कोरोना को है हराना तो टीकाकरण है कराना, राज्यों को नि:शुल्क मिलेगी कोविड टीकों की 5.86 करोड़ खुराक

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नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि केंद्र द्वारा पहले से उपलब्ध कराए गए एक अनुमान के मुताबिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक मई से 15 जून तक कोविड रोधी टीके की 5.86 करोड़ खुराक नि:शुल्क मुहैया कराई जाएंगी। मंत्रालय ने कहा कि इसके अतिरिक्त, टीका विनिर्माताओं से प्राप्त अनुमान के …

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि केंद्र द्वारा पहले से उपलब्ध कराए गए एक अनुमान के मुताबिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक मई से 15 जून तक कोविड रोधी टीके की 5.86 करोड़ खुराक नि:शुल्क मुहैया कराई जाएंगी। मंत्रालय ने कहा कि इसके अतिरिक्त, टीका विनिर्माताओं से प्राप्त अनुमान के अनुसार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए टीकों की सीधी खरीद के वास्ते जून के अंत तक कुल 4.87 करोड़ खुराक उपलब्ध होंगी।

जून तक आपूर्ति की स्पष्ट समयसीमा के साथ उक्त अनुमान के मद्देनजर एवं टीकाकरण अभियान की सफलता के लिए उपलब्ध खुराकों का पर्याप्त एवं त्वरित उपयोग सुनिश्चित करने के वास्ते राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सुझाव दिया गया है कि वे टीकाकरण के लिए जिलावार और कोविड टीकाकरण केंद्रों के हिसाब से योजना तैयार करें।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह भी सलाह दी गई है कि राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस तरह की योजना के बारे में जनता में जागरूकता लाने एवं टीकाकरण केंद्रों पर भीड़ न लगने देने तथा कोविन पर टीकाकरण के लिए आसानी से तारीख एवं समय प्राप्त करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने जैसी चीजें सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मीडिया मंचों का इस्तेमाल करें।

राज्य सरकारों और निजी टीकाकरण केंद्रों-दोनों को सलाह दी गई है कि वे कोविन डिजिटल मंच पर अग्रिम रूप से अपने टीकाकरण कार्यक्रम की जानकारी प्रकाशित करें और सिर्फ एक ही दिन का टीकाकरण कार्यक्रम प्रकाशित न करें। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे संबंधित अधिकारियों को 15 जून तक के कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम की पहले से ही योजना तैयार कर लेने का निर्देश दें।

इसने कहा कि टीकाकरण देश में सर्वाधिक संवेदनशील आबादी समूहों को कोविड-19 से बचाने का माध्यम है और उच्चतम स्तर पर इसकी लगातार समीक्षा एवं निगरानी की जाती रहनी चाहिए। बयान में कहा गया कि पहले से उपलब्ध कराया गया अनुमान अधिक बेहतर एवं अधिक प्रभावी योजना बनाने में राज्यों की मदद करेगा।

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