बरेली: चुनाव ड्यूटी में संक्रमित होकर हुई मौत, संकट में परिवार
बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण की वजह से न जाने कितने परिवार तबाह हो गए। किसी ने अपने माता-पिता को खोया तो किसी ने अपने बच्चों को। कहीं-कहीं तो पूरा परिवार ही उजड़ गया। लेकिन सबसे बुरे हालात उन परिवारों के हैं जिनके परिवार में केवल इकलौते ही कमाने वाले थे और वह भी संक्रमण …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण की वजह से न जाने कितने परिवार तबाह हो गए। किसी ने अपने माता-पिता को खोया तो किसी ने अपने बच्चों को। कहीं-कहीं तो पूरा परिवार ही उजड़ गया। लेकिन सबसे बुरे हालात उन परिवारों के हैं जिनके परिवार में केवल इकलौते ही कमाने वाले थे और वह भी संक्रमण की भेंट चढ़ गए। उन परिवारों के हालात अब यह हो चुके हैं कि उन्हें बच्चों को पढ़ाना तो दूर उनके लिए खाने का इंतजाम करना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसा ही कुछ उन शिक्षकों के साथ भी हुआ है जिनकी ड्यूटी पंचायत चुनाव में लगी थी। अपने परिवार में वह इकलौत कमाने वाले थे। अब उनके नहीं रहने से पूरा परिवार बुरे दौर से गुजर रहा है।

दो बच्चे हैं पूरा पैसा इलाज में हो गया खर्च
दमखोदा ब्लॉक के मनकापुर स्कूल में पढ़ाने वाले सहायक अध्यापक चंद्रपाल गंगवार पहले शिक्षामित्र थे। हाल ही में वह सहायक अध्यापक बने थे। चंद्रपाल के दो बच्चे हैं जिसमें से एक कक्षा 10 में और दूसरा कक्षा पांच में पढ़ता है। उनकी पत्नी नीरज ने बताया कि चंद्रपाल परिवार में अकेले कमाने वाले थे।
चुनाव ड्यूटी से लौटने के बाद वह बीमार हो गए। हालत बिगड़ता देख उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद भी तबियत नहीं सुधरी। इलाज में करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च करने के बाद भी पति को नहीं बचा सकी। नीरज बताती हैं कि उनके दोनों बच्चे एक निजी स्कूल में पढ़ते हैं। उनकी फीस जमा करने तक की समस्या हो रही है। पति की जगह कब तक नौकरी मिलेगी इसकी भी कोई उम्मीद नहीं है।
हम समझे पापा बेहोश हैं… लेकिन वो तो गुजर चुके थे
प्राथमिक स्कूल कालीबाड़ी में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हरिओम सिंह अपने परिवार में कमाने वाले इकलौते थे। चुनाव ड्यूटी से लौटकर आए उसी दिन से तबियत बिगड़ने लगी। खांसी जुकाम हुआ और फिर बुखार आना भी शुरू हो गया। तीन बार कोविड टेस्ट कराया तीनों बार रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
परिवार के अन्य दोनों सदस्य भी संक्रमित हो गए। हरिओम के बेटे अखिल ने बताया कि 25 अप्रैल की रात उनके पिता की तबियत बहुत खराब हो गई। उन्हें सांस लेने में समस्या होने लगी। तबियत बिगड़ती देख अखिल ने तुरंत 108 पर फोन कर एंबुलेंस बुलाई। एंबुलेंस डेढ़ घंटे के बाद पहुंची। तब तक उनके पिता बेहोश हो चुके थे। जब एंबुलेंस पहुंची तो उन्होंने पिता को मृत घोषित कर दिया।
