बरेली: महामारी में जरूरत पर युवाओं ने थामी रक्तदान की कमान

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सिद्धार्थ भारद्वाज, बरेली। रक्तदान से बढ़कर कोई दूसरा दान नहीं होता, लेकिन कोरोना की वजह से पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक कमी रक्त ही रही। अधिकांश ब्लड बैंक कोरोना की पहली लहर में लगभग खाली ही रहे। दूसरी लहर में ब्लड बैंकों में रक्तदान की कमी की खबरें सामने आने पर रक्त की कमी …

सिद्धार्थ भारद्वाज, बरेली। रक्तदान से बढ़कर कोई दूसरा दान नहीं होता, लेकिन कोरोना की वजह से पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक कमी रक्त ही रही। अधिकांश ब्लड बैंक कोरोना की पहली लहर में लगभग खाली ही रहे। दूसरी लहर में ब्लड बैंकों में रक्तदान की कमी की खबरें सामने आने पर रक्त की कमी पूरी करने की जिम्मेदारी युवाओं ने अपने हाथों में ले ली और आईएमए ब्लड बैंक में जाकर रक्तदान करना शुरू कर दिया। उन्होंने न सिर्फ खुद बल्कि अपने दोस्तों को भी रक्तदान के प्रति जागरुक कर रक्तदान करवाया। विश्व रक्तदान दिवस पर ऐसे ही कुछ युवाओं के बारें में अमृत विचार की ओर से खास पेशकश…

जब लॉकडाउन में ही घर से रक्तदान करने पैदल ही चल दिए
राजेंद्र नगर,पीडब्ल्यूडी कालोनी निवासी आशुतोष अग्निहोत्री (24)आलमबाग लखनऊ में एक मॉल में डिपार्टिंग मैनेजर के पद पर तैनात हैं। वह अभी तक 5 बार रक्तदान कर चुके हैं। पहली बार उन्होंने 2019 में रक्तदान किया था। पिछले वर्ष लॉकडाउन में ब्लड बैंकों के खाली होने की खबर मालूम पड़ी तो वह घर से पैदल ही आईएमए ब्लड बैंक की ओर चल दिए। पुलिस ने उन्हें जगह जगह रोका और टोका, लेकिन रक्तदान करने जाने की बात सुनकर उन्हें जाने दिया। इसके बाद यह अभी तक 3 बार रक्तदान कर चुके हैं।

जन्मदिन पर 71 दोस्तों के साथ किया रक्तदान
वीरसावरकर नगर निवासी रितिक अरोरा (21) ने ग्रेजुएशन किया है। अभी तक 10 से 12 बार वह रक्तदान कर चुके हैं। बताया कि कोरोना काल में रक्त की सबसे अधिक कमी थी। वह रविवार को 21 वर्ष के पूरे हुए हैं। इस जन्मदिन को यादकार बनाने के लिए उन्होंने आईएमए ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर का आयोजन करवाया। इस दौरान कोविड नियमों का पालन करते हुए उन्होंने अपने साथ 71 दोस्तों का भी स्वैच्छिक रक्तदान करवाया।

पहली बार रक्तदान कर दी पिता को श्रद्धांजलि
सिविल लाइंस निवासी डाली शर्मा ने पहली बार 2016 में रक्तदान देकर अपने पिता को श्रद्धांजलि दी थी। वह बताती हैं कि उनके बड़े भाई प्रदीप शर्मा गैंग वॉलेंटरी ब्लड डोनेशन ग्रुप 2015 से चला रहे हैं। उन्होंने अपने छात्र रितिक यादव को श्रद्धांजलि देने के लिए 2017 में एक और ग्रुप बनाया। दोनों ग्रुप में 40 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। जिनमें से 20 से अधिक सदस्य तो ऐसे हैं जो हर तीन महीने बाद रक्तदान करते हैं।

बुजुर्ग भी युवाओं से नहीं पीछे
वैश्विक महामारी में बुजुर्ग भी रक्तदान में युवाओं से पीछे नहीं हैं। शहर में कुछ बुजुर्ग ऐसे भी हैं जो 100 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं, और यह समाज सेवा निरंतर अभी भी जारी है।

100 वीं बार रक्तदान कर बचाई रोगी की जान
एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप के दिनेश कटियार ने 31 मई को ही 100 वीं बार रक्तदान किया है। बताया कि पीलीभीत बाईपास स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती 50 वर्षीय व्यक्ति को खून की जरूरत थी। ऐसे में उनसे संपर्क किया तो वह तुरंत रक्तदान करने आईएमए ब्लड बैंक पहुंचे गए। उन्होंने 31 मई को उन्होंने सौंवी बार रक्तदान किया। एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप बेहद कम लोगों का होता है। किसी जरूरतमंद की रक्त के अभाव में जान न जाए इसिलए वह नियमित रक्तदान करते रहते हैं।

पहली बार संजय गांधी की जयंती पर किया था रक्तदान
67 वर्षीय इकबाल सिंह बाले ने अभी तक 100 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। वह अभी तक 104 बार रक्तदान कर चुके है, साथ ही अब उनके साथ उनकी पत्नी और बेटे भी रक्तदान करते हैं। उन्होंने पहली बार 14 दिसंबर 1983 को संजय गांधी की जयंती पर रक्तदान किया था। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में आयोजित शिविर में कोई रक्तदान नहीं कर रहा था। उसी समय एक घायल अस्पताल पहुंचा जिसे रक्त की सख्त आवश्यकता थी। उन्होंने उसे देखकर रक्तदान का फैसला लिया और तब से लगातार रक्तदान कर रहे हैं।

लोगों को जागरुक करने के लिए आईएमए ने लिया सोशल मीडिया का सहारा
आईएमए ब्लड बैंक की डायरेक्टर डा. अंजू उप्पल बताती हैं कि लॉकडाउन में ब्लड बैंक में तेजी से रक्त खाली हो रहा था। ऐसे में लोगों को जागरूक करने के उदेश्य से सोशल मीडिया का सहारा लिया। फेसबुक पर पेज बनाकर लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करने का कार्य आईएमए की ओर से लगातार किया जा रहा है।

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