बरेली: कोरोना दवाओं की घटी मांग, अब इम्यूनिटी बूस्टर्स की बढ़ी डिमांड

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली,अमृत विचार। कोरोना संक्रमितों की संख्या घटने के साथ ही दवाओं की बिक्री में भी गिरावट दर्ज की गई है। अप्रैल के 25 दिनों में थोक दवा बाजार में करीब 11 करोड़ की बिक्री मई के पहले 15 दिनों में 1 करोड में ही सिमट कर रह गई है। दुकानों पर दवाओं का भरपूर स्टॉक …

बरेली,अमृत विचार। कोरोना संक्रमितों की संख्या घटने के साथ ही दवाओं की बिक्री में भी गिरावट दर्ज की गई है। अप्रैल के 25 दिनों में थोक दवा बाजार में करीब 11 करोड़ की बिक्री मई के पहले 15 दिनों में 1 करोड में ही सिमट कर रह गई है। दुकानों पर दवाओं का भरपूर स्टॉक है पर लाइसेंसी खरीदार नहीं हैं। फुटकर दवा की दुकानों पर भी लगने वाली भीड़ कम हो गई है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक बंदी व्यापार में बाधक बनी है। थोक दवा बाजार में 15 अप्रैल को अफरा-तफरी की स्थिति थी। रिटेलरों के साथ 5 दिन की कोरोना किट फुटकर में लेने वालों की संख्या सैंकड़ों में थी। दुकानदारों के मुताबिक अब बाजार से गायब दवाओं का भरपूर स्टॉक है, लेकिन ग्राहक नदारद हैं। व्यापारी इसके दो कारण मानते हैं पहला कोरोना कर्फ्यू और दूसरा संक्रमितों की संख्या में आ रही कमी। इसके कारण दवाओं की बिक्री पर 10 से 50 फीसद तक असर पड़ा है।

इम्युनिटी बूस्टर विटामिन सी की गोली लिम्सी समेत अन्य ब्रांड जिंक या आयुर्वेद में गिलोय, तुलसी, अश्वगंधा, च्यवनप्राश आदि की मांग में 500 फीसदी तक उछाल आया है। वहीं दवा विक्रेताओं के मुताबिक एंटीबायोटिक और अन्य दवाओं की बिक्री भले ही कम हुई लेकिन इम्युनिटी बूस्टर दवाओं की मांग में तेजी है। गर्मी बढ़ने के साथ ओआरएस घोल की भी मांग है।

पल्स ऑक्सीमीटर की है कमी
दवा बाजार में पल्स ऑक्सीमीटर की कमी अभी बनी हुई है। बाजार में उपलब्ध अधिकतर पल्स ऑक्सीमीटर चीन के बने हैं। देश में निर्मित पल्स ऑक्सीमीटर 1500 से 2000 रुपए के बीच बताए जा रहे हैं। सामान्य दिनों में 500 से 700 रुपये में मिलने वाले पल्स ऑक्सीमीटर फुटकर बाजार में 2000 से 3000 रुपए में मिल रहे हैं। थोक बाजार में पल्स ऑक्सीमीटर जल्दी मिलते नहीं, स्टॉक आया तो थोक में इनके दाम 1200 से 1700 रुपए बताए जा रहे हैं।

बाजार में नहीं ब्लैक फंगस की दवा
कोरोना के साथ ब्लैक फंगस का खतरा बड़ी परेशानी लेकर आया है। ब्लैक फंगस के उपचार में उपयोगी मानी जा रही दवाएं और इंजेक्शन बाजार से गायब हैं। दुकानदारों के मुताबिक इसकी बिक्री बिल्कुल कम है, इसलिए स्टॉक कम रखा गया था। ब्लैक फंगस के मामले बढ़ने पर इंजेक्शन का आर्डर दिया गया है।

“बंदी और प्रतिबंध के साथ कोरोना संक्रमितों की संख्या में आई कमी दवाओं की बिक्री में कमी का कारण बनी है। कोविड उपचार में सहायक दवाओं का बाजार में भरपूर स्टॉक है, लेकिन खरीदार नहीं हैं। बिक्री 10 से 50 फीसदी तक कम हुई है।” -मुकेश अग्रवाल, अध्यक्ष, डिस्ट्रिक्ट बरेली केमिस्ट एसोसिएशन

संबंधित समाचार