बाघों से बनाई जिसने अपनी पहचान… 7 साल का हुआ पीलीभीत टाइगर रिजर्व
पीलीभीत, अमृत विचार। पीलीभीत टाइगर रिजर्व आज सात साल का हो गया है। इन सात सालों में पीलीभीत टाइगर रिजर्व के साथ उपलब्धियां भी जुड़ी हैं। अभी टाइगर रिजर्व बाल्यावस्था में है। जब टाइगर रिजर्व बना तो यह संसाधनहीन था। इसमें स्टाफ की कमी और वन कर्मियों के पास कोई भी सुरक्षात्मक प्रबंध नहीं थे। …
पीलीभीत, अमृत विचार। पीलीभीत टाइगर रिजर्व आज सात साल का हो गया है। इन सात सालों में पीलीभीत टाइगर रिजर्व के साथ उपलब्धियां भी जुड़ी हैं। अभी टाइगर रिजर्व बाल्यावस्था में है। जब टाइगर रिजर्व बना तो यह संसाधनहीन था। इसमें स्टाफ की कमी और वन कर्मियों के पास कोई भी सुरक्षात्मक प्रबंध नहीं थे। किसी तरह जंगल और जंगली जानवरों की सुरक्षा की जा रही थी। आज हमारे पास कई सुरक्षात्मक उपकरण हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व भले ही बाघों से अपनी पहचान बनाए हुए है, लेकिन यहां सभी प्रकार के वन्यजीव उपलब्ध हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की स्थापना की अधिसूचना नौ जून 2014 को हुई थी। पहली बार 1989 में पीलीभीत टाइगर रिजर्व की स्थापना के लिए पीलीभीत पर्यावरण सुधार संस्थान ने तत्कालीन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री मेनका गांधी को इस संबंध में ज्ञापन दिया था। खीरी के तत्कालीन सांसद रवि प्रकाश वर्मा ने तो लोकसभा में पीलीभीत टाइगर रिजर्व की कई बार मांग की थी।
पहली बार पीलीभीत वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी रमेश पांडेय ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व का प्रस्ताव भेजा, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। फिर प्रभागीय वनाधिकारी प्रमोद गुप्ता ने इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा। तत्कालीन बसपा सरकार ने इसे केंद्र के पास भेज दिया था। प्रस्ताव राज्य सरकार के पाले में आ गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में आई राज्य सरकार ने 2014 में इसको अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी।
