बरेली: रमजान के दो असरे पूरे, तीसरा शुरू

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बरेली,अमृत विचार। मुकद्दस रमजान का हर लम्हा इबादत से भरा हुआ है। घरों में इबादत व तिलावत के जरिए अल्लाह को राजी किया जा रहा है। गुनाहों की माफी मांगी जा रही है। पुरुष व बच्चे महिलाओं का घर के काम में हाथ बंटा रहे हैं। सोमवार शाम रमजान माह का दूसरा अशरा जिसे मगफिरत …

बरेली,अमृत विचार। मुकद्दस रमजान का हर लम्हा इबादत से भरा हुआ है। घरों में इबादत व तिलावत के जरिए अल्लाह को राजी किया जा रहा है। गुनाहों की माफी मांगी जा रही है। पुरुष व बच्चे महिलाओं का घर के काम में हाथ बंटा रहे हैं। सोमवार शाम रमजान माह का दूसरा अशरा जिसे मगफिरत कहा जाता है, समाप्त हो गया। तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का शुरू हो गया। घरों में महिलाएं और मस्जिदों में रह रहे पुरुषों में एक, दो लोग एतिकाफ (मस्जिद में एकांतवास) पर बैठ गए। ईद के चांद का एलान होते ही बाहर निकलते हैं।

रमजानुल मुबारक के आखिरी अशरे में एतिकाफ की काफी मान्यता है। दस दिन के एतिकाफ का सवाब दो हज व दो उमरे के बराबर है। दरगाह आला हजरत से मरकज़ी दारूल इफ्ता के मुफ्ती अब्दुर्रहीम नश्तर फारुकी ने कहा है कि मंगलवार से रमजान का आखिरी अशरा शुरू हो रहा है। आखिरी अशरे में शब ए कद्र भी है। रमजान माह के आखिरी अशरे की पांच रातों में शवे कद्र आती है। शबे कद्र अल्लाह से सीधा नाता जोड़ने का जरिया है। अल्लाह के रसूल ने शबे कदर को 21, 23, 25, 27 और 29 की रातों में तलाश करने का हुक्म फरमाया है। ये रात हजार रातों से बेहतर और सुबह तक सलामती वाली है।

उन्होंने कहा कि अल्लाह ने अपने नबी पर शबे कदर में ही कुरआने मजीद को उतारा। मुसलामानों को चाहिए कि इन रातों में खूब इबादत करें क्योंकि इनमें से किसी एक रात की इबादत हजार रातों की इबादत व रियाजत से बेहतर है। जमात रजा के प्रवक्ता समरान खान ने बताया कि एतिकाफ सुन्नत-ए-किफाया है, अगर सबने छोड़ दिया तो सब गुनहगार होंगे। अगर एक ने भी कर लिया तो सब की जिम्मेदारी अदा हो गई।

नोमहला मस्जिद में कुरान तरावीह हुई पूरी
नोमहला मस्जिद में कुरआन तरावीह पूरी होने पर कोरोना के खात्मे की दुआ मांगी गई। ऑक्सीजन का संकट खत्म होने की भी दुआ की गई। रमजान का चांद दिखते ही नमाजे इशा रात को तरावीह की विशेष नमाज अदा की जाती है। तरावीह की नमाज पूरे रमजान पढ़ी जाती है। यानि ईद का चांद देखने तक तरावीह की 20 रकत नमाज अदा की जाती है। तरावीह में हाफिज पूरा कुरआन पढ़कर सुनाते हैं। कोरोना की वजह से जहां पिछले वर्ष घरों में तरावीह हुई तो वहीं इस वर्ष मस्जिदों में पांच लोगों ने नमाज अदा की। पंद्रह रमजान बीतने के बाद तरावीह में एक कुरआन शरीफ पूरा होने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। कई मस्जिदों में तरावीह मुकम्मल हो रही है। इसी कड़ी में सोमवार को मस्जिद नोमहला में भी 20 रमजान को कुरआन मुकम्मल होने पर खास तौर से कोरोना से निजात की दुआ की गई।

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