हल्द्वानी: तराई के किसानों की नाराजगी दूर करेगी धामी-कौशिक की जोड़ी

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गौरव पांडेय, हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक की जोड़ी उत्तराखंड में विस चुनाव से पहले तराई के किसानों की नाराजगी दूर करेगी। आंदोलित किसानों की नब्ज टटोलने के साथ ही उन्हें कृषि कानूनों को लेकर भाजपा के पाले में लाने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा हाईकमान ने किसान …

गौरव पांडेय, हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक की जोड़ी उत्तराखंड में विस चुनाव से पहले तराई के किसानों की नाराजगी दूर करेगी। आंदोलित किसानों की नब्ज टटोलने के साथ ही उन्हें कृषि कानूनों को लेकर भाजपा के पाले में लाने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा हाईकमान ने किसान आंदोलन के बीच हरिद्वार से लेकर ऊधमसिंह नगर की तराई में डैमेज कंट्रोल की रणनीति बनाई है।

इसके तहत शीर्ष नेतृत्व ने तराई के इन दो विधायकों और पार्टी नेताओं को किसानों को साधने की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। नए कृषि कानूनों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का उत्तराखंड के हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में भी खासा असर है। तराई में किसानों का आंदोलन प्रदेश भाजपा के साथ ही शीर्ष नेतृत्व को भी असहज करता रहा है। किसान आंदोलन से चुनाव में नफा-नुकसान की आशंका के बीच राज्य में वर्ष 2022 में विधान सभा चुनाव होने हैं। बहुलता के लिहाज से देखा जाए तो राज्य की 70 सदस्यीय विधानसभा में किसान सीधे तौर पर हरिद्वार-ऊधमसिंह नगर की तराई की 20 सीटों को प्रभावित करते हैं।

ऐसे में किसानों के आंदोलन के बीच उपजी नाराजगी को दूर करना चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। इसके इतर, देखा जाए तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक मदन कौशिक की तराई के हरिद्वार जिले की विधान सभा सीटों पर अच्छी पकड़ है। वह तराई से छह बार विधायकी का चुनाव जीत चुके हैं। हरिद्वार जिले में राज्य की सर्वाधिक 11 विधानसभा सीट हैं। हरिद्वार की तराई में कौशिक का खासा जनाधार है। दूसरी ओर नए मुख्यमंत्री चुने गए पुष्कर सिंह धामी भी ऊधमसिंह नगर की तराई की खटीमा सीट से विधायक हैं। धामी की भी ऊधमसिंह नगर की तराई में खासी सक्रियता है।

कुमाऊं की तराई के इस जिले में सर्वाधिक नौ विधान सभा सीटें हैं। राज्य में किसानों के प्रभाव वाली 20 विधानसभा सीटों पर चुनाव में निर्णायक भूमिका हो सकती है। किसानों के बीच एंटी इंकंबेंसी के फैक्टर को देखते हुए भाजपा के रणनीतिकारों ने चुनाव से पहले तराई के किसानों के बीच डैमेज कंट्रोल की रणनीति बनाई है। इन सीटों पर कौशिक और धामी के प्रभाव को देखते हुए भाजपा हाईकमान किसानों की नाराजगी दूर करना चाहता है। इसके लिए तराई के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के चेहरे को आगे करने की रणनीति तैयार की है।

सरकार और संगठन दोनों मिलकर साधेंगे
आंदोलित किसानों को सरकार और संगठन मिलकर साधेंगे। किसान मतदाताओं को मनाने के लिए सरकार और संगठन दोनों के स्तर पर रणनीति बनेगी। नए किसान कानूनों के पक्ष में माहौल बनाने के साथ ही सरकार की किसान हितैषी योजनाओं को उनके बीच ले जाया जाएगा। भाजपा किसानों को विश्वास दिलाएगी कि वह किसानों के साथ खड़ी है और नए कानून उनके हित में हैं। किसान आंदोलन की आड़ में कुछ राजनीतिक ताकतें उन्हें बहका और बहला रही हैं।

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