बरेली: मुंह के रोगी रहें सतर्क, ‘ब्लैक फंगस’ से बचने के लिए रखें इन बातों का ख्याल
बरेली,अमृत विचार। कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस भी तेजी से अपने पांव पसार रहा है। जो कि बेहद खतरनाक है। फिलहाल देश के 14 राज्यों ने तो इसे महामारी भी घोषित कर दिया है। ऐसे में जरूरी है कि इस बीमारी के बारे में न सिर्फ जानकारी होनी जरूरी है बल्कि इससे सावधान रहने …
बरेली,अमृत विचार। कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस भी तेजी से अपने पांव पसार रहा है। जो कि बेहद खतरनाक है। फिलहाल देश के 14 राज्यों ने तो इसे महामारी भी घोषित कर दिया है। ऐसे में जरूरी है कि इस बीमारी के बारे में न सिर्फ जानकारी होनी जरूरी है बल्कि इससे सावधान रहने की भी जरूरत है।
ब्लैक फंगस का संक्रमण मुंह से जल्दी फैलता है। जो रोगी मिल रहे हैं उनकी जांच से पता चला है कि संक्रमण मुंह से साइनस, आंखों और मस्तिष्क तक पहुंच रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि पान मसाला खाने वाले और कोरोना से स्वस्थ्य होकर लौटे मरीजों को खासतौर पर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। इसकी वजह से मुंह की खाल कमजोर हो जाती है जिससे फंगस को शरीर में प्रवेश में आसानी होती है।
इसके अलावा ऐसे कोविड रोगी जो पहले से पायरिया, मसूड़ों के संक्रमण, सबम्युकस फाइब्रोसिस, मुंह के छाले, ल्यूकोप्लाकिया(सफेद चकत्ता) के चपेट में रहे हैं, वे भी मुंह की जांच करा लें और डॉक्टरों से सलाह लेकर सावधान रहें। विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह में ब्लैक फंगस शुरुआत में जल्दी पकड़ में नहीं आता है। जब मसूड़ों में सूजन होती है तालू काला पड़ने लगता है तो रोगी को पता चलता है। यदि लापरवाही हुई तो संक्रमण साइनस की तरफ बढ़ जाता है। यहां की नलिकाओं से यह मस्तिष्क तक चला जाता है।
रोहिलखंड मेडिकल कालेज व अस्पताल के डेंटल कालेज एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आशुतोष अग्रवाल बताते हैं कि ब्लैक फंगस नाक की तुलना में मुंह से अधिक आसानी से घुस सकता है। यदि शुरुआत में ही जांच हो जाए तो रोगी को ज्यादा परेशानी नहीं होती और वे ठीक हो जाएंगे। संक्रमण बढ़ने पर मुश्किलें बढ़ती हैं।
“पान मसाला खाने वालों के मुंह के अंदर की खाल कमजोर होती है, सबम्युकस फाइब्रोसिस भी हो जाता है, इससे ब्लैक फंगस का संक्रमण आसानी से फैलता है। यदि कोई दांतों का पुराना रोगी है और कोविड भी हो गया तो ब्लैक फंगस खतरा रहता है। शुरुआत में संक्रमण पकड़ में आने से इलाज आसानी से हो जाता है। इसको लेकर घबराने की जरूरत नहीं।” -डॉ.आशुतोष अग्रवाल, रोहिलखंड मेडिकल कालेज व अस्पताल डेंटल कालेज एसोसिएट प्रोफेसर
इन मामलों में ब्लैक फंगस का खतरा अधिक
– जो लोग कोरोना से ग्रसित रहे हों
– जो रोगी करीब महीने भर अस्पताल में भर्ती रहे हों
– जिनका ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो
– जिन्हें लंबे समय तक आक्सीजन दी गई हो
दिनचर्या में करें बदलाव, इन बातों का रखें ख्याल
– दो चम्मच क्लोरहेक्सिडीन एक गिलास पानी में मिलाकर कुल्ला करें
– आधा चम्मच खाने का सोडा भी एक गिलास पानी में मिलाकर कुल्ला कर सकते हैं
– मसूड़ों में एंटी बैक्टीरियल मलहम लगाएं
– कोरोना रोगी एक बार दंत रोग विशेषज्ञ से जांच करा लें
