बरेली: चालाक बाघिन फिर हुई गायब, खाली हाथ लौटी विशेषज्ञों की टीम
बरेली,अमृत विचार। फतेहगंज पश्चिमी की रबर फैक्ट्री में घूम रही बाघिन का चौथे दिन भी कोई सुराग नहीं मिला। जिसके बाद पीलीभीत से आई विशेषज्ञों की टीम फिर खाली हाथ लौट गई। ऐसा कोई एक बार नहीं हुआ जब टीम रबर फैक्ट्री से खाली हाथ लौटी है जब भी बाघिन को पकड़ने के लिए विशेषज्ञों …
बरेली,अमृत विचार। फतेहगंज पश्चिमी की रबर फैक्ट्री में घूम रही बाघिन का चौथे दिन भी कोई सुराग नहीं मिला। जिसके बाद पीलीभीत से आई विशेषज्ञों की टीम फिर खाली हाथ लौट गई। ऐसा कोई एक बार नहीं हुआ जब टीम रबर फैक्ट्री से खाली हाथ लौटी है जब भी बाघिन को पकड़ने के लिए विशेषज्ञों को बुलाया गया है तब-तब टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा है।
हर बार टीम यही कहकर लौट जाती है कि बाघिन की लोकेशन नहीं मिल रही है। इसलिए लोकल टीम को वहां पर तैनात किया जाएगा। जैसे ही लोकेशन मिलेगी टीम को बुला लिया जाएगा।
इस बार भी यही कहा गया है। हैरत की बात यह है कि टीम के जाते ही बाघिन की लोकेशन मिलना शुरू हो जाती है लेकिन उसके बाद टीम को यहां आने का समय नहीं होता है। टीम तब तक नहीं आती जब तक कोई अनहोनी नहीं होती। ऐसे में एक सवाल खड़ा होना लाजिमी है कि टीम के आने के बाद बाघिन की लोकेशन क्यों गायब हो जाती है और यहां से जाते ही लोकेशन मिलना क्यों शुरू हो जाती है। बहरहाल इस सवाल के बारे में वन विभाग के अधिकारियों का जबाव भी कुछ अलग ही होता है।
उनका कहना है कि बाघिन बेहद चालक है वह आसानी से जाल में नहीं फंसने वाली। उसे पकड़ने के लिए एक विशेष योजना को बनाना होगा। लेकिन वह योजना कब बनेगी इस बात का अधिकारियों के पास कोई जबाव नहीं है। हां, वहीं वन विभाग के सूत्रों की बातों पर गौर करें तो वह बताते है कि बाघिन को पकड़ने नाम पर सिर्फ बजट ठिकाने लगाने का काम किया जा रहा है।
विदित हो कि मीरगंज के हेमराजपुर में दो किसानों पर हमला करके बाघिन ने उन्हें घायल कर दिया था जिससे किसानों में गुस्सा फूट गया था। इसके बाद आनन फानन में वन विभाग की टीम ने पीलीभीत से विशेषज्ञों की टीम को बुलाया था। जिसमें डॉ. दक्ष के साथ दो और डॉक्टर बरेली पहुंचे थे।
“बाघिन की कोई लोकेशन नहीं मिलने की वजह से टीम फिलहाल लौट गई है। लोकल टीमों को तैनात किया गया है। जैसे ही कोई लोकेशन मिलती है टीम को दोबारा बुला लिया जाएगा।” -ललित कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक
