बरेली: महंगा होने जा रहा है आपके सपनों का घर, इस वजह से बढ़ेगी मकानों की कीमत
बरेली,अमृत विचार। रियल एस्टेट की नींव कोरोना से वैसे ही हिली हुई और कॉलोनोइजरों के कई अरब के प्रोजेक्ट अटक गए हैं। ऐसे में शासन ने राहत देने के बजाय विकास शुल्क की दरों में बढ़ोत्तरी कर दी है। ऐसे में बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) से स्वीकृत मकान भी महंगे हो रहे हैं। बिल्डरों का …
बरेली,अमृत विचार। रियल एस्टेट की नींव कोरोना से वैसे ही हिली हुई और कॉलोनोइजरों के कई अरब के प्रोजेक्ट अटक गए हैं। ऐसे में शासन ने राहत देने के बजाय विकास शुल्क की दरों में बढ़ोत्तरी कर दी है। ऐसे में बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) से स्वीकृत मकान भी महंगे हो रहे हैं।
बिल्डरों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के ऐसे कठिन दौर में जहां हर कोई असुरक्षित और बीमारी के चपेट में आने की आशंका से सहमा हुआ है, ऐसे में सरकार मकान खरीदारों को प्रोत्साहित करने के बजाय विकास शुल्क बढ़ाकर कॉलोनाइजरों को अपनी टाउनशिप में मकानों की कीमतों को बढ़ाने पर विवश कर दिया है।
बीडीए किसी कॉलोनी का नक्शा पास करने के लिए विकास शुल्क वसूल करती है, ताकि उससे होने वाली आमदनी से प्राधिकरण से संबंधित विकास कार्यों कराए जा सकें। प्राधिकरण के नियमों के अनुसार ले-आउट पास कराने के समय ही बिल्डरों को यह औपचारिकता पूरी करानी होती है।
कॉलोनाइजरों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट के कारोबार को तमाम नए तरीके के कानूनों ने जकड़ लिया। सरकार को इस वैश्विक महामारी से उत्पन्न हो रही मंदी से उबरने के लिए बंधन खोल देने चाहिए चाहे। वर्तमान में प्रदेश सरकार एकमात्र पूरे देश की सरकार होगी, जिसने महामारी के चलते मानचित्र स्वीकृती के लिए विकास शुल्क में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की हो।
बरेली शहर में बीडीए पहले विकास शुल्क 800 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से वसूलता था लेकिन अब नए आदेश के तहत यह रकम 1200 रुपए वर्ग मीटर निर्धारित कर दी गई है। कॉलोनाइजरों का कहना है कि वैश्विक महामारी की लहर चलते रियल एस्टेट कारोबार को जबदस्त झटका लगा है।
आमदनी है नहीं और खर्चे जहां के तहां
अप्रैल और मई के दौरान पूरी तरीके से व्यापार ठप रहा है और अभी भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। महामारी की तीसरी लहर को लेकर लोग सकते में हैं उसे देखते हुए कारोबार ठंडा ही रहने की ही संभावना है। इसका असर यह है कि मकान खरीदारों से वसूली लगभग ठप है, जबकि बिल्डरों के हर महीने होने वाले खर्च जैसे कि बैंकों के कर्ज का ब्याज, स्टाफ का वेतन, बिजली के बिल व अन्य खर्चे वहीं के वहीं हैं। इनसे उबर पाना एक बड़ी चुनौती है। बिल्डरों का कहना है कि विकास शुल्क की दर बढ़ेगी तो टाउनशिप की लागत में भी इजाफा होगा। आखिर में इसका बोझ मकान खरीददारों को ही उठाना पड़ेगा। विकास शुल्क को पूरा करने के लिए मकान की कीमत बढ़ाना एक मजबूरी है।
बिल्डरों ने मकान खरीदारों को प्रोत्साहित करने के लिए दिए सुझाव
बिल्डरों का कहना है कि सरकार को निर्माण क्षेत्र में मांग बढ़ाने के लिए केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर कदम उठाने चाहिए। प्रथम बार जो भवन का क्रय कर रहे हैं, उनके लिए स्टांप ड्यूटी में पूर्ण छूट होनी चाहिए। यह अधिकतम एक हजार रुपए पर उसकी रजिस्ट्री होनी चाहिए। इसके साथ प्रथम बार भवन करने वाले के लिए आवासीय लोन की ब्याज दर चार प्रतिशत होनी चाहिए।
“कोरोना काल के इस कठिन दौर में जहां आम आदमी मकान खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा, वहीं बीडीए के विकास शुल्क में बढ़ोत्तरी होने से इसका असर मकान की कीमत पर पड़ेगा। जबकि इस समय मकान के खरीदारों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।” -रमनदीप सिंह, अध्यक्ष, क्रेडाई
