बरेली: चार साल में 30 अनाथ बच्चों को मिली ममता की छांव
सिद्धार्थ भारद्वाज, अमृत विचार। जिले में पिछले 4 साल में लगभग 30 अनाथ बच्चों को ममता की छांव मिली है। इनमें से कई बच्चे तो विदेश में पल बढ़ रहे हैं। इन बच्चों को घर, परिवार के साथ एक बेहतर उज्जवल भविष्य भी मिला है। बाल कल्याण समिति मजिस्ट्रेट डीएन शर्मा ने बताया कि 2017 …
सिद्धार्थ भारद्वाज, अमृत विचार। जिले में पिछले 4 साल में लगभग 30 अनाथ बच्चों को ममता की छांव मिली है। इनमें से कई बच्चे तो विदेश में पल बढ़ रहे हैं। इन बच्चों को घर, परिवार के साथ एक बेहतर उज्जवल भविष्य भी मिला है।
बाल कल्याण समिति मजिस्ट्रेट डीएन शर्मा ने बताया कि 2017 से अभी तक कुल 30 बच्चों को गोद दिए जाने की प्रक्रिया को पूरा किया जा चुका है। गोद लिए जाने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई अनाथ बच्चा चाइल्ड लाइन या अन्य किसी माध्यम से बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाता है तो उस बच्चे को दत्तक ग्रहण इकाई केंद्र पर रखा जाता है।
इसके बाद एक विज्ञापन प्रकाशित कराया था। विज्ञापन प्रकाशित होने के 2 महीने बाद तक अगर कोई बच्चे पर अपना अधिकार जताने नहीं आता तो बाल कल्याण समिति बच्चे को मुक्त कर उसके गोद दिए जाने की प्रक्रिया को शुरू कर देती है। सबसे पहले सीएआरए (सेंट्रल एडोप्शन रिसोर्स एजेंसी) की वेबसाइट पर जानकारी दी जाती है। इच्छुक व्यक्ति वेबसाइट पर मांगी जानकारियों को भरता है। इसके बाद गोद दिए जाने की विधिवत प्रक्रिया शुरू होती है।
लगातार बढ़ रही गोद लेने वालों की संख्या
बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट डीएन शर्मा बताते हैं कि अनाथ बच्चों को अपनाने के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। कोरोना काल में बच्चे गोद नहीं लिया गया। कोरोना काल अगर न होता तो गोद लेने वाले माता पिता की संख्या अधिक होती। अनाथ बच्चों के चेहरे पर एक अलग खुशी दिखाई देती है, जब उन्हें मां की गोद मिलती है।
इन कागजों की पड़ती है जरूरत
- दत्तक माता पिता का पेन कार्ड व आधार कार्ड (अगर वह भारतीय नागरिकता है तो)
- गोद लेने वालों का जन्म प्रमाण पत्र
- निवास प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र
- एमबीबीएस चिकित्सक से दत्तक ग्रहण के लिए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र
- एकल माता पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र या विवाह विच्छेद प्रमाण पत्र
विधिक प्रक्रिया से अपनाए बच्चा
मजिस्ट्रेट बाल कल्याण समिति डीएन शर्मा ने बताया कि सीएआरए द्वारा निर्देशित विधिक प्रक्रिया को अपनाए बिना कोई बच्चा किसी से लेना व देना दंडनीय अपराध है। कोविड काल में अनाथ हुए बच्चों की सूचना बाल कल्याण समिति को दें जिससे मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से उन्हें लाभान्वित किया जा सके।
