कोरोना काल में ‘चीखों’ से कहीं ज्यादा गूंजी ‘किलकारियां’

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अमृत विचार, बरेली। कोरोना काल में भले ही श्मशानों और रामगंगा के किनारे शवों की अंत्येष्टि के लिए जगह बाकी न रही हो लेकिन नगर निगम के जन्म व मृत्यु के रिकार्ड कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। रिकार्ड के मुताबिक कोरोना काल में मृतकों की संख्या से कहीं ज्यादा करीब चार से …

अमृत विचार, बरेली। कोरोना काल में भले ही श्मशानों और रामगंगा के किनारे शवों की अंत्येष्टि के लिए जगह बाकी न रही हो लेकिन नगर निगम के जन्म व मृत्यु के रिकार्ड कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। रिकार्ड के मुताबिक कोरोना काल में मृतकों की संख्या से कहीं ज्यादा करीब चार से पांच गुना तक बच्चों की किलकारियां गूंजी है।

अफसरों का तर्क यह भी है कि कोरोना से मरने वालों के परिजन अभी सूचनाएं कम दे रहे हैं। इसलिए इस संख्या में आगे चलकर कुछ बदलाव भी हो सकता है। फिलहाल कोरोना काल में यह तस्वीर बताती है कि अपनों के हमेशा के लिए खो देने वाले बड़ी संख्या में परिवार हैं तो एक कुनबों की भी कमी नहीं है, जिनके यहां नन्हें मेहमानों ने ढेर सारी खुशियां भी दी हैं। कोरोना काल में बड़ी संख्या में मौतों से पूरा माहौल गमगीन और मायूसी देने वाला है।

ऐसे परिवारों की कमी नहीं, जिन्होंने इस महामारी में किसी न किसी प्रियजन को खो दिया है। किसी से सिर से बाप का साया उठा तो किसी के मांग का सिंदूर उजड़ा है। किसी की कलाई सूनी हुई हैं तो किसी ने भाई का प्यार खो दिया है। किसी ने अपना कोई रिश्तेदार खोया तो किसी ने दोस्त खो दिया। श्मशानों में चिताओं को जलाने की जगह नहीं थी। ऐसे में बड़ी संख्या में परिवार मातम मना रहे थे लेकिन इस बीच ऐसे परिवारों की कमी नहीं थी, जिनके यहां नन्हें मेहमानों की किलकारियां खुशी का माहौल पैदा कर रही थीं।

नगर निगम में मृत्यु व जन्म के रिकार्ड देखें तो इस साल मृतकों के मुकाबले चार से पांच गुना ज्यादा तक जन्म लेने वालों के आंकड़े हैं। कोरोना काल में गमगीन माहौल को कुछ खुशी देने वाली है। हालांकि नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस समय कोरोना संक्रमण को देखते हुए मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने वालों की तादाद कम है। बाद में इसकी संख्या बढ़ने के साथ मृत्यु दर में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है।

अफसरों के न बैठने से प्रमाणपत्र बनवाने में दिक्कत
कोरोना काल में अधिकारियों के कम बैठने से लोगों को जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में दिक्कत आ रही है। यह जन्म व मृत्यु के प्रमाणपत्र बनवाने वाले वे लोग हैं, जिन्हें सर्टिफिकेट बनवाने में काफी देरी हो गई है और उन्हें अब अधिकारियों की रिपोर्ट लगवानी है।

ऑनलाइन सिस्टम ने दी राहत
नगर निगम ने जन्म व मुत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन सिस्टम लागू कर दिया है। इससे लोगों को इन प्रमाणपत्रों को बनवाने में काफी राहत मिल रही है। कोरोन काल में उन्हें इन प्रमाणपत्रों को बनवाने के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ रहा है।

नगर निगम में इस बार जन्म व मृत्यु का रिकार्ड
माह              मृत्यु         जन्म
जनवरी          967        3436
फरवरी          871        3537
मार्च              728        3464
अप्रैल            1034      2983
मई (अब तक) 700       2983

नगर निगम में अस्पतालों व लोगों की सूचनाओं के आधार पर ही जन्म व मृत्यु के रिकार्ड तैयार किए जाते हैं, जो ऑनलाइन है। बाद में आने वाले फार्म में इसमें बदलाव भी संभव है। -अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त

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