बरेली: मॉडल गांवों के चयन में ‘चहेतों’ का रखा ख्याल
बरेली, अमृत विचार। मॉडल गांव के चयन में बड़े स्तर पर साठगांठ का मामला सामने आया है। जिस तरह कागजों में कृषि फार्म स्कूल खोलकर लाखों रुपए की गड़बड़ी हुई थी, ठीक उसी तरह प्रत्येक ब्लॉक में स्थित 20-20 मॉडल गांवों के चयन में चेहते प्रधानों को लाभ पहुंचाने के मकसद से मानक ताक पर …
बरेली, अमृत विचार। मॉडल गांव के चयन में बड़े स्तर पर साठगांठ का मामला सामने आया है। जिस तरह कागजों में कृषि फार्म स्कूल खोलकर लाखों रुपए की गड़बड़ी हुई थी, ठीक उसी तरह प्रत्येक ब्लॉक में स्थित 20-20 मॉडल गांवों के चयन में चेहते प्रधानों को लाभ पहुंचाने के मकसद से मानक ताक पर रख उनके गांवों के नाम सूची में शामिल कर दिए।
शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक ब्लॉक के 20 मॉडल गांव का चयन करने के निर्देश दिए गए थे ताकि गांव में जाकर मिट्टी की जांच कर किसानों को मिट्टी में जो तत्व की कमी है, उसके बारे में बताया जाए। पिछले दिनों प्रत्येक ब्लॉक में स्थित 20 गांव के चयन की प्रक्रिया शुरू हुई तो इसमें बड़ा खेल हुआ। कर्मचारियों ने अपने चहेते प्रधानों का ख्याल रखने के लिए मानक पूरे नहीं होने पर भी उनके गांवों का नाम सूची में शामिल कर दिए।
जानकारी पर तत्कालीन कुछ प्रधानों ने विरोध भी किया, लेकिन उनकी एक नहीं चली। नवाबगंज, आलमपुर जाफराबाद, बिथरीचैनपुर, बहेड़ी ब्लॉक में सबसे ज्यादा गड़बड़ी हुई। दबी जुबान से प्रधान भी मॉडल गांवों के चयन में गड़बड़ी की बात स्वीकारते दिखे, लेकिन कार्रवाई के डर से वह खुलकर सामने नहीं आ रहे।
किसी ब्लॉक में नहीं हुई गोष्ठी, बजट करना पड़ा सरेंडर
प्रत्येक ब्लॉक में किसानों को मृदा के प्रति जागरूक करने को गोष्ठी का आयोजन किया जाना था, लेकिन सिस्टम में बैठे अफसरों की सुस्ती की वजह से किसी ब्लॉक में गोष्ठी नहीं कराई गई। कभी कोरोना काल तो कभी कोई अन्य बहाना बताकर इसे टाला जाता रहा। प्रत्येक गोष्ठी पर 26 हजार रुपए खर्च किये जाने का बजट शासन से निर्धारित था। वित्तिय वर्ष की समाप्ति के साथ ही अफसरों को गोष्ठी न कराने की वजह से यह सारा बजट सरेंडर करना पड़ा।
कागजों में निपटा डाले थे कृषि फार्म स्कूल
किसानों को उन्नतशील और वैज्ञानिक ढंग से खेती सिखाने के लिए कृषि विभाग की ओर से खरीफ सीजन में प्रत्येक ब्लॉक में दो और रबी में प्रत्येक ब्लॉक में तीन कृषि फार्म स्कूल खोले जाने थे। मकसद था कि किसान परंपरागत खेती छोड़ कम लागत में बेहतर फसल उत्पादन करें, ताकि उनकी आय बढ़ाई जा सके। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी। कृषि फार्म स्कूल केवल कागजों में खोल दिए गए थे। इतना ही नहीं किसानों को इन स्कूलों के बारे में कुछ जानकारी तक नहीं दी गई थी। सरकार से मिलने वाले लाखों के बजट से अफसर, कर्मचारी और कुछ चहेते किसान जरूर मालामाल हो गए।
सूची में कोई गड़बड़ी नहीं
सहायक निदेशक, मृदा परीक्षण विश्वनाथ सिंह ने बताया कि चिह्नित गांवों की सूची में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। उन गावों की मिट्टी की जांच निशुल्क होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद किसानों को अवगत कराया जाए कि उनके मिट्टी में किसी तत्व की कमी है। उसे पूरा कराने से फसल पहले से बेहतर होगी।
