बरेली: कोरोना संक्रमित के शव का अंतिम संस्कार भी करने नहीं आए परिजन
बरेली, अमृत विचार। कोरोना को लेकर लोगों में इस कदर दहशत बैठ गई है कि कई लोग अपने परिवार के किसी सदस्य के संक्रमित होने पर उसका इलाज कराने से लेकर दाह संस्कार करने तक की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। बुधवार को 300 बेड हॉस्पिटल में कोरोना मरीज की मृत्यु के बाद उसके …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना को लेकर लोगों में इस कदर दहशत बैठ गई है कि कई लोग अपने परिवार के किसी सदस्य के संक्रमित होने पर उसका इलाज कराने से लेकर दाह संस्कार करने तक की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। बुधवार को 300 बेड हॉस्पिटल में कोरोना मरीज की मृत्यु के बाद उसके परिजन दाह संस्कार के लिए भी नहीं आए। एंबुलेंस वाले शव को सिटी श्मशान भूमि में रखकर चले गए। बाद में पुलिस भी मौके पर पहुंची। श्मशान स्थल के लोगों ने समाजसेवी अजय बाबू से वार्ता करने के बाद इस लावारिस शव का दाह संस्कार करा दिया। अजय बाबू लावारिस शवों की अंत्येष्टि कराते आ रहे हैं।
बताते हैं कि 300 बेड वाले अस्पताल में मंगलवार को गंभीर हालत में एक कोरोना का मरीज भर्ती हुआ था। वहां उसके परिजन उसे उसके हाल पर छोड़ कर चले गए थे। बाद में इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इसके बावजूद भी मृतक के परिजन दाह संस्कार कराने के लिए भी नहीं आए। इसके बाद अस्पताल वालों ने मामले की सूचना पुलिस को देते हुए एंबुलेंस से शव को सिटी श्मशान भूमि में भिजवा दिया। वहां भी काफी देर तक एंबुलेंस का चालक खड़ा रहा। बाद में वह भी शव को वहीं नीचे उतार कर वापस चला गया।
इसकी जानकारी श्मशान के सुपरवाइजर त्रिलोकीनाथ को दी गई कि यहां देर शाम को एक लावारिस शव पहुंचा है। इसका दाह संस्कार कैसे कराया होगा? इसके बाद उन्होंने लावारिस शवों की अंत्येष्टि के लिए मदद करने वाले समाजसेवी अजय बाबू से वार्ता की। उन्होंने श्मशान वालों से शव का दाह संस्कार करने और इसमें आने वाले खर्च को वहन करने की बात कही।
इसके बाद श्मशान के कर्मचारियों ने शव का दाह संस्कार कर दिया। यह घटनाक्रम देखकर श्मशान स्थल पर दूसरे शवों के साथ आए लोग भावुक हो गए। बता दें कि कोरोना संक्रमित होने वाले अगर किसी मरीज की मृत्यु हो जाती है तो बड़ी संख्या में उनके परिवार वाले अंतिम संस्कार कराने से कतराते हैं।
कोरोना के एक लावारिस मरीज की 300 बेड अस्पताल में मौत हो गई थी। इसकी सूचना पर सिटी श्मशान स्थल पर पुलिस भी पहुंची थी। -शितांशु शर्मा, इंस्पेक्टर, बारादरी
