कुमाऊं के आस्था के दरबार: मां शीतला देवी के मंदिर में दर्शन मात्र से ही दूर हो जाती हैं कई बीमारियां
आदित्य पंत, हल्द्वानी। भक्तों का हर दुख दूर करने और मुरादें पूरी करने वाली मां शीतला देवी का मंदिर नैनीताल के हल्द्वानी से 8 किमी दूर काठगोदाम स्थित रानीबाग के जंगल में है। मंदिर पहुंचने के लिए सड़क से 500 मीटर की चढ़ाई भी चढ़नी पड़ती है। चारों तरफ से जंगल से घिरे इस मंदिर …
आदित्य पंत, हल्द्वानी। भक्तों का हर दुख दूर करने और मुरादें पूरी करने वाली मां शीतला देवी का मंदिर नैनीताल के हल्द्वानी से 8 किमी दूर काठगोदाम स्थित रानीबाग के जंगल में है। मंदिर पहुंचने के लिए सड़क से 500 मीटर की चढ़ाई भी चढ़नी पड़ती है। चारों तरफ से जंगल से घिरे इस मंदिर में जब श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं तो उनका दिल और दिमाग भी तंदुरुस्त हो उठता है। मान्यता यह भी है कि यहां पर भक्त जो भी सच्चे मन से मांगते हैं, उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है।

मंदिर के चारों ओर का शांत वातावरण, पेड़-पौधे, ठंडी हवाएं, चिड़ियों की चहचहाहट लोगों को आनंद की अनुभूति कराते हैं। यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है ‘शीतला देवी’, जिसे ‘सिताल’ भी कहा जाता है। शीतला मां मंदिर, मां शीतला को समर्पित एक हिन्दू मंदिर है जिसकी उत्तर भारत, पश्चिम बंगाल, नेपाल, बंग्लादेश और पाकिस्तान में पोक्सदेवी के रूप में व्यापक रूप से पूजा की जाती है।
मंदिर के पीछे कभी लगता था हाट बाजार
कहा जाता है कि मंदिर के पीछे चंद राजाओं के समय में हाट का बाजार लगाया जाता था| वहां लोग दूर-दूर से सामान खरीदने आया करते थे। माना जाता है कि मंदिर के पास ही बदरखरी गढ़ था जो गोरखा राजाओं के द्वारा युद्ध में ध्वस्त कर दिया गया। यहां पर आज भी ध्वस्त दीवारों और पत्थरों में ओखली आदि के अवशेष दिखाई देते हैं |

यहां दर्शन करने से दूर होती हैं कई बीमारियां
स्कंद पुराण के मुताबिक मां शीतला का वाहन गर्दभ को माना जाता है। वह अपने हाथों में झाड़ू, सूप, कलश और नीम के पत्तों को धारण करती है। मान्यता है कि यहां पर चिकनपॉक्स, ,खसरा की बीमारी का इलाज बड़ी आसानी से हो जाता है।
भक्तों के लगाए पौधों से तैयार हो चुकी है वाटिका
मां के इस पावन मंदिर में नवरात्र के समय भक्तों की बड़ी भीड़ लगती है। जो भी भक्त यहां दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं, वह पौधा जरूर लगाते हैं। इन पौधों से आज यहां एक अच्छी खासी वाटिका भी तैयार हो चुकी है।
