रिटायर्ड आईएएस डॉ. सूर्य प्रताप सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज, सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने का आरोप

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखनऊ। रिटायर्ड आईएएस डॉ. सूर्यप्रताप सिंह के खिलाफ कोरोना से संबंधित वीडियो पोस्ट करने के मामले में एक और एफआईआर वाराणसी के लंका थाने में दर्ज करवाई गई है। उन पर आरोप है कि कोरोना महामारी अधिनियम का उल्लंघन किया है। एफआईआर का एक्टिविस्ट डॉ. नूतन ठाकुर और उनके पति अमिताभ ठाकुर ने विरोध किया हैं। …

लखनऊ। रिटायर्ड आईएएस डॉ. सूर्यप्रताप सिंह के खिलाफ कोरोना से संबंधित वीडियो पोस्ट करने के मामले में एक और एफआईआर वाराणसी के लंका थाने में दर्ज करवाई गई है। उन पर आरोप है कि कोरोना महामारी अधिनियम का उल्लंघन किया है।

एफआईआर का एक्टिविस्ट डॉ. नूतन ठाकुर और उनके पति अमिताभ ठाकुर ने विरोध किया हैं। उन्होंने एफआईआर को निरस्त करने की मांग की है।

वहीं एक अन्य ट्विट कर सूर्यप्रताप सिंह ने कहा कि 25 साल में 54 ट्रांसफर जब मेरी सदनीयत व नीतियां नहीं बदल सके तो एक एफआईआर क्या बदलेगी ? सत्य पक्ष हमेशा सत्ता पक्ष पर भारी पड़ता है। जय हिंद।

क्या है ये पूरा मामला

सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर पर डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने एक वीडियो शेयर किया था और योगी सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने लिखा कि योगी जी उछलकूद से काम नहीं चलेगा, परिणाम भी चाहिए।

आज आप वाराणसी में समीक्षा कर रहे हैं, जरा गरीब के इस रूदन को भी सुन लीजियेगा। उन्होंने बताया कि वाराणसी के इन अस्पताल में एडमिट कोरोना पॉजिटिव मरीज का शव नाले में मिला। दो दिन से मरीज लापता था, परिजन खोज रहे थे।

वाराणसी के लंका थानाध्यक्ष महेश पांडेय ने इस मामले में महामारी अधिनियम के अलावा आईटी ऐक्ट में मुकदमा दर्ज कराया है, जिसका विरोध करते हुए पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर तथा एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने रिटायर्ड आईएएस डॉ. सूर्य प्रताप सिंह के खिलाफ थाना लंका में दर्ज कराये गए मुकदमे को पूरी तरह गलत, त्रुटिपूर्ण, भ्रामक एवं अवैध बताते हुए उसे समाप्त किये जाने की मांग की है।

पुलिस कमिश्नर वाराणसी सहित अन्य अफसरों को भेजे अपने पत्रक में उन्होंने कहा कि स्वयं एफआईआर में माना गया है कि सूर्यप्रताप सिंह द्वारा पोस्ट विडियो फर्जी नहीं है, बल्कि ऐसी घटना 24 अगस्त 2020 को वास्तव में घटी थी।

 अमिताभ ठाकुर और  एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने कही ये बात

उन्होंने कहा कि एक पुरानी वास्तविक घटना को ट्वीट किया जाना कहीं से भी महामारी अधिनियम का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि महामारी अधिनियम में ऐसा कोई आदेश नहीं कि पुरानी घटना को सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं किया जा सकता है।  धारा 66 आईटी एक्ट व धारा 270 व 505 आईपीसी के प्रयोग को भी गलत बताया।

अमिताभ व नूतन ने कहा कि इस एफआईआर को देखने से ही स्पष्ट है कि यह मुक़दमा सिंह द्वारा मुख्यमंत्री की आलोचना करते हुए पोस्ट लिखने के कारण लिखा गया है जो शासकीय अधिकारों का अनुचित प्रयोग है। बता दें कि सूर्यप्रताप सिंह 1982 बैच के आईएएस अधिकारी हैं जो 2015 में सेवानिवृत्त हो गए थे. उनकी आखिरी पोस्टिंग उत्तर प्रदेश में मुख्य सचिव के तौर पर थी.

पिछले साल भी दर्ज हुई थी एफआईआर

गत वर्ष लखनऊ के हजरतगंज थाने में हुई इस एफआईआर में डॉ. सूर्यप्रताप सिंह के ट्वीट को भ्रामक बताकर उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 505, आपदा प्रबंधन अधिनियम और महामारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

मोदी-योगी सरकार के हैं मुखर आलोचक

डॉ. सूर्यप्रताप सिंह मोदी-योगी सरकार के मुखर आलोचक हैं, ट्विटर के जरिये आलोचना करते रहते हैं। यहां बता दें कि उन्होंने 2015 में आधिकारिक सेवानिवृत्ति से पहले यह कहते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्त ले ली थी कि एक ईमानदार अधिकारी के लिए उत्तर प्रदेश में काम करना असंभव है। उस समय सूबे में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे।

संबंधित समाचार