उम्मीद की किरण

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

कोरोना महामारी के दौरान देश में जहां अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है, वहीं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है। सोमवार को यूएन द्वारा जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया भर में कोविड-19 के कारण लॉकडाउन ने मौजूदा निवेश …

कोरोना महामारी के दौरान देश में जहां अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है, वहीं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है। सोमवार को यूएन द्वारा जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया भर में कोविड-19 के कारण लॉकडाउन ने मौजूदा निवेश परियोजनाओं को धीमा कर दिया और मंदी की आशंका के चलते बहुराष्ट्रीय उद्यमों को नई परियोजनाओं का फिर से आकलन करने को मजबूर होना पड़ा।

यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रुझानों से साफ है कि भारत, वैश्विक निवेशकों के लिए निवेश का एक प्रमुख स्थान बन गया है। यानि प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों का हमारी अर्थव्यवस्था पर भरोसा बढ़ रहा है। वे निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। कोरोना संकट के बावजूद आईटी सेक्टर ने कमाल किया है। कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर सेक्टर में सबसे ज्यादा एफडीआई आया, जो कि कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का 45.81 फीसदी है।

सबसे ज्यादा निवेश जापान से आया। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जनवरी 2021 की अवधि में 72.12 अरब डॉलर का एफडीआई आया। यह किसी भी वित्तीय वर्ष के पहले 10 महीने में आया सबसे अधिक एफडीआई है। जो कि वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना (62.72 अरब डॉलर) में 15 फीसदी ज्यादा एफडीआई है। सवाल स्वाभाविक है कि ऐसे समय में जब कारोबार और बाजार पूरी तरह मंदी की मार झेल रहे हैं, महंगाई पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है, निर्यात के मोर्चे पर अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल पा रही है, तब भी विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी कैसे हो रही है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में प्रभावी नीतिगत सुधार, निवेश की सुविधा के साथ-साथ आसान व्यावसायिक नीतियों द्वारा सरकार की ओर से किए गए प्रभावी उपायों के परिणामस्वरूप देश में विदेशी निवेश में वृद्धि हुई है। वैसे भी कोरोना संकट के समय में बेशक बाजार बंद रहे हों पर आनलाइन बाजार बहुत तेजी से बढ़ा है। इस क्षेत्र को लेकर विदेशी निवेशक उत्साहित हैं। साफ है कि इस तरह के विभिन्न उपायों के कारण, भारत विदेशी निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है। ऐसे में जब देश में अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर विकास दर नकारात्मक रहने को लेकर खासी चिंता जताई जा रही है। कोरोना संक्रमण की दर में कमी आने और धीरे-धीरे बाजार खुलने की वजह से देश में एफडीआई प्रवाह बढ़ने पर उम्मीद की किरण नजर आ रही है कि जैसे ही हालात में सुधार होगा, देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आएगी।