कोरोना ने छीन लिए अपने, टूटे परिजनों के सपने…असमय अपनों को खोने से अवसाद में जी रहे लोग
बरेली, अमृत विचार। कोरोना से हुई असमय मौत से परिजन महीनों बाद भी उबर नहीं पाए हैं। किसी ने कम उम्र में ही माता-पिता को खो दिया तो किसी ने अपने बच्चे को। किसी ने खाना-पीना छोड़ दिया है तो कोई बार-बार बेहोश हो रहा है। इस कारण इन दिनों पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना से हुई असमय मौत से परिजन महीनों बाद भी उबर नहीं पाए हैं। किसी ने कम उम्र में ही माता-पिता को खो दिया तो किसी ने अपने बच्चे को। किसी ने खाना-पीना छोड़ दिया है तो कोई बार-बार बेहोश हो रहा है। इस कारण इन दिनों पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के मरीज बढ़ गए हैं।
कोरोना संक्रमण के नए स्ट्रेन में कम उम्र के लोग भी चपेट में आए। इस कारण कई लोगों की असमय मौत भी हो गई। इसमें कई ऐसे लोगों ने भी जान गंवाई जिन्हें कोई बीमारी ही नहीं थी। ऐसी मौतों से परिजनों को भी काफी आघात पहुंचा। हाल ये रहा कि छोटे-छोटे बच्चों ने मां-बाप को खो दिया तो कई लोग अपने छोटे बच्चों से जुदा हो गए। ऐसी मौतों को परिजन भूल नहीं पा रहे हैं।
मौत के कई दिन बीत जाने के बावजूद वह इस सदमे से नहीं उबर पा रहे हैं। कई लोग तो बेड या फिर ऑक्सीजन की व्यवस्था न हो पाने पर खुद को भी परिजनों की मौत का जिम्मेदार मान रहे हैं। ऐसे में परिजन मनोचिकित्सकों का सहारा ले रहे हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि संक्रमण के चलते लोगों में इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन खाना-पीना छोड़ देना कोई इलाज नहीं है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत मनोचिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।
ऐसे रखें ध्यान
- समय पर खाना-पीना करें।
- जिन कार्यकलापों में रुचि हो उनमें समय बिताएं।
- किसी भी चीज पर खुद को दोष न दें।
- अपनी समस्याओं को दूसरों के साथ साझा करें।
मौजूदा हालातों में पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के मामले बढ़े हैं। ऐसे में लोगों को महामारी का शिकार लोगों के परिजनों के साथ संपर्क में रहना चाहिए। उन्हें अकेला महसूस न होने दें। यदि व्यक्ति की समस्या लंबी चले तो मनोचिकित्सक को दिखाएं। -डॉ. आशीष, मनकक्ष प्रभारी, जिला अस्पताल।
