बरेली: खाद खरीद में डिजिटल भुगतान किसानों के लिए बनी गले की फांस
बरेली, अमृत विचार। खरीफ का सीजन शुरू हो चुका है। खाद की खरीद में डिजिटल भुगतान सरकार ने अनिवार्य कर दिया है। नगद भुगतान करने वाले किसानों को खाद नहीं मिलेगी। अपर मुख्य सचिव इसको लेकर फरमान भी जारी कर चुके हैं। लेकिन सरकार की यह नई व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी …
बरेली, अमृत विचार। खरीफ का सीजन शुरू हो चुका है। खाद की खरीद में डिजिटल भुगतान सरकार ने अनिवार्य कर दिया है। नगद भुगतान करने वाले किसानों को खाद नहीं मिलेगी। अपर मुख्य सचिव इसको लेकर फरमान भी जारी कर चुके हैं। लेकिन सरकार की यह नई व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। क्योंकि अधिकतर किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं और जिनके पास हैं उनको डिजिटल भुगतान की जानकारी नहीं। ऐसे में खाद खरीदने के लिए भुगतान कैसे किया जाए इसको लेकर किसान परेशान हैं।
कोरोना काल में किसानों को पिछले बार भी यूरिया की किल्लत से जूझना पड़ा था। माफिया किस्म के लोगों ने खाद की कालाबाजारी कर मोटी कमाई की थी। सहकारी समितियों के माध्यम से भी बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ। शासन से 10 हजार से अधिक बोरियां खरीदने वाले टॉप 20 किसानों की सूची से बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था। कई किसान ऐसे मिले थे जिनके पास एक इंच जमीन नहीं थी उनको सैकड़ों बोरी यूरिया की बिक्री कर डाली थी। इसको लेकर सरकार ने खाद बिक्री को लेकर नया फरमान जारी करते हुए डिजीटल भुगतान अनिवार्य किया है। इसके तहत दुकानदारों को नगद की जगह ऑनलाइन ही भुगतान लेना होगा।
अफसरों का तर्क है कैशलेस प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में यह कदम उठाया गया है। जिले के सभी उर्वरक विक्रेताओं को डिजिटल सिस्टम से खाद बिक्री को कहा गया है। इसके लिए दुकानदार दुकानों पर यूपीआइ क्यूआरकोड रख रहे हैं। दावा यह भी किया जा रहा डिजीटल भुगतान से स्टॉक आसानी से मिलाया जा सकेगा।
इधर, कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि डिजिटल मोड में भुगतान की व्यवस्था तो ठीक, लेकिन दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले 80 फीसदी किसान अभी भी स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इससे किसानों को काफी परेशानी होगी। उनको न तो खाद आसानी से मिल सकेगी न वह डिजिटल भुगतान कर पाएंगे।
जिले में करीब पांच लाख किसान हैं पंजीकृत
विभागीय आंकड़ों में जिले में करीब पांच लाख किसान पंजीकृत हैं। इनमें साढ़े चार लाख किसान पीएम सम्मान निधी में पंजीकृत हैं। जानकारों की मानें तो इनमें 80 फीसदी किसान स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करते हैं। जिन किसानों के पास स्मार्टफोन है भी उनको डिजीटल सिस्टम की जानकारी नहीं है। ऐसे में किसानों को अब खरीफ सीजन में यूरिया खरीद को लेकर अभी से चिंता सता रही है।
कोरोना कर्फ्यू में खुलेंगी कीटानाशक और कृषि यंत्रों की दुकानें
कोरोना कर्फ्यू के बीच प्रशासन ने किसानों को राहत दी है। कीटनाशक और कृषि यंत्रों की दुकानों को खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है। जिलाधिकारी नितिश कुमार ने बताया कोरोना कर्फ्यू फिलहाल 24 मई की सुबह तक लागू है। इस दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत न हो इसके देखते हुए प्रशासन ने अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर कीटनाशक और कृषि यंत्रों की दुकानों की अनुमति प्रदान कर दी है।
उप निदेशक कृषि अशोक यादव ने बताया इस कर्फ्यू की अवधि में कृषकों की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए जनपद में उर्वरक, बीज, पेस्टीसाइड, कृषि यंत्रों की मरम्मत की दुकानें खोलने की अनुमति प्रदान की गयी है। इस दौरान दुकानों पर कोविड प्रोटोकॉल के तहत सोशल डिस्टेसिंग, मॉस्क एवं सैनेटाइजेशन का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। किसी संस्थान व दुकान पर कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन होते हुए नहीं पाया जाता है, तो कठोरतम कार्रवाई की जायेगी।
