बरेली: सपा की बड़ी जीत, अध्यक्ष की कुर्सी से पांच अंक दूर

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

महिपाल गंगवार, बरेली। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में सपा समर्थित प्रत्याशियों को जनता जनार्दन ने खुलकर सपोर्ट किया है। जिले के वोटरों ने सत्तारूढ़ भाजपा को करारा झटका दिया। जिला पंचायत सदस्य की 60 सीटें जीतने का दावा करने वाली भाजपा को वोटरों ने धराशायी कर दिया। सपा ने अप्रत्याशित नतीजे हासिल कर …

महिपाल गंगवार, बरेली। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में सपा समर्थित प्रत्याशियों को जनता जनार्दन ने खुलकर सपोर्ट किया है। जिले के वोटरों ने सत्तारूढ़ भाजपा को करारा झटका दिया। जिला पंचायत सदस्य की 60 सीटें जीतने का दावा करने वाली भाजपा को वोटरों ने धराशायी कर दिया। सपा ने अप्रत्याशित नतीजे हासिल कर जिला पंचायत की 26 सीटें जीती हैं। हालांकि अध्यक्ष की कुर्सी के लिए सपा अभी पांच अंक दूर है। उसे अध्यक्ष की कुर्सी पाने के लिए बहुमत को 31 सदस्यों के साथ की जरूरत है।

यदि सपा के रणनीतिकार भाजपा की सत्ता की धमक को रोक पाने में कामयाब हुए तो उन्हें पांच सदस्य अपने पक्ष में करने में बहुत मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। वजह यह है कि 12 सदस्य निर्दलीय जीते हैं और छह बसपा के हैं। भाजपा को बहुमत के लिये जरूरी आधी सीटें भी नहीं मिल सकी हैं। 12 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है। ऐसे में भाजपा को अपना अध्यक्ष बनाने के लिए बसपा और निर्दलीयों को अपने पक्ष में करना पड़ेगा, जो असम्भव तो नहीं लेकिन आसान भी नहीं है। इधर, जीत से उत्साहित जिलाध्यक्ष अगम मौर्य का कहना है कि इस चुनाव में जनता ने भाजपा को पूर्ण रूप से नकार दिया है।

सपा में कौन होगा अध्यक्ष का दावेदार, वरिष्ठ नेताओं में खींचतान
सपा जिलाध्यक्ष की तरफ से जारी की गई सूची में हिसाब से सपा के 26 सदस्य जीतने के साथ ही पार्टी की ओर से पार्टी में अध्यक्ष के दावेदार के नाम को लेकर कयासबाजी तेज हो गई है। नाम का ऐलान सपा मुख्यालय से किया जाना है। इस पर अंतिम निर्णय सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को ही लेना है लेकिन किसको लड़ाया जाएगा, इसका फैसला आम सहमति से जिले के दिग्गज सपाई ही करेंगे। चूंकि विधानसभा चुनाव को बहुत वक्त नहीं बचा है, इसलिए सपा में अध्यक्ष की दावेदारी करने वाले 3-4 मजबूत लोग हैं। चर्चा है कि पूर्व विधायक महिपाल सिंह यादव अपनी पत्नी और जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष सरोज यादव का दावा कर सकते हैं।

दूसरी यह चर्चा है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव वीरपाल सिंह यादव अपनी पुत्रवधू कंचन यादव की भी दावेदारी करा सकते हैं। हालांकि वीरपाल सिंह सपा में नहीं हैं, लेकिन वह अपने समधी महिपाल सिंह यादव को आगे करके यह दांव खेल लें तो बड़ी बात नहीं। असल में कंचन यादव महिपाल सिंह यादव की बेटी हैं। ऐसे में महिपाल सिंह यादव के खास सदस्यों का समर्थन भी कंचन यादव को हासिल हो सकता है। पूर्व में बसपा से जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं नीरू पटेल भी सपा से सदस्य बनी हैं लेकिन इस बार उनकी ओर से अध्यक्ष की दावेदारी की संभावना इसलिए कम है, क्योंकि अब उनके लिए सपा सदस्यों को साधना आसान नहीं होगा।

