बरेली: अन्य राज्यों की तरह मंडी शुल्क यहां भी पूरा माफ करें

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में मंडियों को घाटे से उबारने के लिए आढ़तियों की मांग पर प्रदेश सरकार ने एक प्रतिशत मंडी शुल्क में कटौती तो कर दी लेकिन व्यापारी इस आदेश से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार को अन्य राज्यों की तरह मंडी शुल्क पूरा माफ कर देना चाहिए या …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में मंडियों को घाटे से उबारने के लिए आढ़तियों की मांग पर प्रदेश सरकार ने एक प्रतिशत मंडी शुल्क में कटौती तो कर दी लेकिन व्यापारी इस आदेश से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार को अन्य राज्यों की तरह मंडी शुल्क पूरा माफ कर देना चाहिए या फिर 0.5 प्रतिशत किया जाए। मंडी के बाहर और अंदर व्यापार करने में भी समानता रखी जाए।

असल में केंद्र सरकार के नये अध्यादेश में मंडी के बाहर व्यापार करने वालों पर कोई शुल्क नहीं लग रहा लेकिन मंडी परिसर में आढ़तियों से दो प्रतिशत मंडी शुल्क व 0.5 प्रतिशत विकास शुल्क लिया जा रहा था। इसको लेकर उप्र. उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले पिछले दिनों हड़ताल की गई थी। इस दौरान जिले की सभी मंडियां एक सप्ताह तक बंद रहीं जिससे सरकार को नुकसान हुआ। इसके बाद ही प्रदेश सरकार ने एक प्रतिशत मंडी शुल्क घटा दिया।

अब आढ़तियों को व्यापार में एक प्रतिशत मंडी शुल्क और 0.5 प्रतिशत विकास शुल्क देना होगा। इससे आढ़ती अब भी नाखुश हैं। उनका कहना है सरकार को व्यापार में समानता दिखानी चाहिए। किसी से भेदभाव नहीं करना चाहिए। बिना लाइसेंस के व्यापारियों को कोई शुल्क नहीं और जो लाइसेंस बनवाकर व्यापार कर रहे हैं उनसे मंडी शुल्क वसूलने का नियम गलत है। हरियाणा, राजस्थान, एमपी सहित सभी मंडियों में 0.5 प्रतिशत शुल्क लिया जाता है। इसी तरह प्रदेश में भी यही व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

इनकी सुनिए

मंडी शुल्क व्यापारियों के आंदोलन और हड़ताल की वजह से कम हुआ है। इससे व्यापारी और किसानों को राहत मिलेगी। हालाकि सरकार ने अभी आधी मांग पूरी की है, पूरा शुल्क माफ किया जाना चाहिए। -सुरेंद्र कुमार, आढ़ती

जब हरियाणा, राजस्थान आदि मंडियों में 0.5 प्रतिशत मंडी शुल्क कर दिया गया है तो यूपी में भी इसे लागू करने चाहिए था। कुल मिलाकर सरकार ने व्यापारियों की मांग पर लॉलीपॉप थमाने का काम किया है। -राजीव, गल्ला व्यापारी

सरकार को व्यापार में समानता रखनी चाहिए जो लोग प्रशासन की देखरेख में व्यापार करें उनसे मंडी शुल्क लिया जाए लेकिन जो बिना लाइसेंस व्यापार करें उनको फ्री में व्यापार की छूट देना बिल्कुल गलत है। -सोनू, आढ़ती

फसलों का समर्थन मूल्य काफी कम है, मंडी में अत्यधिक मंडी शुल्क देना पड़ता था। डीजल, जोताई आदि के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इससे कृषि लागत बढ़ रही है। मंडी शुल्क घटने से अब कुछ राहत मिलेगी। -सत्यपाल, किसान

बोले-मंडी सचिव
मंडी सचिव अनिल कुमार ने बताया कि व्यापारियों की मांग पर सरकार ने मंडी शुल्क एक फीसदी कम किया है, इससे किसान और कारोबारी को राहत मिलेगी। इस राशि से मंडी में सुविधाएं विकसित होती हैं। सरकार के इस फैसले से बाहर कारोबार करने वाले व्यापारी वापस मंडी में आ जाएंगे।

संबंधित समाचार