बरेली: नहीं मिल रहा दूसरा टीका, अपनी व अपनों की फ्रिक में लोग
बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण से बचाव करने के लिए राज्य सरकार कोरोना टीका लगवाने पर जोर दे रही है। इसकी मॉनीटरिंग भी करा रही है लेकिन जो लोग पहली डोज लगवा चुके हैं। उनके लिए दूसरी डोज लगवाने के लिए निजी अस्पतालों में कोई प्रबंध नहीं है। कोविशील्ड वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने के …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण से बचाव करने के लिए राज्य सरकार कोरोना टीका लगवाने पर जोर दे रही है। इसकी मॉनीटरिंग भी करा रही है लेकिन जो लोग पहली डोज लगवा चुके हैं। उनके लिए दूसरी डोज लगवाने के लिए निजी अस्पतालों में कोई प्रबंध नहीं है। कोविशील्ड वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने के लिए 45 उम्र से ऊपर वाले लोग परेशान हैं। कई लोग ऐसे हैं जो निजी अस्पतालों के चक्कर काटकर थक चुके हैं।
72 वर्षीय सुरेश यादव ने दूसरी डोज लगवाने के लिए कलेक्ट्रेट के कोविड कंट्रोल रूम में कई बार संपर्क किया, लेकिन उनकी बात डाक्टर से नहीं कराई और न ही उन्हें दूसरी डोज लगवाने का विकल्प बताया गया। मिशन अस्पताल और दीपमाला अस्पताल प्रबंधन भी उन्हें कोविशील्ड वैक्सीन के संबंध में सटीक जानकारी नहीं दे रहा है।
बताते हैं कि ज्यादातर निजी अस्पतालों का यही हाल हो गया है। जबकि कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ने और जानलेवा नतीजे सामने आने के चलते कोविशील्ड की दूसरी खुराक न पाने वाले बड़ी तादाद में लोग अपनी व अपने परिवार के सदस्यों को लेकर काफी चिंतित नजर आ रहे हैं।
वैक्सीन न लगने से परेशान लोगों का कहना है कि जब सरकार के कड़े निर्देश हैं कि पहली वक्सीन लगवाने के बाद चार से छह हफ्ते में दूसरा टीका लग जाना चाहिए तो इस गाइड लाइन का अनुपालन क्यों नहीं कराया जा पा रहा है। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद पर कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है।
कोविड नियमों के तहत कोरोना से बचाव के लिए कोविशील्ड का पहला इंजेक्शन लगने के चार से छह हफ्ते के बाद दूसरा टीका लगाया जाना चाहिए, तभी इसकी खुराक कारगर होगी। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों ने ये टीके लगवाए हैं लेकिन अब उन्हें दूसरी डोज के लिए भटकना पड़ रहा है।
पांच माह बाद भी दूसरी डोज नहीं लग पा रही
दूसरी डोज न लग पाने से दिक्कत झेल रहे स्टेडियम रोड के एक मार्बल विक्रेता अर्पित गोयल का कहना है कि कोरोना की चपेट में आकर करीब छह महीने पहले उनके पिता का निधन हो गया है। इसके बाद उन्होंने कोरोना से बचाव के लिए करीब 54 वर्षीय माता अल्का अग्रवाल को कोविशील्ड की वैक्सीन लगवाई थी। पांच महीने से ज्यादा वक्त गुजर गया है। अब वह जब अपनी माताजी को इसी दवा का दूसरा इंजेक्शन लगवाने के लिए निजी अस्पताल जा रहे हैं तो वैक्सीन की दूसरी खुराक न आने की बार-बार जानकारी दी जा रही है। जबकि संक्रमण काफी बढ़ चुका है। इसकी उनकी बुजुर्ग मां को इस दवा के दोनों इंजेक्शन दिए जाने बेहद जरूरी है।
7 मार्च को पहली डोज, दूसरी डाक्टर उपलब्ध नहीं बता रहे
आवास विकास सिविल लाइंस में रहने वाले 72 वर्षीय सुरेश यादव भी दूसरी डोज न लग पाने की समस्या झेल रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पहली वैक्सीन सात मार्च को लगवाई थी। काफी समय गुजर गया है, लेकिन कोविशील्ड की दूसरी वैक्सीन नहीं लग पा रही है। डॉक्टर यह दवा न आने की बात कहते हुए हाथ खड़े कर रहे हैं। इसकी शिकायत उन्होंने डीएम कार्यालय व सीएमओ से भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि कोरोना का खतरा लगातार बढ़ने से अधिक उम्र वाले लोगों पर भी खतरा बढ़ रहा है।
