बरेली: कोरोना की तीसरी लहर न ढा पाए बच्चों पर कहर, तैयार किए जा रहे बच्चा वार्ड
बरेली,अमृत विचार। कोरोना वायरस की तीसरी लहर बच्चों के लिए ख़तरनाक साबित हो सकती है। इसको देखते हुए शासन प्रशासन की ओर से तैयारियां की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी बच्चों के लिए अलग वार्ड बनाया जाने की कवायद की जा रही है। विशेषज्ञ भी बच्चों में कोरोना वायरस इंफेक्शन बढ़ने …
बरेली,अमृत विचार। कोरोना वायरस की तीसरी लहर बच्चों के लिए ख़तरनाक साबित हो सकती है। इसको देखते हुए शासन प्रशासन की ओर से तैयारियां की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी बच्चों के लिए अलग वार्ड बनाया जाने की कवायद की जा रही है। विशेषज्ञ भी बच्चों में कोरोना वायरस इंफेक्शन बढ़ने से माता-पिता को सचेत कर रहे हैं।
इसी बीच स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक आंकलन के अनुसार अप्रैल के अंतिम सप्ताह से वर्तमान सप्ताह तक संक्रमितों बच्चों के आंकड़े में बढ़ोतरी हुई है। जिसके बाद से ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।
अप्रैल में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में कोविड पॉज़िटिव निकल रहे वायरस का संक्रामक वेरिएंट पूरे परिवार को प्रभावित कर रहा है। आकलन के अनुसार जनपद में अप्रैल के अंतिम सप्ताह में 0-10 वर्ष के बच्चे की संख्या 752 और 11-20 उम्र के किशोर की संख्या 2324 थी। वर्तमान में आंकड़ों के अनुसार यह संख्या बढ़ी है। अब 0-10 उम्र के 1058 बच्चे, 11-20 उम्र के 3334 किशोरों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर बच्चों में हल्के लक्षण देखे जाते हैं। बच्चों में गंभीर मामले कम देखे गए हैं और अभी तक उनका इलाज संभव हो सका है। इस साल की तुलना पिछले साल से करें तो इस साल ज़्यादा बच्चे कोविड से प्रभावित हो रहे हैं। कोविड की पहली लहर में बच्चे संक्रमित होते थे लेकिन उनमें लक्षण नहीं नज़र आते थे, लेकिन इस साल अब उनमें बुखार, दस्त, सर्दी और खांसी जैसे लक्षण दिखते हैं। जैसा कि घर के बड़े-बुजुर्गों में गंभीर लक्षण होते हैं, वैसे ही लक्षण अब बच्चों में भी दिख रहे हैं।
हालांकि बच्चे इस वायरस से ज्यादा परेशानी नहीं महसूस करते हैं, लेकिन वे इन्फेक्शन को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का काम कर सकते हैं। हम मान कर चल रहे हैं कि तीसरी लहर 0 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए ज्यादा गंभीर हो सकती है, इसी उम्र के लोगों का अभी बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन नहीं हो रहा है। इसलिए यह ज़रूरी है कि नवजात शिशुओं को मां का दूध पिलाया जाना चाहिए और उनके किसी भी बाल चिकित्सा टीकाकरण में देरी नहीं करनी चाहिए।
