बरेली: काली फफूंदी से बचाव में आयुष क्वाथ कारगर

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बरेली, अमृत विचार। संक्रमण के इस दौर में कई प्रकार की दवाओं सहित आईसीयू में गंभीर मरीजों के अधिक समय तक रहने पर उनके दुष्प्रभाव शरीर पर भी आने लगे हैं। कुछ लोग बिना डॉक्टर की सलाह लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। अब काली …

बरेली, अमृत विचार। संक्रमण के इस दौर में कई प्रकार की दवाओं सहित आईसीयू में गंभीर मरीजों के अधिक समय तक रहने पर उनके दुष्प्रभाव शरीर पर भी आने लगे हैं। कुछ लोग बिना डॉक्टर की सलाह लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। अब काली फफूंदी का प्रकोप तेजी से हावी होने लगा है। इसके विषाणु हवा में रहते हैं और कम प्रतिरोधक क्षमता वाले शरीर को प्रभावित करते हैं। इससे रोगी पर गंभीर संकट आ जाता है।

इस स्थिति से निकलने एवं बचने में आयुष क्वाथ और आयुर्वेदिक दवाई रामबाण की तरह कार्य कर रही है। यह जानकारी एसआरएम राजकीय आयुर्वेद कॉलेज एवं चिकित्सालय के उप अधीक्षक डॉ. प्रेम प्रकाश गंगवार ने दी है। बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सालय अलग-अलग बीमारियों से बचाव के लिए शिविर लगाकर आयुष क्वाथ व आयुर्वेदिक दवाओं का वितरण कर रहा है।

प्रोफेसर डीके मौर्य, प्राचार्य एवं अधीक्षक के निर्देशन में बुधवार को डॉ. देवकी नंदन शर्मा के नेतृत्व में ग्राम गौटिया अटलपुर, करगैना में 12वां शिविर आयोजित किया गया। शिविर में लोगों को कोरोना संक्रमण से बचने के उपाय बताते हुए कहा कि खांसी-जुकाम, बुखार एवं मांसपेशी में दर्द आदि लक्षण हों तो फौरन चिकित्सक से परामर्श लें।

ग्रामीणों को नीम के पत्ते का नियमित सेवन करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा लोगों के बीच औषधियों का वितरण किया गया। सभी को योग नियमित रूप से करने और आयुष विभाग के माध्यम से स्थापित योग एवं वैलनेस केंद्रों के बारे में भी जानकारी दी गई। शिविर में श्याम नारायण चौधरी फार्मासिस्ट, राजकुमार और गुड्डू बाबू सहित कलेक्टर सिंह का विशेष सहयोग रहा।

टेलीमेडिसन की भी मिल रही सुविधा
राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में टेलीमेडिसन की सुविधा भी दी जा रही है। प्राचार्य एवं अधीक्षक प्रो. डीके मौर्य ने बताया कि कोरोना काल में ओपीडी बंद है। ऐसे में लोग टेलीमेडिसन या फोन के जरिए चिकित्सीय सलाह ले रहे हैं।

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