नई दिल्ली: यूरिया पर मूल्य नियंत्रण खत्म करने का साहस नहीं जुटा सकी सरकार
संजय सिंह, अमृत विचार। सरकार की ओर से नियुक्त स्वतंत्र एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में यूरिया खाद पर मूल्य नियंत्रण समाप्त करने की सिफारिश की है। एजेंसी का कहना है कि मूल्य नियंत्रण के कारण यूरिया सस्ती पड़ती है। इसलिए अधिकतर किसान यूरिया का उपयोग एवं फास्फेट व पोटाश उर्वरकों की उपेक्षा करते हैं। इस …
संजय सिंह, अमृत विचार। सरकार की ओर से नियुक्त स्वतंत्र एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में यूरिया खाद पर मूल्य नियंत्रण समाप्त करने की सिफारिश की है। एजेंसी का कहना है कि मूल्य नियंत्रण के कारण यूरिया सस्ती पड़ती है। इसलिए अधिकतर किसान यूरिया का उपयोग एवं फास्फेट व पोटाश उर्वरकों की उपेक्षा करते हैं।
इस रिपोर्ट को आए कई महीने बीत चुके हैं। लेकिन सरकार यूरिया को मूल्य नियंत्रण से मुक्त करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। यूरिया की खपत घटाने के लिए उर्वरक कंपनियों के बजाय सीधे किसानों को कैश सब्सिडी देने की योजना भी तकनीकी एवं व्यवहारिक अड़चनों में फंसी हुई है।
गौरतलब है कि उर्वरकों पर लागू मौजूदा न्यूट्रेन्ट्स आधारित सब्सिडी स्कीम (एनबीएस) की उपयोगिता और खामियों का स्वतंत्र तौर पर अध्ययन करने के लिए सरकार ने नवंबर, 2019 में एक कंसल्टिंग फर्म सांटेक कंसल्टेंट्स को थर्ड पार्टी सर्वे का जिम्मा सौंपा था।
इस सर्वे में ये बात उभर कर सामने आई कि 45 फीसद किसान फास्फेट और पोटाश उर्वरकों को बहुत मंहगा मानते हैं। जबकि 46 फीसद किसानो का मानना है कि ये दोनों उर्वरक एमआरपी से ऊंची कीमतों पर बेचे जाते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक एक तरफ तो सरकार ने फास्फेट व पोटाश उर्वरकों पर मूल्य नियंत्रण समाप्त कर उन्हें बाजार भरोसे छोड़ दिया। जबकि दूसरी तरफ यूरिया पर मूल्य नियंत्रण बनाये रखा। इससे यूरिया की खपत बढ़ गई है। यदि सरकार फास्फेट व पोटाश उर्वरकों की भांति यूरिया को भी मूल्य नियंत्रण से मुक्त कर दे संपूर्ण उर्वरक उद्योग को लाभ के साथ उर्वरकों के दामों और खपत के स्तर पर व्याप्त असंतुलन भी दूर होगा।
सर्वे में फास्फेट व पोटाश उर्वरकों का स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने के लिए गोरखपुर, सिंदरी, बरौनी, तालचर और रामगुंडम में निर्माणाधीन पांचों सरकारी उर्वरक कारखानों को जल्द पूरा करने व उत्पादन शुरू करने का सुझाव दिया गया है।
साथ ही सलाह दी गई है कि सरकार को देश में फास्फेट व पोटाश उर्वरकों के कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने की व्यवस्था करने के अलावा इनकी बहुतायत वाले देशों में साझा उर्वरक कारखाने लगाने के प्रयास करने चाहिए।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यूरिया खाद में नाइट्रोजन (एन), फास्फेट (पी) और पोटाश (के) का एक निश्चित अनुपात होता है। लेकिन इसलिए हर खेत व हर फसल के लिए उपयुक्त नहीं होती। कुछ फसलें फास्फेट एवं पोटाश की अतिरिक्त खुराक मांगती हैं जो यूरिया से उन्हें नहीं मिलतीं। उसके लिए मिट्टी की जांच करानी जरूरी है। स्वायल हेल्थ कार्ड का यही मकसद है।
