37
- हल्दी पिसी 160 162
- मिर्च पिसी 220 225
- धनिया पिसा 140 142
- जीरा 200 202
नोट: दाम प्रति किलो में
संपूर्ण लाकडाउन की अफवाह से कोई भी व्यापारी भाई कमाई के लालच में सामान का स्टाक न करें। इससे छोटे दुकानदारों को दिक्कत हो सकती है। कालाबाजारी में किसी भी व्यापारी पर कार्रवाई होती है तो उस व्यापारी का साथ नहीं दिया जाएगा। -राजेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल
राशन सामग्री की कीमतों में करीब दो महीने पहले से ही लगातार बढ़ोतरी हो रही है। व्यापारी अपने स्तर से महंगाई नहीं कर रहे हैं। ऊपर से महंगाई क्यों बढ़ रही है। इससे व्यापारी भी परेशान है। लाकडाउन को लेकर कोई महंगाई नहीं की गई है। -अनूप अग्रवाल, किराना व्यापारी
अफवाह की वजह से महंगाई बढ़ गई है। कुछ व्यापारियों में बाद में अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में सामाना स्टाक करना शुरू कर दिया है। इससे बाजार में महंगाई बढ़ गई है। खाद्य सामग्रियों पर 25 रुपये तक की बढ़ोतरी अभी से हो गई है। -जतिन अरोड़ा, आटा व्यापारी
पिछले साल कोरोना काल के चलते लगे लाकडाउन की वजह से तमाम बंदिश थीं। जिसकी वजह से उत्पादन पर असर पर पड़ा है। इसी कारण अब महंगाई भी बढ़ रही है। थोक के बाजार में कालाबाजारी की चर्चाएं तो सिर्फ अफवाह हैं। -विजय खट्टर, मसाला व्यापारी
