कोरोना से जंग को निहत्थे उतारे योद्धा, पल्स ऑक्सीमीटर व थर्मामीटर तक नहीं दिए

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को नियंत्रित करने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी समितियां बनाई गई हैं। इनको ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमितों को जीवन रक्षक दवाइयां, स्क्रीनिंग करने के लिए तैनात किया गया है लेकिन स्वास्थ्य महकमे ने निगरानी समितियों को बिना संसाधन के ही …

अमृत विचार, बरेली। जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को नियंत्रित करने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी समितियां बनाई गई हैं। इनको ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमितों को जीवन रक्षक दवाइयां, स्क्रीनिंग करने के लिए तैनात किया गया है लेकिन स्वास्थ्य महकमे ने निगरानी समितियों को बिना संसाधन के ही मैदान में उतार दिया। उन्हें न तो जीवन रक्षक किट दी गई और न ही संदिग्ध कोरोना मरीजों की जांच के लिए उपकरण मुहैया कराए गए। ऐसे में ये समितियां कागजी कार्रवाई तक ही सिमटकर रह गईं हैं।

जिले में 2000 निगरानी समितियां काम कर रही हैं। इन समितियों में आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल हैं। संसाधन के अभाव में ये सभी ग्रामीणों से मौखिक जानकारी कर सिर्फ नाम-पता नोट कर रही हैं। कोविड गाइडलाइन के तहत टीम को गांव में बाहर से आने वाले प्रवासियों पर नजर रख संक्रमित मरीजों की निगरानी करनी है। गांव में डोर-डोर सर्वेक्षण कर कोरोना लक्षण वाले मरीजों को चिह्नित करना है। टीम में आशा, आंगनबाड़ी, कोटेदार, प्रधान, लेखपाल और सचिव को शामिल किया है।

संदिग्ध मरीजों को नहीं मिल रही मेडिकल किट
गांव में सर्वेक्षण के दौरान संक्रमितों को मेडिकल किट दी जानी हैं जिसमें पैरासिटामाल, विटमिन सी, डॉक्सी, आइवरमेक्टिन समेत तमाम दवाएं मौजूद हैं। भोजीपुरा ब्लॉक के वीरपुर मकरुका गांव में रहने वाले संदिग्ध मरीज ने बताया कि उसके घर पर टीम आई थी। उन्हें पूरी जानकारी दी लेकिन समिति के सदस्यों ने उन्हें कोई मेडिकल किट नहीं दी और न ही बुखार या ऑक्सीजन लेवल नापा। आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि हमको विभाग की ओर से महज तीन मेडिकल किट ही उपलब्ध कराई जाती हैं जो पूरे गांव में बांटने के लिए नाकाफी हैं।

पूरा घर बीमार होता है, लेकिन फिर भी कहते हैं ठीक
वीरपुर मकरुका में तैनात आशा ने बताया कि सर्वे के दौरान गांव में टीम को एक दिक्कत सबसे ज्यादा आ रही है। अगर टीम किसी के घर सूचना लेने जाती है तो वह लड़ना शुरू कर देते हैं। लोग सामने खड़े होकर ही खांसते है, जब पूछो बीमार हैं तो बताते नहीं। कुछ पूछा तो लड़ना शुरू कर देते हैं। अन्य ग्रामीणों ने किसी तरह उन्हें समझाया।

निजी खर्च पर आशा खरीदती हैं मास्क
आशा एसोसिएशन की उपाध्यक्ष रामवती साहू ने बताया कि आशाओं के पास पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर नहीं हैं और न ही उन्हें मास्क और सेनेटाइजर दिया जा रहा है। इसलिए वह खुद अपनी सुरक्षा के लिए सेनेटाइजर और मास्क खरीद रही हैं। विभाग को पूरी किट मुहैया करानी चाहिए ताकि वह अपना और संदिग्ध ग्रामीणों की बेहतर ढंग से जांच कर सकते हैं।

“सभी गांवों में निगरानी समिति बनाई गई हैं। आशाओं को सीएचसी से थर्मामीटर और पल्स ऑक्सीमीटर उपलब्ध कराए गए हैं। अगर टीम के पास संसाधन उपलब्ध नहीं हैं तो वह सीएचसी के एमओआईसी से सामान प्राप्त कर सकती हैं। फिर भी कोई दिक्कत है तो सीएमओ कार्यालय से संपर्क करें।” -डा. एस के गर्ग, सीएमओ

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