एक मजबूत पहलू नवाबगंज के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार की ओर से है। हालांकि भगवत सरन ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन माना जाता है कि वह अपने छोटे भाई की पत्नी ऊषा गंगवार को अध्यक्ष के लिए ला सकते हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह तभी संभव होगा, जब पार्टी हाईकमान चाहे और भगवत सरन जिले में पार्टी के सभी दिग्गजों को मैनेज करने में कामयाब हो जाएं, इसीलिए सपा के भरोसेमंद सूत्र फिलहाल तो ऐसी संभावना से इंकार कर रहे हैं, लेकिन इतना जरूर है कि सपा का अध्यक्ष बनवाने में भगवत सरन चाणक्य की भूमिका में हो सकते हैं, क्योंकि जिले में सपा के सबसे ज्यादा सदस्य जितवाने में उनकी भूमिका अहम रही है।

भाजपा में रश्मि पटेल, तेजेश्वरी और रेखा का नाम
भाजपा के लिए संख्याबल के लिहाज से अपना अध्यक्ष बनाना आसान नहीं है, फिर भी वह इसके लिए कोर-कसर न छोड़ेगी। निर्दलीयों को साथ लेने के अलावा भाजपा बसपा ही नहीं, सपा में भी सेंधमारी करने की कोशिश कर सकती है। जाहिर है कि जोड़तोड़ और तोड़फोड़ दोनों ही काम किए जाएंगे। ऐसे में पार्टी को अब यह तय करना है कि अध्यक्ष के लिए वह जोड़तोड़ की जिम्मेदारी किसे देगी। यानि अध्यक्ष का प्रत्याशी किसे बनाएगी। अब तक तीन नाम चर्चा में हैं, पूर्व मेयर कुंवर सुभाष पटेल की पुत्रवधू रश्मि पटेल, पार्टी की वरिष्ठ नेत्री तेजेश्वरी सिंह और तीसरी रेखा पटेल। रेखा पटेल भोजीपुरा के निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख योगेश पटेल की पत्नी हैं। बहरहाल, यह देखना रोचक होगा कि बरेली में जिला पंचायत अध्यक्ष पर सपा काबिज हो पाती है या फिर वह बात सही साबित होगी कि जिसकी सत्ता, उसकी जिला पंचायत।

सपा में वार्ड एक को लेकर मचा घमासान
जहां जिला पंचायत सदस्य की एक-एक सीट को लेकर पिछले कई दिनों से घमासान मचा था, वहीं अब नतीजे सामने आने पर वार्ड एक में खींचतान मची है। दरअसल, सपा ने इस वार्ड से मनोहर गंगवार को टिकट दिया था। जबकि पूर्व मंत्री भगवत सरन ने भाजपा छोड़कर आए प्रमेंद्र सिंह को इस सीट से अपना प्रत्याशी बताकर उतारा। बकायदा प्रमेंद्र के समर्थन में गांव-गांव वोट की अपील की। चुनाव नतीजों में प्रमेंद्र ने भाजपा सांसद प्रतिनिधि रविशंकर की पत्नी रश्मी गंगवार को करीब दस हजार वोट के अंतर से हरा दिया।

इधर, मंगलवार को सपा ने अपने जीते प्रत्याशियों की सूची जारी की तो इससे हलचल मच गई। प्रमेंद्र का नाम सूची में शामिल नहीं था। इस पर पूर्व मंत्री भगवत सरन ने नाराजगी जताई। कहा कि प्रमेंद्र को पार्टी ज्वाइन कराने के साथ ही उन्होंने चुनाव में उतारा। मनोहर गंगवार की हार और प्रमेंद्र की जीत से जिलाध्यक्ष हताश हैं। उन्होंने हाईकमान को फीडबैक देने की बात कही। यह भी स्पष्ट कहा कि वरिष्ठ नेता होने के साथ ही पार्टी में उनका क्या वजूद है। चुनावी परिणाम से खुद को धुरंधर समझने वालों को पता चल गया है। इसलिए ज्यादा कुछ कहने की वह जरूरत नहीं समझते।

संबंधित समाचार