बरेली: कहीं मलेरिया न बरपा दे कहर, 42 गांवों में नहीं बांटी गई मच्छरदानी
बरेली,अमृत विचार। तीन साल पहले मलेरिया ने बरेली जनपद में खूब कहर बरपाया था। सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। हजारों की संख्या में लोग बीमार हुए थे। इसके बाद शासन ने मलेरिया संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए जनपद के नौ ब्लॉकों को संवेदनशील घोषित किया था। राज्य सरकार इन ब्लॉकों के गांवों …
बरेली,अमृत विचार। तीन साल पहले मलेरिया ने बरेली जनपद में खूब कहर बरपाया था। सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। हजारों की संख्या में लोग बीमार हुए थे। इसके बाद शासन ने मलेरिया संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए जनपद के नौ ब्लॉकों को संवेदनशील घोषित किया था।
राज्य सरकार इन ब्लॉकों के गांवों में मच्छरदानी बांटने की योजना लाई थी। योजना के तहत मलेरिया से प्रभावित करीब 600 गांवों में 1.50 लाख मच्छरदानी बांटने के लिए मलेरिया विभाग को आवंटित की थी लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता की वजह से संवेदनशील गांवों में मच्छरदानी नहीं बांटी गयीं। 42 गांवों के सैकड़ों लोग मच्छरदानी से वंचित रह गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि मच्छरदानी बांटने में खेल किया गया है। मच्छरदानी को लेकर मलेरिया विभाग के अंदर यहां तक चर्चा है कि आपदा में मच्छरदानी वितरण को भी अवसर बनाया गया है।
कोरोना काल में भी गांवों में मलेरिया पैर पसार रहा है। विभाग में मलेरिया की दृष्टिगत जिले के मझगवां, भमोरा, रामनगर और आंवला, क्यारा, फरीदपुर, कुआडांडा, भोजीपुरा, फतेहगंज ब्लॉक संवेदनशील घोषित किए गए थे। विभागीय अधिकारियों के अनुसार नौ ब्लॉक में से सात ब्लॉक के लाभार्थियों को मलेरिया विभाग की ओर से मच्छरदानी वितरित की गई हैं।
भोजीपुरा ब्लॉक के 118 गांवों में 40 गांवों में मच्छरदानी वितरित की गईं लेकिन कोरोना की दूसरी लहर से मच्छरदानी वितरित नहीं हो पाई हैं। जबकि शासन की ओर से गांवों को हाई रिस्क श्रेणी में रखकर मच्छरदानी वितरण करने के लिए मंगाई गई थीं। 42 गांवों में से दोहना, गौटिया, ग्राम सफरी समेत सात गांवों में मच्छरदानी का वितरित नहीं हुआ।
ऐसे बनती है स्पेशल मच्छरदानी
गांवों में लोग जिस मच्छरदानी को उपयोग करते हैं, उसे इस प्रोजेक्ट के तहत खास दवा से उपचारित किया जाता है। कार्यक्रम में मलेरिया से अधिक प्रभावित गांवों को चयनित कर वहां रहने वाले लोगों की मच्छरदानी डेल्टामैथ्रीन वाले पानी के घोल में डुबोकर छांव में सुखोई जाती है। सूखने के बाद मच्छरदानी पूरी तरह मच्छरों से बचाने के लिए सुरक्षित होती है। स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से ग्रामीणों को बताया जाता है कि कम से कम तीन साल तक यह दवा असरदार रहेगी लेकिन तीन साल तक मच्छरदानी को धुलना नहीं है। पानी में भींगते ही दवा का असर खत्म हो जाएगा।
“शासन की ओर से वितरण के लिए आयी मच्छरदानी को कोरोना संक्रमण के चलते वितरित नहीं किया गया। कुछ ब्लाकों में फरवरी माह में वितरित किया गया। शेष गांवों में कोरोना की दूसरी लहर के चलते वितरित नहीं किया गया। गायब होने जैसी सूचना नहीं है, इसके लिए गांवों में टीम ने निरीक्षण कर रिपोर्ट में बताया कि करीब 40 गांवों में वितरित नहीं हो पाई। जून में मलेरिया रोधी अभियान के तहत शेष गांवों में वितरण शुरु किया जाएगा।” -डा. डीआर सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी
