बरेली: डूडा कार्यालय के चक्कर काट घिस गईं चप्पलें, आवास नहीं मिला
बरेली, अमृत विचार। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र लोग अपने आशियाने की तलाश में कई साल से डूडा कार्यालय के चक्कर लगा रहे है लेकिन अभी तक उनके खाते में एक किस्त भी नहीं पहुंची है। इसकी वजह से कई परिवार बरसात के मौसम में खुलें में त्रिपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं। …
बरेली, अमृत विचार। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र लोग अपने आशियाने की तलाश में कई साल से डूडा कार्यालय के चक्कर लगा रहे है लेकिन अभी तक उनके खाते में एक किस्त भी नहीं पहुंची है। इसकी वजह से कई परिवार बरसात के मौसम में खुलें में त्रिपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं। वह लोग कार्यालय में इसी उम्मीद से जा रहें कि जल्दी ही उनके खाते में आवास की किस्त जारी कर दी जाएगी लेकिन डूडा कार्यालय में काम कर कर्मचारी उन्हें एक दूसरे के पास भेजकर चक्कर कटवा रहे हैं।
डूडा कार्यालय में आवास के लिए पहुंची महिलाओं ने बताया कि वह आवास की तलाश में 3 सालों से चक्कर लगा रहीं है। सर्वे होने के बाद भी आज तक आवास का पैसा नहीं आया है। जब कर्मचारी हमारे घर पर सर्वे करने जाते हैं तो कहते हैं कि आपके खाते में पैसा जल्द ही आ जाएगा। इसलिए कुछ खर्चा हमें भी दो। हम लोगों को न चाहते हुए रूपए देने पड़ते हैं कि कहीं वह हमारा आवास निरस्त न कर दें। दो-दो बार सर्वे होने के बाद भी अभी तक सिर्फ डूडा कार्यालय के चक्कर ही काट रहे हैं।
क्या बोले लोग-
कटरा चांद खां निवासी चम्पा देवी ने बताया कि हम कई बार कार्यालय पर आ चुके हैं, हमारा आवेदन भी जमा हो चुका है लेकिन अभी तक पैसे खाते में नहीं आए हैं। डूडा कार्यालय में पूछने पर यह लोग एक दूसरे के पास ही भेजते रहतें हैं।
दुर्गानगर निवासी माया ने कहा हमारा आवेदन दो बार निरस्त कर दिया गया था। तीसरी बार में तो हमारा आवेदन पत्र जमा हो पाया है। बरसात होने से घर में पानी भर रहा है जिससे हमें बहुत दिक्कत हो रही है। अगर आवास मिल जाता तो इस परेशानी से छुटकारा मिल जाता। इसलिए यहां बार- बार आ रहें हैं।
जोगी नवादा निवासी नरगिस ने कहा कि हम कई बार यहां आ चुके हैं लेकिन यह लेाग कोई न कोई बहाना बना देते हैं । बरसात के मौसम में त्रिपाल में रहना मुश्किल हो रहा है। त्रिपाल में पानी भर जाता है।
हुसैनाबाद निवासी मुन्नी ने बताया कि आवेदन पत्र को जमा किए हुए हमें तीन साल हो गए । हमारे घर का दो बार सर्वे भी हो चुका है, लेकिन उसके बाद भी अभी तक आवास के लिए चक्कर काट रहे हैं।
पुराना शहर कांकरटोला निवासी मरियम ने कहा कई बार कार्यालय के चक्कर काट रहें हैं कि हमारी कोई सुन ले। हमारे घर का बुरा हाल हो गया है। घर में पानी भर जाता है। इतने पैसे हमारे पास नहीं जो खुद से घर बनवा सकें। हम इसी उम्मीद में है कि जब पैसा आएगा तब घर बनवा लेंगें।
बिहारीपुर निवासी दीप्ति ने कहा दो साले पहले आवेदन पत्र जमा किया था । करीब 10 महीने बाद आवस का सर्वे भी हो गया है, लेकिन उसके बाद आज तक कुछ नहीं हुआ । पूरा घर गिरने की कगार पर है घर को बांस के सहारे रोका गया है।
